टीम इंडिया के युवा बल्लेबाज और टी20 उपकप्तान शुभमन गिल को मेडिकल क्लीयरेंस मिल गया है, जिससे वह दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ होने वाले पहले टी20 मैच में उतर सकेंगे।
गिल हाल ही में कोलकाता में खेले गए टेस्ट मैच के दौरान गर्दन की चोट से जूझ रहे थे और इसी कारण उन्हें मैदान से कुछ दिनों की दूरी बनानी पड़ी थी।
कैसे लगी थी चोट और क्या था खतरा
कोलकाता टेस्ट के दूसरे दिन तेज गेंदबाजी के दौरान फील्डिंग करते समय गिल की गर्दन में तेज अकड़न आ गई थी।
स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्हें दो दिनों के लिए अस्पताल में भर्ती करना पड़ा, जहां दर्द कम करने के लिए इंजेक्शन भी लगाया गया।
इस घटना के बाद वह वनडे सीरीज से बाहर हो गए थे और उनके टी20 में खेलने पर भी सवाल उठने लगे थे।
एक वरिष्ठ फिजियो ने बताया कि गर्दन की चोट अक्सर खिलाड़ियों के संतुलन और प्रतिक्रिया समय पर असर डालती है, इसलिए वापसी से पहले कई दौर की फिटनेस जांच जरूरी होती है।
रिहैब पूरा टीम प्रबंधन को मिली फिटनेस रिपोर्ट
बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में गिल ने अपना रिहैबिलिटेशन पूरा किया।
खेल विज्ञान टीम की रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने Return To Play (RTP) के सभी जरूरी प्रोटोकॉल पास कर लिए हैं।
फिजियो कमलेश जैन, स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच एड्रियन ली रॉ और खेल चिकित्सक डॉ. चार्ल्स द्वारा किए गए मूल्यांकन में पुष्टि हुई कि
शुभमन गिल सभी प्रारूपों में खेलने के लिए फिट हैं और उनका रिकवरी प्रोसेस सफल रहा है।
टी20 सीरीज के लिए अब जवाबदारी बढ़ेगी गिल के लिए मौका
भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच होने वाली टी20 सीरीज को युवा खिलाड़ियों के प्रदर्शन के लिए अहम माना जा रहा है।
गिल को उपकप्तान की जिम्मेदारी मिलना इस बात का संकेत है कि टीम प्रबंधन भविष्य के नेतृत्व में उन पर भरोसा कर रहा है।
सीरीज से पहले अधिकतर खिलाड़ी रविवार से अभ्यास शुरू करेंगे और गिल के शामिल होने से टीम बैलेंस और आत्मविश्वास दोनों मजबूत होंगे।
क्यों महत्वपूर्ण है गिल की वापसी विशेषज्ञों का नजरिया
क्रिकेट विश्लेषकों का मानना है कि
भारत को पावरप्ले में मजबूत शुरुआत दिलाने के लिए
और विश्व कप चक्र को ध्यान में रखते हुए
गिल की फिटनेस और फॉर्म बेहद अहम है।
पूर्व चयनकर्ता की राय में चोट के बाद वापसी किसी खिलाड़ी की मानसिक ताकत का परीक्षण होती है। गिल के लिए यह सीरीज खुद को फिर से स्थापित करने का अवसर है।













