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पाकिस्तान में गर्भनिरोधक और सेनेटरी उत्पादों पर टैक्स बना बड़ी चुनौती

On: दिसम्बर 20, 2025 8:05 पूर्वाह्न
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पाकिस्तान में गर्भनिरोधक और सेनेटरी उत्पादों पर टैक्स बना बड़ी चुनौती
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पाकिस्तान में बढ़ती आबादी और कमजोर अर्थव्यवस्था के बीच सरकार की कोशिशों को उस समय झटका लगा, जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष IMF ने गर्भनिरोधक साधनों और सेनेटरी उत्पादों पर टैक्स कम करने के प्रस्ताव को मंजूरी देने से इनकार कर दिया। यह फैसला ऐसे समय आया है, जब देश तेज जनसंख्या वृद्धि और सीमित संसाधनों के दबाव से जूझ रहा है।

पाकिस्तान की आबादी और संसाधनों का बढ़ता अंतर

पाकिस्तान की जनसंख्या वृद्धि दर करीब 2.55 प्रतिशत है, जो दक्षिण एशिया में सबसे अधिक मानी जाती है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, हर साल देश की आबादी में लगभग 60 लाख नए लोग जुड़ रहे हैं।
इस तेजी से बढ़ती जनसंख्या का असर सीधे तौर पर खाद्य सुरक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और रोजगार पर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि परिवार नियोजन के साधन सुलभ और सस्ते न हुए, तो आने वाले वर्षों में यह दबाव और बढ़ सकता है।

IMF से टैक्स राहत की मांग

पाकिस्तान सरकार ने हाल ही में गर्भनिरोधक साधनों पर लगे 18 प्रतिशत जनरल सेल्स टैक्स GST को हटाने का प्रस्ताव रखा था। मकसद था कि कंडोम, गर्भनिरोधक दवाएं और अन्य साधन आम लोगों की पहुंच में आ सकें।
इसके साथ ही सेनेटरी पैड और बेबी डायपर को भी टैक्स राहत देने की सिफारिश की गई थी।

सरकार को उम्मीद थी कि इससे महिलाओं के स्वास्थ्य और परिवार नियोजन कार्यक्रमों को मजबूती मिलेगी।

IMF का साफ इनकार

IMF ने इस प्रस्ताव पर तत्काल सहमति देने से मना कर दिया। फंड का कहना है कि

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  • टैक्स छूट पर विचार केवल अगले संघीय बजट के दौरान किया जा सकता है

  • मौजूदा समय में पाकिस्तान को राजस्व लक्ष्य पूरे करने की सख्त जरूरत है

  • टैक्स में छूट से कर प्रणाली कमजोर हो सकती है और तस्करी का खतरा बढ़ सकता है

IMF अधिकारियों के अनुसार, बेलआउट कार्यक्रम के तहत किसी भी प्रकार की राहत से पहले वित्तीय अनुशासन जरूरी है।

राजस्व पर पड़ने वाला असर

पाकिस्तान के फेडरल बोर्ड ऑफ रेवेन्यू FBR ने IMF से वर्चुअल बैठकों और ईमेल के जरिए यह प्रस्ताव रखा था। सरकारी आकलन के मुताबिक, यदि टैक्स हटाया जाता तो सरकार को 40 से 60 करोड़ पाकिस्तानी रुपये का राजस्व नुकसान होता।
IMF ने इसे मौजूदा आर्थिक हालात में जोखिम भरा कदम बताया।

यह फैसला क्यों है अहम

जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भनिरोधक और स्वच्छता से जुड़े उत्पादों पर ऊंचा टैक्स सीधे तौर पर

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  • महिलाओं के स्वास्थ्य

  • गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति

  • और जनसंख्या नियंत्रण नीतियों
    को प्रभावित करता है।

लाहौर स्थित एक स्वास्थ्य नीति विशेषज्ञ के अनुसार, यदि ये उत्पाद महंगे रहेंगे, तो सरकार को भविष्य में स्वास्थ्य और सामाजिक सेवाओं पर कहीं अधिक खर्च करना पड़ सकता है।

आगे क्या

अब पाकिस्तान सरकार के पास दो ही रास्ते बचे हैं

  • अगले बजट में फिर से IMF के सामने यह मुद्दा उठाना

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  • या घरेलू स्तर पर वैकल्पिक सब्सिडी मॉडल तलाशना

हालांकि, मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए किसी त्वरित राहत की संभावना फिलहाल कम नजर आती है।

राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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