Pahalagaam Hamala: Pahalgam attack: BJP MP’s controversial comment sparked debate, gave this advice to women: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले (Pahalgam attack) को लेकर हरियाणा से बीजेपी के राज्यसभा सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने एक विवादित बयान (controversial statement) दिया है, जिसने नई बहस छेड़ दी है। भिवानी में आयोजित एक संगोष्ठी में सांसद ने कहा कि हमले के दौरान मौजूद महिलाओं को आतंकियों से लड़ना चाहिए था, न कि हाथ जोड़कर रहना।
उन्होंने ऐतिहासिक वीरांगनाओं जैसे रानी लक्ष्मीबाई और देवी अहिल्याबाई का उदाहरण देते हुए कहा कि अगर महिलाओं में वीरता का भाव होता, तो नुकसान कम हो सकता था। इस बयान ने न केवल सामाजिक और राजनीतिक हलकों में हलचल मचाई है, बल्कि यह भी सवाल उठाए हैं कि क्या ऐसी टिप्पणियां संवेदनशील परिस्थितियों में उचित हैं।
विवादित टिप्पणी: महिलाओं को आतंकियों से लड़ने की सलाह Pahalagaam Hamala
शनिवार को भिवानी के पंचायत भवन में आयोजित अहिल्याबाई होल्कर त्रिशताब्दी स्मृति जिला संगोष्ठी में सांसद रामचंद्र जांगड़ा ने पहलगाम हमले (terrorist attack) पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि हमले के समय मौजूद महिलाओं में “वीरांगना का भाव” नहीं था, जिसके कारण वे आतंकियों की गोली का शिकार बनीं।
सांसद ने तर्क दिया कि अगर महिलाएं आतंकियों से टकरातीं, तो हताहत (casualties) की संख्या कम हो सकती थी। उन्होंने कहा, “हाथ जोड़ने से आतंकी छोड़ते नहीं, अगर टकराव होता तो शायद कम नुकसान होता।” इस बयान ने कई लोगों को हैरान कर दिया, क्योंकि यह सुझाव देता है कि आम नागरिकों, खासकर महिलाओं को, प्रशिक्षित आतंकियों से भिड़ना चाहिए था।
ऐतिहासिक उदाहरण और अग्निवीर योजना का जिक्र
सांसद जांगड़ा ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए रानी लक्ष्मीबाई और देवी अहिल्याबाई जैसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि अगर महिलाओं ने इन वीरांगनाओं का इतिहास पढ़ा होता, तो वे अपने परिवार की रक्षा के लिए लड़तीं, भले ही इसमें उनकी शहादत ही क्यों न हो।
इसके साथ ही, उन्होंने प्रधानमंत्री की अग्निवीर योजना (Agniveer scheme) का जिक्र करते हुए कहा कि अगर पर्यटक अग्निवीर जैसे प्रशिक्षित होते, तो आतंकियों को घेर लिया जाता। इस बयान ने अग्निवीर योजना को भी चर्चा में ला दिया, जिसे लेकर पहले से ही कई तरह की राय हैं।
सांसद का तर्क: क्या यह उचित है?
जब सांसद से पूछा गया कि एक आम महिला आतंकियों से कैसे लड़ सकती है, तो उन्होंने जवाब दिया, “देवी अहिल्याबाई और रानी झांसी भी तो महिलाएं थीं। उन्होंने कितना बड़ा टकराव किया।” जांगड़ा ने जोर देकर कहा कि महिलाओं में वीरता का भाव जगाने की जरूरत है।
हालांकि, यह बयान कई लोगों को असंवेदनशील लगा, क्योंकि पहलगाम हमले में आम पर्यटक शामिल थे, जिनके पास न तो हथियार थे और न ही आतंकियों से लड़ने का प्रशिक्षण। ऐसे में सांसद की यह टिप्पणी (BJP MP statement) न केवल विवादास्पद है, बल्कि यह पीड़ितों के प्रति संवेदनशीलता की कमी को भी दर्शाती है।
रामचंद्र जांगड़ा: पृष्ठभूमि और विवाद
रोहतक के खरकड़ा गांव के रहने वाले रामचंद्र जांगड़ा हरियाणा से बीजेपी के राज्यसभा सांसद हैं, और उनका कार्यकाल 2026 तक है। वह 2014 में गोहाना से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं, लेकिन हार गए थे। इसके अलावा, वह हरियाणा पिछड़ा वर्ग कल्याण निगम के चेयरमैन भी रह चुके हैं।
यह पहली बार नहीं है जब पहलगाम हमले पर विवादित बयान सामने आया है। इससे पहले मध्य प्रदेश के एक मंत्री ने भी इस हमले को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी (controversial remark) की थी, जिसे लेकर काफी आलोचना हुई थी।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
सांसद जांगड़ा की टिप्पणी ने सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं उकसाई हैं। कई लोगों का मानना है कि ऐसी टिप्पणियां पीड़ितों के दुख को और बढ़ाती हैं।
आतंकी हमले जैसी संवेदनशील घटनाओं पर नेताओं को सोच-समझकर बोलना चाहिए। वहीं, कुछ लोग सांसद के बयान को साहस और आत्मरक्षा को बढ़ावा देने वाला मान रहे हैं। यह मामला न केवल बीजेपी की छवि को प्रभावित कर सकता है, बल्कि यह आतंकवाद और नागरिक सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर भी चर्चा को जन्म दे रहा है।
भविष्य के लिए सबक
पहलगाम हमला और उस पर सांसद की टिप्पणी ने एक बार फिर यह सवाल उठाया है कि नेताओं को संवेदनशील मुद्दों पर कितनी जिम्मेदारी से बोलना चाहिए। आतंकवाद (terrorism) एक जटिल समस्या है, जिससे निपटने के लिए प्रशिक्षित सुरक्षा बलों की जरूरत होती है।
आम नागरिकों, खासकर महिलाओं से आतंकियों से लड़ने की उम्मीद करना अव्यवहारिक हो सकता है। सरकार और समाज को मिलकर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदियां न हों।













