Ambala News: Vandana, a 10th class student in Ambala, committed suicide by hanging herself, exam stress was the reason: हरियाणा के अंबाला में एक हृदयविदारक घटना ने सभी को झकझोर कर रख दिया। अंबाला कैंट के दीप नगर में रहने वाली 17 वर्षीय वंदना, जो 10वीं कक्षा की छात्रा थी, ने गुरुवार दोपहर अपने घर में दुपट्टे से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली।
बताया जा रहा है कि वंदना 10वीं बोर्ड परीक्षा के परिणाम को लेकर मानसिक तनाव में थी। इस दुखद घटना ने न केवल परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया, बल्कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य और बच्चों पर पढ़ाई के दबाव जैसे गंभीर मुद्दों को फिर से उजागर किया।
दोपहर में हुई त्रासदी Ambala News
गुरुवार दोपहर का समय था जब वंदना की मां अपने कमरे में सो रही थीं। वंदना उस समय अपने कमरे में अकेली थी। दोपहर करीब 2 बजे मां ने जागकर बेटी का दरवाजा खटखटाया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
बार-बार आवाज देने पर भी जब दरवाजा नहीं खुला, तो पड़ोसियों की मदद से दरवाजा तोड़ा गया। कमरे के अंदर का दृश्य देखकर सभी सन्न रह गए—वंदना ने दुपट्टे से फंदा लगा लिया था। आनन-फानन में उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
परिवार का दर्द और तनाव का कारण
वंदना के पिता ओम प्रकाश, जो एकता विहार चौक पर सब्जी की दुकान चलाते हैं, उस समय दुकान पर थे। उन्होंने बताया कि वंदना जैन गर्ल्स स्कूल में 10वीं की छात्रा थी और बोर्ड परीक्षा के परिणाम को लेकर काफी तनाव में थी। परिणाम आने से पहले वह घर पर ही रह रही थी, जबकि उसके दो बहनें और भाई स्कूल गए हुए थे।
ओम प्रकाश ने कहा, “हमने कभी नहीं सोचा था कि हमारी बेटी इतना बड़ा कदम उठा लेगी। वह पढ़ाई में अच्छी थी, लेकिन परिणाम का डर उसे सता रहा था।” परिवार ने इस नुकसान से उबरने के लिए समाज और प्रशासन से सहयोग की अपील की है।
पुलिस जांच और पोस्टमार्टम
अंबाला पुलिस ने घटना की सूचना मिलते ही कार्रवाई शुरू कर दी। वंदना के शव को अंबाला कैंट के नागरिक अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है, जहां शुक्रवार को फोरेंसिक विशेषज्ञों द्वारा पोस्टमार्टम किया जाएगा।
करधान चौकी के एएसआई मोहन लाल ने बताया कि अभी तक कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत के सटीक कारणों का पता चल सकेगा। पुलिस ने परिजनों के बयान दर्ज किए हैं, जिनमें वंदना के मानसिक तनाव और परीक्षा के दबाव का जिक्र है।
मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई का दबाव
वंदना की आत्महत्या ने एक बार फिर बच्चों पर पढ़ाई के बढ़ते दबाव और मानसिक स्वास्थ्य की अनदेखी जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बोर्ड परीक्षाओं के दौरान छात्रों पर नतीजों का डर इतना हावी हो जाता है कि वे गलत कदम उठा लेते हैं।
अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें खुलकर अपनी बात रखने का मौका देना चाहिए। स्कूलों में काउंसलिंग और तनाव प्रबंधन के कार्यक्रमों को बढ़ावा देने की जरूरत है।
समाज के लिए संदेश
यह दुखद घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि बच्चों को सिर्फ अंकों की दौड़ में नहीं, बल्कि उनकी भावनाओं और मानसिक स्थिति को समझने में भी समय देना जरूरी है।
वंदना की कहानी हर माता-पिता और शिक्षक के लिए एक सबक है कि बच्चों के साथ संवाद और सहानुभूति कितनी महत्वपूर्ण है। प्रशासन से भी अपील है कि स्कूलों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम शुरू किए जाएं ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।













