Train Cancel: उत्तर भारत में घने कोहरे के कारण उत्तर रेलवे ने 1 दिसंबर से 28 फरवरी 2026 तक कई पैसेंजर ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द कर दिया है। अंबाला, कुरुक्षेत्र, पटियाला और भटिंडा रूटों पर यात्रियों को दिक्कत होगी।
उत्तरी भारत में बढ़ती ठंड और लगातार घने कोहरे ने रेलवे संचालन पर बड़ा असर डालना शुरू कर दिया है। हरियाणा, पंजाब और आसपास के इलाकों में दृश्यता बेहद कम होने की वजह से उत्तर रेलवे ने 1 दिसंबर से 28 फरवरी 2026 तक कई पैसेंजर ट्रेनों को अस्थायी रूप से रद्द करने का फैसला लिया है।
अंबाला डिविजन के वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों का कहना है कि यह कदम यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है, क्योंकि कोहरे की वजह से सिग्नलिंग प्रभावित होती है और दुर्घटना का जोखिम बढ़ जाता है।
क्यों जरूरी पड़ा यह फैसला? Train Cancel
सर्दियों में उत्तर भारत में कोहरा इतना घना हो जाता है कि कई रूटों पर दृश्यता 20 से 30 मीटर तक ही रह जाती है।
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक:
“इतनी कम विज़िबिलिटी में ट्रेन चलाना बेहद जोखिम भरा होता है। सिग्नल सही से दिखाई नहीं देते, ट्रैक पर मौजूद किसी भी बाधा को देख पाना मुश्किल हो जाता है। दुर्घटनाओं की आशंका को देखते हुए रेल संचालन पहले से सीमित करना ही सुरक्षित विकल्प होता है।”
इसके तहत उन रूटों को प्राथमिकता दी गई है जहाँ कोहरे का प्रभाव हर साल अधिक रहता है या जहाँ पैसेंजर ट्रेनें धीमी गति से चलती हैं।
इन ट्रेनों पर लगा ब्रेक – पूरी सूची
रेलवे ने जिन पैसेंजर ट्रेनों को अस्थायी तौर पर रोका है, उनमें शामिल हैं:
64517 / 64516 – अंबाला कैंट ⇄ नांगल डैम
54765 / 54766 – धूरी जंक्शन ⇄ भटिंडा
54557 / 54558 – अंबाला कैंट ⇄ पटियाला
64483 – कुरुक्षेत्र ⇄ अंबाला कैंट
इन सभी ट्रेन रूटों पर सर्दियों में कोहरा अक्सर घंटों तक बना रहता है, जिसकी वजह से संचालन में मुश्किलें आती हैं।
दैनिक यात्रियों की बढ़ेगी दिक्कत
इन ट्रेनों पर रोजाना हजारों यात्री निर्भर रहते हैं—खासकर ऑफिस जाने वाले कर्मचारी, छात्र और छोटे व्यापारी। पैसेंजर ट्रेनें किफायती होने के साथ-साथ छोटी दूरी के लिए काफी सुविधाजनक मानी जाती हैं।
अब रद्द होने की वजह से:
निजी वाहनों पर निर्भरता बढ़ेगी
बसों में भीड़ बढ़ सकती है
सफर का खर्च और समय दोनों में इजाफा होगा
परिवहन विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति कुछ हफ्तों तक मुश्किल जरूर बढ़ाएगी, लेकिन सुरक्षा को प्राथमिकता देना आवश्यक है।
कोहरे का असर क्यों होता है इतना गंभीर? – एक छोटी पृष्ठभूमि
उत्तर भारत में दिसंबर से फरवरी तक कोहरा हर साल एक बड़ी चुनौती बन जाता है। मौसम विभाग के अनुसार, मैदानी इलाकों में नमी, ठंड और हवा की कम रफ्तार मिलकर गहरा कोहरा बनाती है जो घंटों तक छाया रहता है।
रेलवे ट्रैकों पर कोहरे का प्रभाव:
सिग्नलिंग सिस्टम प्रभावित होता है
ट्रेन की गति बेहद धीमी करनी पड़ती है
कॉलिजन का खतरा बढ़ जाता है
समय पर ट्रेनों का संचालन लगभग असंभव हो जाता है
इसी वजह से हर साल रेलवे सर्दियों में कुछ ट्रेनों का संचालन रोकता या कम करता है।












