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Paperless Registry: कैथल में पेपरलेस रजिस्ट्री में पोर्टल बना बाधा, सिर्फ 2 हुईं रजिस्ट्री

On: November 10, 2025 6:55 PM
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Paperless Registry: कैथल में पेपरलेस रजिस्ट्री में पोर्टल बना बाधा, सिर्फ 2 हुईं रजिस्ट्री
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कैथल (Paperless Registry)। जिले में पहली नवंबर से शुरू हुई पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था फिलहाल ठप पड़ी है। दरअसल, रजिस्ट्री के लिए तैयार किए गए नए सॉफ्टवेयर में कई तकनीकी खामियां सामने आई हैं, जिसके चलते अब तक जिले में सिर्फ दो रजिस्ट्री ही पूरी हो पाई हैं। इनमें एक कैथल और दूसरी पूंडरी में हो सकी है। वहीं पहले सामान्य दिनों में औसतन 40 से 45 रजिस्ट्री होती थीं।

तकनीकी बाधाओं के कारण न तो टोकन कट रहे हैं और न ही रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी हो रही है। इससे बैंक लोन, संपत्ति की खरीद-बिक्री और दस्तावेज़ हस्तांतरण पूरी तरह रुक गए हैं। आम आदमी के साथ ही डीड राइटर और प्राॅपटी डीलर भी परेशान हैं। रजिस्ट्री नहीं होने से प्राॅपर्टी डीलरों के करोड़ों के सौदे बीच में ही अटक गए हैं। राजस्व विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल को अपडेट होने में अभी कुछ समय लग सकता है। ऐसे में अभी लोगों का रजिस्ट्री कराने में और समस्या झेलनी पड़ेगी।

Paperless Registry: विदेश से आए लोग भी परेशान

सेक्टर-19 निवासी मेघराज शर्मा ने बताया कि उनके भाई अनंत राम शर्मा (80) की रजिस्ट्री एक नवंबर को तय थी, लेकिन पोर्टल की गड़बड़ी से नहीं हो पाई। उनका बेटा विदेश से सिर्फ 15 दिन के लिए भारत आया था और अब 14 नवंबर को उसकी वापसी की टिकट है। उन्होंने बताया कि कागजात जुटाने में ही कई दिन लग गए, अब ऑनलाइन रजिस्ट्री के कारण पूरा काम अटक गया है।

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तहसील कार्यालय में सन्नाटा

सोमवार को दोपहर तहसील कार्यालय में रजिस्ट्री शाखा लगभग खाली मिली। इस सन्नाटे के दौरान कुछ लोग केवल जानकारी लेने पहुंचे थे, जबकि कर्मचारी नई प्रणाली को लेकर माथापच्ची में लगे थे।

सॉफ्टवेयर में क्या हैं खामियां

डीड राइटर सतीश कुमार मित्तल ने बताया कि पोर्टल की तकनीकी खराबियों के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया रुकी हुई है। 10 दिन में कैथल में केवल एक रजिस्ट्री हो सकी है। फिलहाल सिस्टम पूरी तरह बंद है, जिससे लोग और कारोबारी वर्ग दोनों परेशान हैं।

दस्तावेज़ों की खराब क्वालिटी: साफ्टवेयर में अपलोड किए गए दस्तावेज काले-सफेद या धुंधले दिखाई दे रहे हैं। इस वजह से कर्मचारी यह पता नहीं लगा पा रहे कि दस्तावेज़ की मूल प्रति अपलोड की गई है या फोटोकॉपी, जबकि नियमों के अनुसार मूल दस्तावेज़ अनिवार्य है।

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संपत्ति की लोकेशन की पहचान में मुश्किल: नया सॉफ्टवेयर संपत्ति का सही क्षेत्र, जैसे कि वह किसी सेक्टर, कॉलोनी या ग्रामीण इलाके में है, यह स्पष्ट रूप से नहीं दिखा पा रहा है। इस कारण संबंधित जमीन का कलेक्टर रेट तय करना मुश्किल हो गया है, जिससे मूल्यांकन में गड़बड़ियां हो रही हैं।

संयुक्त संपत्ति की रजिस्ट्री असंभव: सॉफ्टवेयर की सबसे बड़ी खामियों में से एक यह है कि यह संयुक्त स्वामित्व वाली संपत्तियों की रजिस्ट्री नहीं कर पा रहा है। अगर किसी संपत्ति का एक से अधिक मालिक या खरीदार है, तो सिस्टम एरर दिखाकर प्रक्रिया रोक देता है।

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राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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