Pahalgam Terror Attack “Lieutenant Vinay Narwal’s martyrdom, sister’s cry, ‘We want the heads of the terrorists'”: हरियाणा के करनाल में उस समय माहौल गम और गुस्से से भर गया, जब शहीद लेफ्टिनेंट विनय नरवाल का अंतिम संस्कार हो रहा था। उनकी छोटी बहन सृष्टि नरवाल ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने फूट-फूटकर रोते हुए कहा, “जिन्होंने मेरे भाई को मारा, मुझे उनका सिर चाहिए। तभी मेरे परिवार को सुकून मिलेगा।” सृष्टि का यह गुस्सा और दर्द हर उस भारतीय के दिल को छू रहा है, जो अपने देश के वीर सपूतों की शहादत पर आंसू बहाता है।
जम्मू-कश्मीर में छिना नवविवाहित जोड़े का सपना Pahalgam Terror Attack
26 वर्षीय विनय नरवाल, भारतीय नौसेना के एक होनहार लेफ्टिनेंट, अपनी जिंदगी के सबसे खूबसूरत पल जी रहे थे। 16 अप्रैल 2025 को उनकी शादी हिमांशी नरवाल के साथ हुई थी। शादी के महज छह दिन बाद, 21 अप्रैल को यह नवविवाहित जोड़ा हनीमून के लिए जम्मू-कश्मीर के खूबसूरत पहलगाम पहुंचा। लेकिन अगले ही दिन, 22 अप्रैल को आतंकियों ने विनय की गोली मारकर हत्या कर दी। यह घटना न केवल विनय के परिवार, बल्कि पूरे देश के लिए एक गहरा सदमा है।
मुख्यमंत्री का आश्वासन
करनाल के मॉडल टाउन में श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार के दौरान मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मौजूद थे। सृष्टि ने उनसे गुहार लगाई कि आतंकियों को सजा दी जाए। मुख्यमंत्री ने सृष्टि के सिर पर हाथ रखकर उन्हें ढांढस बंधाया और कठोर कार्रवाई का वादा किया। उन्होंने कहा, “जिन्होंने इस देश के बेटे को मारा, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।” यह आश्वासन सुनकर सृष्टि और परिवार को थोड़ा सुकून मिला, लेकिन उनके दिल का दर्द अभी भी ताजा है।
देश की भावनाएं और सवाल Lieutenant Vinay Narwal
विनय नरवाल की शहादत ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ देश की जंग को और मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया है। उनकी बहन सृष्टि की यह मांग कि “हमें आतंकियों का सिर चाहिए,” केवल एक परिवार की पुकार नहीं, बल्कि हर भारतीय की भावना को दर्शाती है। यह घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आखिर कब तक हमारे वीर सैनिकों को आतंक की बलि चढ़ना पड़ेगा? कब तक नवविवाहित जोड़ों के सपने इस तरह छिनते रहेंगे?
एक सैनिक का बलिदान, एक देश का गर्व
लेफ्टिनेंट विनय नरवाल ने अपने कर्तव्य और देश के प्रति अपनी निष्ठा को सबसे ऊपर रखा। उनकी शहादत हमें याद दिलाती है कि हमारे सैनिक हर पल हमारी सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डालते हैं। सृष्टि की मांग और विनय की शहादत को भुलाया नहीं जा सकता। यह देश का कर्तव्य है कि उनके बलिदान को सम्मान दे और आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कदम उठाए।












