New Labor Code: भारत में नई श्रम संहिताएं लागू हो गई हैं। अब 300 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को छंटनी या यूनिट बंद करने के लिए सरकार की अनुमति लेनी होगी। जानें वेतन, ओवरटाइम, सामाजिक सुरक्षा और प्लेटफॉर्म वर्कर्स से जुड़े नए नियम।
नई दिल्ली | निजी कंपनियों में काम करने वाले लाखों कर्मचारियों को अब मनमानी छंटनी का डर काफी हद तक कम होने वाला है। सरकार ने श्रम कानूनों में बड़े बदलाव करते हुए स्पष्ट कर दिया है कि 300 से ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियां अगर किसी को नौकरी से निकालना चाहें या अपने प्रतिष्ठान को बंद करना चाहें, तो उन्हें पहले राज्य सरकार से मंजूरी लेनी होगी। यह कदम लंबे समय से चले आ रहे श्रमिक–नियोक्ता विवादों को संतुलित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
29 पुराने कानूनों को मिलाकर बनीं 4 नई श्रम संहिताएं New Labor Code
श्रम एवं सेवायोजन मंत्री अनिल राजभर के अनुसार, केंद्र सरकार ने दशकों पुराने, जटिल और कई बार एक-दूसरे से टकराने वाले 29 श्रम कानूनों को सरल बनाकर 4 व्यापक श्रम संहिताओं में बदल दिया है। इनमें शामिल हैं:
मजदूरी संहिता, 2019
सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020
औद्योगिक संबंध संहिता, 2020
व्यवसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यदशा संहिता, 2020
राजभर ने बताया कि 21 नवंबर से ये नियम पूरे देश में लागू हो गए हैं, जिससे श्रम कानूनों की जटिलता काफी कम हुई है। पहले जहां 1228 कानूनी धाराएं थीं, अब इन्हें घटाकर 480 कर दिया गया है। इसी तरह 1436 नियमों की जगह अब 351 नियम ही लागू होंगे।
कर्मचारियों के लिए क्या बदला? आसान भाषा में समझें
1. मनमानी छंटनी पर रोक
300 से अधिक कर्मचारियों वाली कंपनियों को अब किसी भी प्रकार की छंटनी या यूनिट बंद करने से पहले राज्य सरकार की अनुमति लेनी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे कर्मचारियों को सुरक्षा की भावना मिलेगी और कंपनियों को पारदर्शिता बढ़ानी पड़ेगी।
2. वेतन और ओवरटाइम से जुड़े महत्वपूर्ण बदलाव
सभी क्षेत्रों में न्यूनतम मजदूरी लागू होगी।
ओवरटाइम का भुगतान पहले से दोगुना किया जाएगा।
वेतन कटौती की अधिकतम सीमा सिर्फ 50% रखी गई है।
हर कर्मचारी को अब वेज-स्लिप (पे स्लिप) देना कानूनी रूप से अनिवार्य होगा।
3. ऑनलाइन निरीक्षण—इंस्पेक्टर राज खत्म
सरकार ने निरीक्षण प्रक्रिया को ऑनलाइन कर दिया है ताकि अनावश्यक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम किया जा सके।
पहली बार प्लेटफॉर्म वर्कर्स को मिलेगा कानूनी दर्जा
संशोधित कानूनों में स्विगी, जोमैटो, उबर, ओला, अमेज़न डिलीवरी पार्टनर जैसे प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी पहली बार कानूनी मान्यता दी गई है।
इससे इनके लिए सामाजिक सुरक्षा कोष बनाया जाएगा, जिसमें बीमा, पेंशन, दुर्घटना सहायता जैसी सुविधाएँ दी जा सकेंगी।
श्रम विशेषज्ञों के अनुसार, यह भारत में गिग इकॉनमी को औपचारिक रूप से पहचान देने की दिशा में बड़ा कदम है।
निजी आवास निर्माण सीमा बढ़ाई
सामान्य नागरिकों को राहत देते हुए निजी आवास निर्माण की अधिकतम सीमा को बढ़ाकर 50 लाख रुपये किया गया है, जिससे छोटे और मध्यम वर्गीय परिवारों पर आर्थिक दबाव कम होगा।
कामगारों की सुरक्षा और स्वास्थ्य पर विशेष जोर
नई स्वास्थ्य एवं सुरक्षा संहिता के तहत:
कारखानों, खदानों, प्लांटेशन्स, पत्रकारिता, भवन निर्माण और सेवा क्षेत्र के कर्मचारियों की सुरक्षा को नई व्यवस्था में शामिल किया गया है।
सभी कर्मचारियों का वार्षिक स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य किया गया है।
कार्यस्थल की स्वच्छता, सुरक्षित वातावरण और कार्यदशा पर विशेष नियम लागू होंगे।
क्यों जरूरी था यह बदलाव?
भारत के श्रम कानून लंबे समय से बेहद जटिल और बोझिल माने जाते थे। उद्योग जगत अक्सर शिकायत करता था कि जटिल नियमों के कारण कारोबार करना मुश्किल होता है। दूसरी ओर, कर्मचारी सुरक्षा भी कमजोर थी।
नई संहिताएं:
कानूनों को सरल, स्पष्ट, और डिजिटल-फ्रेंडली बनाती हैं,
व्यवसायों को बढ़ावा देती हैं,
और कर्मचारियों को मजबूत कानूनी सुरक्षा प्रदान करती हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संतुलित और आधुनिक श्रम सुधार भारत को वैश्विक स्तर पर निवेश आकर्षित करने में मदद करेगा।













