विश्व धरोहर सूची में शामिल कालका शिमला रेल मार्ग पर जल्द ही यात्रियों को डीजल हाइड्रोलिक मल्टीपल यूनिट यानी डीएचएमयू ट्रेन में यात्रा करने का अवसर मिलने वाला है। लगभग दो वर्ष तक खामी सुधार और अपग्रेडेशन से गुजरने के बाद रेलवे ने इस ट्रेन का परीक्षण दोबारा शुरू किया, जहां प्राथमिक चरण में इसे सकारात्मक परिणाम मिले।
क्या है इस नए ट्रेन सेट की खासियत
डीएचएमयू ट्रेन में तीन कोच और एक इंजन शामिल हैं जो एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।
प्रत्येक कोच में 60 यात्रियों के बैठने की व्यवस्था है, और यात्री ट्रेन के भीतर ही सभी कोचों में आ जा सकते हैं।
रेल कोच डिजाइन संगठन (RDSO) लखनऊ द्वारा तैयार किए गए इस विशेष ट्रेन सेट में:
एयर कंडीशनिंग और हीटर
सीसीटीवी सुरक्षा
ऑडियो सूचना प्रणाली
जैसे वे सुविधाएं दी गई हैं जो पहाड़ी यात्राओं को अधिक आरामदायक बनाएंगी। कोच का बाहरी डिजाइन भी आकर्षक बनाया गया है, ताकि आने वाले पर्यटक इसे दृश्य रूप से भी याद रख सकें।
शिमला में बढ़ती सैलानी मांग को देखते हुए तैयारी तेज
ठंड बढ़ने के साथ ही शिमला में बर्फबारी का मौसम शुरू हो रहा है और पर्यटन लगातार बढ़ रहा है।
ऐसे में रेलवे का मानना है कि यात्रियों को बेहतर और आधुनिक अनुभव देने की जरूरत है।
पर्यटन विशेषज्ञों के अनुसार, कालका शिमला मार्ग पर आने वाले यात्रियों में विशेष ट्रेनें देखने और उनसे सफर करने को लेकर उत्साह बढ़ रहा है। कई पर्यटक प्लेटफॉर्म पर खड़े पैनोरमिक कोच और डीएचएमयू ट्रेन सेट को देखकर ही संचालन शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
अभी कितनी टॉय ट्रेनें चल रही हैं
फिलहाल इस मार्ग पर पांच टॉय ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।
त्योहारी और पर्यटन सीजन में इन ट्रेनों में भारी भीड़ देखी जा रही है। कुछ ट्रेनों में वेटिंग टिकट संख्या इस प्रकार है:
शिमला एक्सप्रेस में 40
शिवालिक डीलक्स में 35
हिमालयन क्वीन में 27
एक अन्य टॉय ट्रेन में 33
और दूसरी एक्सप्रेस में 26
ये आंकड़े दिखाते हैं कि यात्री मांग लगातार बढ़ रही है, ऐसे में अतिरिक्त ट्रेनें परिचालन में शामिल करने की जरूरत महसूस होती है।
आगे क्या होगा
रेलवे ने बताया कि डीएचएमयू के पहले ट्रायल में सफलता मिली है, लेकिन अभी कुछ और परीक्षण होने बाकी हैं।
अंबाला मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक एन के झा के अनुसार:
अंतिम परीक्षण के बाद ही ट्रेन संचालन के लिए अनुमति मांगी जाएगी। इस पूरी प्रक्रिया में अभी एक से दो माह तक का समय लग सकता है।
रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह ट्रेन शुरू होने से सफर क्षमता बढ़ेगी और पर्यटकों को बेहतर विकल्प मिलेगा, जो इस मार्ग की पर्यटन अर्थव्यवस्था को मजबूत कर सकता है।













