मुंबई, 02 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा में जालसाजी और धोखाधड़ी के मामलों में लंबे समय से फरार चल रहे आरोपी आलोक कुमार उर्फ यशपाल सिंह का खेल अब खत्म हो गया है। 1 मई 2026 को सीबीआई (CBI) ने विदेश मंत्रालय और गृह मंत्रालय के साथ मिलकर एक सफल ऑपरेशन को अंजाम देते हुए आरोपी को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से भारत वापस लाने में सफलता हासिल की है। मुंबई एयरपोर्ट पर लैंड करते ही हरियाणा पुलिस की विशेष टीम ने उसे अपनी हिरासत में ले लिया। यह कार्रवाई प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने की दिशा में एक बड़ी जीत मानी जा रही है।
फर्जी पासपोर्ट गिरोह का हुआ भंडाफोड़
जांच में खुलासा हुआ है कि आलोक कुमार केवल एक जालसाज नहीं, बल्कि एक संगठित गिरोह का अहम हिस्सा था। यह गिरोह फर्जी पहचान और गलत पते का इस्तेमाल कर जाली पासपोर्ट तैयार करवाता था। इस अवैध काम के जरिए गिरोह ने कई कुख्यात अपराधियों को देश की सीमाओं से बाहर भागने में मदद की थी। हरियाणा पुलिस ने आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और दस्तावेजों में हेराफेरी जैसी गंभीर धाराओं में केस दर्ज किया था, जिसके बाद से वह लगातार अपनी लोकेशन बदलकर विदेश में छिपा हुआ था।
इंटरपोल और ‘भारतपोल’ की रणनीतिक जीत
आरोपी की गिरफ्तारी के लिए सीबीआई ने इंटरपोल की मदद ली और उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी करवाया। यूएई में लोकेशन ट्रेस होने के बाद वहां की पुलिस ने आलोक को धरदबोचा। भारत सरकार ने तुरंत प्रत्यर्पण की कानूनी प्रक्रिया शुरू की, जिसके बाद उसे भारत लाया गया। सीबीआई भारत में इंटरपोल के लिए नोडल एजेंसी के रूप में काम करती है और ‘भारतपोल’ अभियान के तहत अब तक 150 से अधिक भगोड़ों को विदेशों से वापस लाकर सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है।
अपराधियों के लिए सख्त संदेश
यह पूरी कार्रवाई स्पष्ट करती है कि अब भारतीय जांच एजेंसियों की पहुंच सात समंदर पार तक हो चुकी है। हरियाणा पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि आरोपी से पूछताछ में कई अन्य सफेदपोशों और पासपोर्ट कार्यालय के संदिग्ध एजेंटों के नाम सामने आ सकते हैं। सरकार की इस मुस्तैदी ने उन अपराधियों में खौफ पैदा कर दिया है जो अपराध करने के बाद विदेश जाकर कानून से बचने का सपना देखते थे। अब आलोक कुमार को जल्द ही हरियाणा की संबंधित अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया जाएगा।
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