Organ Donation (चंडीगढ़) : अगस्त का महीना पीजीआई में करुणा और साहस का महीना साबित हुआ। 3 परिवारों ने बिछड़ने के दर्द में भी इंसानियत की मिसाल कायम रखते हुए 9 को जीवनदान और 2 को दृष्टि का तोहफा दिया। इन दानवीरों ने न सिर्फ जिंदगी की लो जलाई, बल्कि समाज में उम्मीद की किरण भी जगाई । तीन ब्रेन डेड मरीजों के परिवारों ने यह फैसला लिया। पीजीआई की ओर से तीन ग्रीन कॉरिडोर बनाए गए। दिल, फेफड़े और अन्य अंग समय रहते जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाए गए।
इनके अंग डोनेट हुए
• 27 अगस्त का मामलाः पटियाला निवासी 50 वर्षीय व्यक्ति गंभीर सिर की चोट के बाद ब्रेन डेड घोषित हुए। परिवार ने साहस दिखाते हुए अंगदान की सहमति दी। किडनी पीजीआई में ट्रांसप्लांट हुईं। हार्ट ग्रीन कॉरिडोर के जरिए दिल्ली के सर गंगा राम अस्पताल पहुंचाया गया। लीवर मैक्स अस्पताल साकेत भेजा गया। कॉर्निया दो दृष्टिहीनों की आंखों में उजाला भर दिया।
• 21 अगस्त को हिसार के 35 वर्षीय युवक सड़क दुर्घटना के शिकार बने। परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया। दोनों किडनी पीजीआई में ट्रांसप्लांट की गईं, जिससे दो मरीजों को जीवनदान मिला।
• 8 अगस्त को पटियाला की 20 वर्षीय युवती सड़क हादसे में ब्रेन डेड घोषित हुई।
पीजीआई में लीवर, किडनी और पैंक्रियाज ट्रांसप्लांट हुए। फेफड़े ग्रीन कॉरिडोर से
चेन्नई भेजे गए। इस तरह चार जिंदगियां बचाई गई।
अंग स्वर्ग मत ले जाओ, जरूरत यहां है
एक परिजन ने भावुक होकर कहा कि हमारा दुख अपार है, लेकिन यह जानकर सुकून है कि हमारे अपनों का एक हिस्सा दूसरों में जिंदा हैं। पीजीआई डायरेक्टर प्रो. विवेक लाल ने कहा हर अंगदान साहस और इंसानियत की अनूठी मिसाल है । तीनों परिवारों ने अपने सबसे कठिन समय में दूसरों को जिंदगी देकर समाज के सामने प्रेरणा पेश की है।
वहीं, रोटो नॉर्थ के नोडल अफसर प्रो. विपिन कौशल ने कहा कि ग्रीन कॉरिडोर बनाने में पुलिस व ट्रैफिक विभाग का सहयोग अहम रहा। यह साबित करता है कि सामूहिक प्रयास से दुख को भी उम्मीद में बदला जा सकता है। अगस्त के इन तीन मामलों में कुल 9 जिंदगियां बचीं और 2 नेत्रहीनों को दृष्टि मिली। पीजीआई ने सभी डोनर परिवारों के इस साहस और करुणा को नमन करते हुए समाज से अपील की है- अंग स्वर्ग मत ले जाओ, स्वर्ग को उनकी जरूरत नहीं… जरूरत यहां है।













