Sindhu Jal sandhi kya hai Indus Water Treaty decisions of CCS meeting: पहलगाम में हुए दिल दहलाने वाले आतंकी हमले ने भारत को गहरे सदमे में डाल दिया। इस हमले के जवाब में केंद्र की मोदी सरकार ने पाकिस्तान के खिलाफ अभूतपूर्व कदम उठाया है। सुरक्षा मामलों पर कैबिनेट की बैठक में भारत ने सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का ऐलान किया, जब तक कि पाकिस्तान सीमापार आतंकवाद को पूरी तरह खत्म नहीं करता।
यह फैसला पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका है, क्योंकि यह संधि उसके लिए जीवन रेखा की तरह है। भारत ने पहले कभी इतना कड़ा रुख नहीं अपनाया था। आइए जानते हैं कि यह संधि क्या है और क्यों है इतनी अहम।
Sindhu Jal Sandhi kya hai: सिंधु जल संधि का इतिहास
सिंधु जल संधि की नींव 19 सितंबर 1960 को रखी गई थी, जब भारत और पाकिस्तान ने विश्व बैंक की मध्यस्थता में इस पर हस्ताक्षर किए। भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने इस समझौते को अंतिम रूप दिया।
नौ साल की लंबी बातचीत के बाद बनी यह संधि विश्व बैंक द्वारा सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय समझौतों में से एक मानी गई। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति ड्वाइट आइजनहावर ने इसे वैश्विक तनाव के बीच एक उम्मीद की किरण बताया था। यह संधि सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे को नियंत्रित करती है, जो दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण है।
संधि का ढांचा और महत्व
इस संधि के तहत भारत को पूर्वी नदियों सतलज, ब्यास और रावी पर पूरा नियंत्रण मिला, जबकि पाकिस्तान को पश्चिमी नदियों सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी उपयोग करने का अधिकार दिया गया। ये पश्चिमी नदियां जम्मू-कश्मीर से होकर बहती हैं और पाकिस्तान की कृषि और जल आपूर्ति के लिए रीढ़ की हड्डी मानी जाती हैं।
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की 2018 की एक रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान दुनिया के सबसे अधिक जल संकटग्रस्त देशों में तीसरे स्थान पर है। ऐसे में सिंधु नदी का पानी उसके लिए जीवन रेखा है, जिसके बिना उसकी अर्थव्यवस्था और जनजीवन पर गहरा संकट आ सकता है।
भारत का अधिकार और निलंबन का आधार
भारत ने इस बार वियना संधि के नियमों का हवाला देते हुए संधि को निलंबित करने का फैसला लिया। वियना समझौते की धारा 62 के तहत, अगर कोई देश संधि की मूल शर्तों का उल्लंघन करता है, तो उसे रद्द किया जा सकता है। भारत का कहना है कि पाकिस्तान आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देकर संधि की भावना का दुरुपयोग कर रहा है।
भारत के जल शक्ति मंत्रालय ने पहले भी कहा था कि देश पश्चिमी नदियों के पानी का उपयोग कृषि, घरेलू जरूरतों और हाइड्रो-इलेक्ट्रिक पावर के लिए कर सकता है। संधि के तहत भारत को 3.6 मिलियन एकड़ फीट पानी का भंडारण करने की अनुमति भी है। इस निलंबन ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि यह उसके जल संसाधनों पर सीधा असर डालेगा।
एक नया अध्याय
सिंधु जल संधि का निलंबन भारत-पाकिस्तान संबंधों में एक नए तनाव की शुरुआत हो सकता है। यह कदम न केवल पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाला है, बल्कि यह भारत की उस नीति को भी दर्शाता है, जो आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की बात करती है। क्या यह फैसला दोनों देशों के बीच जलवायु और सामरिक संघर्ष को और गहरा करेगा? यह समय बताएगा।












