भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली ने भारतीय स्पोर्ट्सवियर सेक्टर में एक नया दांव खेला है। उन्होंने एजिलिटास स्पोर्ट्स नामक स्टार्टअप में लगभग 40 करोड़ रुपये का निवेश करते हुए अपने लाइफस्टाइल ब्रांड वन8 का नियंत्रण इसी कंपनी को सौंप दिया है।
यह कदम इसलिए खास माना जा रहा है क्योंकि कोहली ने जर्मनी की दिग्गज कंपनी प्यूमा के लगभग 300 करोड़ रुपये के रिन्यूअल ऑफर को ठुकरा दिया और एक भारतीय स्टार्टअप के साथ अपना भविष्य जोड़ा।
प्यूमा से लगभग आठ साल का साथ, फिर बदला फैसला
कोहली 2017 से प्यूमा के साथ जुड़े थे। उस वक्त उनकी डील 110 करोड़ रुपये के आसपास मानी गई थी, जो भारतीय खिलाड़ियों और वैश्विक ब्रांडों के बीच सबसे बड़ी साझेदारियों में गिनी जाती है।
प्यूमा के साथ उनका ब्रांड वन8 तेजी से लोकप्रिय हुआ, और रोडशो, फुटवियर तथा एथलीजर कैटेगरी में इसका बाजार काफी बढ़ा।
लेकिन जब यह साझेदारी 2025 में समाप्त होने को थी, प्यूमा ने लगभग 300 करोड़ रुपये का नया ऑफर दिया, जिसके बाद उद्योग जगत को लगा कि कोहली फिर से रिन्यूअल करेंगे।
इसके बजाय उन्होंने अभिषेक गांगुली के नेतृत्व वाली एजिलिटास स्पोर्ट्स को तरजीह दी, जिसे उन्होंने केवल साझेदारी नहीं बल्कि भारत में स्वदेशी स्पोर्ट्स इकोसिस्टम बनाने का अवसर बताया।
वन8 का नियंत्रण एजिलिटास के पास, कोहली बने निवेशक
नई डील के तहत कोहली ने:
वन8 ब्रांड एजिलिटास को बेच दिया
बदले में कंपनी में लगभग 1.94 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की
और रणनीतिक रूप से 40 करोड़ रुपये का निवेश किया
बिजनेस विश्लेषकों के मुताबिक, पूरा लेनदेन पूरा होते ही कोहली की हिस्सेदारी मिड सिंगल डिजिट रेंज तक बढ़ सकती है, जो उन्हें केवल ब्रांड एंबेसडर नहीं बल्कि मालिकाना दृष्टिकोण वाला भागीदार बनाती है।
कोहली का बयान और दृष्टिकोण
सोशल मीडिया पर इस साझेदारी की घोषणा करते हुए कोहली ने लिखा कि
जब अभिषेक गांगुली ने मैन्युफैक्चरिंग क्षमता, टीम संरचना, विशेषज्ञता और दीर्घकालिक विजन समझाया, तो उन्हें महसूस हुआ कि यह अवसर केवल विज्ञापन नहीं बल्कि भारत में बड़ा स्पोर्ट्सवियर ब्रांड खड़ा करने का मौका है।
एक उद्योग विशेषज्ञ कहते हैं,
“यह कदम केवल एंडोर्समेंट नहीं बल्कि भारतीय एथलीट के निवेशक रूप को दिखाता है। इससे स्थानीय स्पोर्ट्सवियर बाजार में आत्मनिर्भरता की दिशा को बल मिलेगा।”
यह साझेदारी क्यों मायने रखती है
भारत में एथलीजर बाजार 15 से 18 प्रतिशत सालाना की गति से बढ़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
मांग स्वदेशी ब्रांडों की ओर बढ़ रही है
युवा उपभोक्ता भारतीय पहचान और खिलाड़ी-चालित ब्रांडों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं
स्टार एथलीटों की ओनरशिप भागीदारी भरोसा बढ़ाती है
गांगुली के नेतृत्व वाले एजिलिटास का लक्ष्य उच्च गुणवत्ता वाली स्पोर्ट्स तकनीक विकसित करना और लोगों को अंतरराष्ट्रीय मानकों के उत्पाद देना है।
ऐसे में कोहली का निवेश न केवल ब्रांड वैल्यू जोड़ता है बल्कि भारतीय बाजार को वैश्विक स्पोर्ट्स इंडस्ट्री के समकक्ष खड़ा करने की दिशा में कदम है।
क्या चुनौतियां भी हैं
हालांकि उद्योग जानकार मानते हैं कि:
प्यूमा जैसे वैश्विक दिग्गजों से मुकाबला आसान नहीं होगा
सप्लाई चेन और स्पोर्ट्स टेक्नोलॉजी में भारी निवेश की जरूरत होगी
ब्रांड निर्माण में समय लगेगा
लेकिन कोहली जैसे चेहरे और गांगुली का अनुभव इस स्टार्टअप को विश्वासनीयता और तेज बाजार पैठ दे सकते हैं।
आगे क्या
उद्योग सूत्रों के अनुसार अगले छह से नौ महीनों में:
वन8 की नई री-ब्रांडिंग रणनीति सामने आ सकती है
उत्पाद श्रेणी विस्तार होगा
और डिजिटल तथा ऑन-ग्राउंड कैंपेन शुरू हो सकते हैं
कोहली का यह कदम साफ संकेत देता है कि भविष्य में अधिक भारतीय खिलाड़ी केवल ब्रांड प्रचार नहीं बल्कि व्यवसाय के मालिक बनने की राह पर चल सकते हैं।












