अंबाला (Panjokhra Leopard Sighting)। पंजोखरा में तेंदुआ होने की सूचना फैलने से क्षेत्र में सनसनी मच गई। इसके बाद वन्य प्राणी विभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ मिलकर सर्च अभियान चलाया। हालांकि सर्च अभियान के दौरान टीम को तेंदुआ या अन्य कोई जानवर होने का कोई सुराग नहीं मिला।
पंजोखरा निवासी कर्ण शाम साढ़े पांच बजे अपने खेतों में पानी दे रहे थे। पंजोखरा तोपखाना रोड के पर कर्ण की एक गोशाला भी है। इसी दौरान उन्होंने देखा कि तेंदुआ जैसा जानवर खेत में घूम रहा है। इसके बाद उन्होंने पुलिस और वन्य प्राणी विभाग से संपर्क किया।
Panjokhra Leopard Sighting: तेंदुआ जैसा जानवर देखा
वन्य प्राणी विभाग की टीम सूचना देने वाले कर्ण के साथ खेत व इसके आसपास के स्थान पर सर्च करने गए मगर कोई जानवर नहीं मिला। वंदे मातरम दल के संस्थापक भरत ने बताया कि वन्य प्राणी विभाग की टीम ने सर्च अभियान चलाया मगर कोई कामयाबी नहीं मिली। शनिवार को भी अभियान चलाकर जानवर की तलाश की जाएगी।
क्षेत्र में तीन से चार बार ऐसा हुआ है जब ग्रामीणों ने वन्य प्राणी विभाग को तेंदुआ होने की सूचना दी तो विभाग ने सर्च अभियान चलाया मगर कोई कामयाबी नहीं मिली। हालांकि वन्य प्राणी विभाग शुरुआत से तेंदुआ होने की बात नकार रहा है।
शहरों में तेंदुआ
हरियाणा के शहर अब तेंदुओं का प्ले ग्राउन्ड बनते जा रहे हैं। अंबाला, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पानीपत जैसे इलाकों में तेंदुए घूमते दिख रहे। रात में गलियों में, दिन में खेतों में – लोग सहमे हैं। वन विभाग की टीमें सर्च कर रही, लेकिन सवाल वही – तेंदुए जंगल छोड़ शहर क्यों आ रहे?
जंगल सिकुड़ रहे, तेंदुआ भटक रहा
मुख्य वजह जंगलों का कम होना। विकास के नाम पर पेड़ कट रहे, तेंदुओं का घर उजड़ रहा। खाने की तलाश में – हिरण, खरगोश कम – वो शहर की ओर। कुत्ते, बकरियां, कचरा आसान शिकार। मानव अतिक्रमण ने जंगल-शहर की लाइन मिटा दी।
विभाग अलर्ट, क्या करें?
लोग रात में बाहर निकलने से डरते हैं। बच्चे अकेले नहीं खेलते। वन विभाग कैमरा ट्रैप लगा रहा, लेकिन पकड़ना मुश्किल। सलाह – कचरा बाहर न छोड़ें, पालतू जानवर बंद रखें, रात में शोर करें।













