Ankita Bhandari murder case: Court holds BJP leader’s son guilty, know the whole case: अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) ने पूरे देश को झकझोर दिया था। शुक्रवार को, उत्तराखंड की एक अदालत ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाया।
कोर्ट ने वनतंत्र रिसॉर्ट के मालिक और निष्कासित बीजेपी नेता विनोद आर्य के बेटे पुलकित आर्य, साथ ही उनके दो कर्मचारियों, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को दोषी ठहराया। 19 साल की मासूम अंकिता, जो रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट थी, की 2022 में हुई हत्या ने लोगों के दिलों में गुस्सा और दुख भर दिया। यह फैसला न केवल अंकिता के परिवार, बल्कि पूरे समाज के लिए न्याय की एक उम्मीद बनकर आया है।
क्या था अंकिता भंडारी का मामला? Ankita Bhandari murder case
सितंबर 2022 में, अंकिता भंडारी (Ankita Bhandari) का शव ऋषिकेश के पास चिल्ला नहर से बरामद हुआ। जांच में पता चला कि पुलकित आर्य से उसका विवाद हुआ था। आरोप है कि इस विवाद के बाद, पुलकित ने अपने दो कर्मचारियों, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता, के साथ मिलकर अंकिता को नहर में धक्का दे दिया।
कोर्ट ने इस जघन्य अपराध को गंभीरता से लिया और तीनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या), 354 (महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने का इरादा), और 120बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी पाया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश रीना नेगी ने 19 मई को अंतिम दलीलें सुनीं और सबूतों के आधार पर यह फैसला सुनाया।
राजनीतिक कनेक्शन और जनता का आक्रोश
अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) की वजह से उत्तराखंड में भारी आक्रोश फैल गया। मुख्य आरोपी पुलकित आर्य के पिता विनोद आर्य एक बीजेपी नेता रह चुके थे, जिसके चलते यह मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील हो गया। लोगों ने सड़कों पर उतरकर न्याय की मांग की।
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया। SIT ने अपनी जांच में 500 पन्नों की चार्जशीट तैयार की और 47 गवाहों से पूछताछ की। इस ठोस जांच ने कोर्ट को दोषियों को सजा सुनाने में मदद की।
परिवार की मांग: मृत्युदंड दो
अंकिता की मां सोनी देवी का दिल टूट चुका है। उन्होंने कोर्ट से दोषियों के लिए मृत्युदंड (Death Penalty) की मांग की है। सोनी देवी का कहना है, “मेरी बेटी को बेरहमी से मारा गया।
उसके हत्यारों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।” अंकिता के परिवार का दर्द हर उस इंसान को छू गया, जो इस मामले को सुन रहा है। समाज में भी यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस तरह के अपराधों के लिए कड़ी सजा ही एकमात्र रास्ता है?
न्याय की उम्मीद, समाज में बदलाव की जरूरत
अंकिता भंडारी हत्याकांड (Ankita Bhandari Murder Case) का यह फैसला एक कदम है न्याय की दिशा में। लेकिन यह मामला हमें सोचने पर मजबूर करता है कि आखिर कब तक मासूम लड़कियां इस तरह के अपराधों का शिकार होती रहेंगी? समाज को जागरूक होने की जरूरत है।
महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के लिए कड़े कदम उठाने होंगे। कोर्ट का यह फैसला न केवल अंकिता के परिवार को राहत देगा, बल्कि उन सभी लोगों को उम्मीद देगा जो न्याय की प्रतीक्षा में हैं।













