चंडीगढ़ में डिजिटल अरेस्ट करके दंपती से 38 लाख ठगने वाले गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पुलिस ने मास्टरमाइंड समेत 6 लोगों को गिरफ्तार किया। ठगी का पैसा क्रिप्टो के जरिए चीन भेजा जाता था।
चंडीगढ़. शहर में साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है। यहां एक दंपती को घर बैठे-बैठे ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर लिया गया और डर दिखाकर उनसे 38 लाख रुपये ठग लिए गए।
हालांकि चंडीगढ़ पुलिस की साइबर सेल ने मुस्तैदी दिखाते हुए इस अंतरराष्ट्रीय गिरोह का भंडाफोड़ कर दिया है। पुलिस ने इस मामले में एक महिला समेत कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि इस ठगी के तार चीन से जुड़े हुए थे और पैसे को क्रिप्टो करेंसी में बदलकर विदेश भेजा जा रहा था।
क्या होता है डिजिटल अरेस्ट
इस मामले को समझने से पहले यह जानना जरूरी है कि डिजिटल अरेस्ट आखिर है क्या। दरअसल यह एक मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का तरीका है। इसमें ठग खुद को पुलिस या सीबीआई अधिकारी बताकर वीडियो कॉल करते हैं।
वे पीड़ित को डराते हैं कि उनका नाम किसी बड़े अपराध में आया है और उन्हें कैमरे के सामने ही रहना होगा। पीड़ित डर के मारे न फोन काट पाता है और न ही किसी से मदद मांग पाता है। चंडीगढ़ वाले मामले में भी यही हुआ।
कोलाबा पुलिस से सीबीआई तक का नाटक
घटना 7 जनवरी 2026 की शाम की है। पीड़ित के पास एक अनजान नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई के कोलाबा पुलिस स्टेशन का अधिकारी बताया। उसने कहा कि आपके आधार कार्ड और बैंक खाते का इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग में हुआ है।
इसके बाद एक फर्जी वारंट भेजा गया। फिर एक दूसरे व्यक्ति ने सीबीआई अधिकारी बनकर बात की और दंपती को डराया कि अगर उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें जेल हो जाएगी।
आरोपियों ने पति पत्नी को स्काइप और व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए लगातार निगरानी में रखा। उन्हें दो दिन तक मानसिक रूप से इतना प्रताड़ित किया गया कि वे घर से बाहर नहीं निकल पाए। अंत में कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए पीड़ितों ने आरटीजीएस के जरिए 38 लाख रुपये ठगों के बताए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
पुलिस ने ऐसे सुलझाई गुत्थी
एसपी साइबर सेल गीतांजलि खंडेलवाल ने बताया कि शिकायत मिलते ही पुलिस ने तकनीकी जांच शुरू की। पैसों के लेनदेन यानी ट्रेल को खंगाला गया।
पहली गिरफ्तारी: पुलिस ने सबसे पहले 9 जनवरी को चंडीगढ़ के सेक्टर 32 से वीना रानी नामक महिला को पकड़ा। उसके खाते में पैसे ट्रांसफर हुए थे।
कड़ी से जुड़ी कड़ी: वीना की निशानदेही पर पुलिस ने सेक्टर 45 से मुकेश उर्फ प्रिंस, धर्मिंदर, सुखदीप और सतनाम को गिरफ्तार किया।
मास्टरमाइंड: इन सबसे पूछताछ के बाद पुलिस चेन्नई पहुंची और वहां से गिरोह के सरगना फजल उर्फ रॉकी को दबोच लिया।
चीन भेजा जा रहा था पैसा
जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। चेन्नई से गिरफ्तार मास्टरमाइंड फजल टेलीग्राम ऐप के जरिए सीधे चीनी नागरिकों के संपर्क में था। यह गिरोह ठगी गई रकम को तुरंत यूएसडीटी (USDT) यानी क्रिप्टो करेंसी में बदल देता था और फिर उसे चीन भेज देता था। इस काम के लिए मुकेश उर्फ प्रिंस अहम भूमिका निभाता था। गिरोह के सदस्यों को हर ट्रांजैक्शन पर 10 प्रतिशत कमीशन मिलता था।
बरामदगी और पुलिस की अपील
पुलिस ने आरोपियों के पास से 7 मोबाइल फोन, 2 लैपटॉप, भारी मात्रा में एटीएम कार्ड, चेकबुक और पासबुक बरामद की है। एसपी गीतांजलि खंडेलवाल ने आम जनता से अपील की है कि कोई भी पुलिस या जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर पूछताछ या गिरफ्तारी नहीं करती है।
अगर ऐसा कोई कॉल आए तो घबराएं नहीं और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें। साथ ही अपना बैंक खाता किसी अनजान व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें।
आरोपियों की सूची
पुलिस ने जिन लोगों को गिरफ्तार किया है उनमें शामिल हैं:
वीना रानी: फिरोजपुर पंजाब
सतनाम सिंह: फिरोजपुर पंजाब
सुखदीप सिंह: फाजिल्का पंजाब
धर्मिंदर सिंह: फाजिल्का पंजाब
मुकेश उर्फ प्रिंस: सेक्टर 45 चंडीगढ़
फजल उर्फ रॉकी: चेन्नई तमिलनाडु
फिलहाल पुलिस ने पीड़ित के पैसों को बैंक खातों में होल्ड करवा दिया है और मामले की आगे की जांच जारी है।













