कैथल, हरियाणा। फसल खराबे के मुआवजे के इंतजार में जिला के किसान अभी भी इंतजार कर रहे हैं। बारिश व नदियों में पहाड़ों से आए पानी के कारण खेतों में जलभराव से प्रभावित हुई धान व अन्य फसलों का मुआवजा किसानों को अभी तक नहीं मिला है। सरकार की ओर से किसानों को दिवाली से पहले मुआवजा देने का वादा किया था। अभी किसान मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
कैथल के 9,745 किसानों ने आवेदन किया था
बारिश और जलभराव से प्रभावित धान की फसल का प्रशासन की ओर से सर्वे भी करवाया गया था। गुहला-चीका, सीवन, पूंडरी कलायत और ढांड जैसे क्षेत्रों में काफी नुकसान हुआ था। कैथल जिला के 273 गांवों के 9,745 किसानों ने मुआवजे के लिए आवेदन किया था। इन आवेदन के बाद पटवारियों की ओर से फसल का सर्वे किया गया। लेकिन अभी तक भी यह मुआवजा राशि किसानों के खाते में नहीं पहुंची है।
मुख्य रूप से बौने पौधे व हल्दी रोग के एरिया के किसानों ने धान की फसलों को लेकर आवेदन किया है। वहीं, घग्गर से आई बाढ़ से मुख्य रूप से धान की फसल को नुकसान देखने को मिला है। ऐसे में इन दो फसलों के किसानों ने मुख्य रूप से आवेदन किया है।
मुआवजे के लिए अप्लाई करने वाले किसानों का ब्यौरा
राज्य के ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर फसल खराबे के मुआवजे के लिए कुल 4 लाख 98 हजार 549 किसानों ने आवेदन किया।
अंबाला – 428 गांव, 7,940 किसान; भिवानी – 272 गांव, 74,738 किसान; फरीदाबाद – 144 गांव, 2,519 किसान; फतेहाबाद – 234 गांव, 22,370 किसान; गुरुग्राम – 242 गांव, 10,971 किसान; हिसार – 276 गांव, 73,661 किसान; झज्जर – 264 गांव, 25,318 किसान; जींद – 288 गांव, 21,161 किसान; कैथल – 273 गांव, 9,745 किसान; करनाल – 306 गांव, 1,889 किसान; कुरुक्षेत्र – 390 गांव, 11,640 किसान; महेंद्रगढ़ – 373 गांव, 66,698 किसान; पंचकूला – 89 गांव, 367 किसान; पानीपत – 137 गांव, 866 किसान; रेवाड़ी – 405 गांव, 26,533 किसान; रोहतक – 143 गांव, 18,498 किसान; सिरसा – 325 गांव, 35,273 किसान; सोनीपत – 300 गांव, 9,835 किसान; यमुनानगर – 517 गांव, 3,267 किसान; मेवात – 440 गांव, 12,997 किसान; पलवल – 286 गांव, 18,968 किसान; चरखी दादरी – 170 गांव, 43,295 किसान।
कृषि एवं कल्याण विभाग चीका की एसडीओ डाॅ. कंचन शर्मा ने बताया कि ई-क्षतिपूर्ति पोर्टल पर राजस्व विभाग की ओर से आवेदन लिए गए थे। मुआवजे की राशि कब आएगी, इस बारे में वह ही जानकारी दे सकते हैं।
खेतों में धान कम निकला
प्रति एकड़ धान तैयार करने पर 20-25 हजार रुपये खर्च आ जाता है। जमीन का ठेका भी 60 से 70 हजार एकड़ प्रति वर्ष का चल रहा है। अब खेतों में धान कम निकला है तथा सरकार ने अभी तक बाढ़ व बारिश के कारण जलभराव का मुआवजा नहीं दिया है इसी कारण जमीन ठेके पर लेने वाले किसान के हाथ तो कुछ नहीं आएगा।
फसलों में आई बिमारी और कुदरत की मार से किसान पहले ही परेशान है, लेकिन सरकार की तरफ से फसल खराबे का मुआवजा जारी न करके किसानों को और भी परेशान किया जा रहा है। किसान फसल खराबे के मुआवजे की आस लगाए बैठा हुआ है। इसलिए उनकी सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द किसानों को फसल के खराबे का मुआवजा दिया जाए ताकि किसान अपना गुजर-बसर कर सके।












