Rice Dal Scam: Rs 2 crore fraud with rice miller exposed in Jind: चावल दाल ठगी (Rice Dal Scam) के एक सनसनीखेज मामले ने हरियाणा के जींद को हिलाकर रख दिया है। यहां एक राइस मिल मालिक को सस्ते दाल और चावल का लालच देकर ठगों ने 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की ठगी कर ली।
यह मामला न केवल धोखाधड़ी की हदें दिखाता है, बल्कि व्यापारियों को सतर्क रहने की चेतावनी भी देता है। आइए, इस पूरी घटना को विस्तार से समझें कि कैसे एक भरोसेमंद व्यापारी ठगों के जाल में फंस गया।
सस्ते चावल-दाल का लालच और ठगी का जाल Rice Dal Scam
जींद के नरवाना में उकलाना रोड पर गोयल इंडस्ट्रीज चलाने वाले प्रो. सुभाष गोयल के पास 11 महीने पहले एक फोन आया। फोन करने वाले राकेश बंसल ने दावा किया कि वह सस्ते दाल और चावल (Cheap Rice and Dal) उपलब्ध करा सकता है।
सुभाष को चावल की जरूरत थी, इसलिए उन्होंने इस ऑफर पर विचार किया। राकेश ने दिल्ली की एक फर्म, कल्याणी इंटरप्राइजेज प्राइवेट लिमिटेड, से मीटिंग करवाई। इस मीटिंग में मयूर शर्मा, प्रतीक शर्मा, करिश्मा राणा और नरेंद्र राठौर जैसे लोग शामिल थे। इन्होंने सुभाष को भरोसा दिलाया कि पेमेंट के बाद दो दिन में सामान डिलीवर हो जाएगा।
सुभाष ने इनकी बातों पर भरोसा किया और अप्रैल से जून 2024 के बीच 39 लाख, 45 लाख, 58 लाख और 62 लाख रुपये की चार किस्तों में कुल 2 करोड़ 4 लाख रुपये फर्म के खाते में ट्रांसफर कर दिए। लेकिन न तो चावल-दाल (Rice and Dal Supply) मिला और न ही पैसे वापस हुए। यह एक सुनियोजित धोखाधड़ी (Fraud Case) थी, जिसने सुभाष को आर्थिक और मानसिक रूप से तोड़ दिया।
बाउंस चेक और टूटा भरोसा
जब सुभाष ने पैसे वापस मांगे, तो ठगों ने उन्हें 50-50 लाख के दो चेक दिए, जो बैंक में बाउंस (Bounced Cheques) हो गए। इसके बाद 15 लाख का एक और चेक दिया गया, लेकिन वह भी खाता बंद होने के कारण बेकार निकला। सुभाष ने दिल्ली जाकर ठगों से मुलाकात की, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ झूठे आश्वासन मिले।
आखिरकार, उन्होंने नरवाना पुलिस में शिकायत दर्ज की। पुलिस ने दिल्ली की फर्म और पांच आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह घटना व्यापारियों के लिए एक सबक है कि अनजान फर्मों पर भरोसा करने से पहले उनकी विश्वसनीयता जांचना जरूरी है।
व्यापारियों के लिए सबक और सतर्कता
यह चावल दाल ठगी (Rice Dal Scam) का मामला बताता है कि ठग कितनी चालाकी से भरोसेमंद लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। व्यापारियों को चाहिए कि वे किसी भी डील से पहले फर्म की पृष्ठभूमि, रजिस्ट्रेशन और पिछले रिकॉर्ड की जांच करें।
ऑनलाइन ठगी (Online Fraud) और फर्जी फर्मों से बचने के लिए डिजिटल साक्षरता भी जरूरी है। जींद पुलिस इस मामले में सक्रिय है और उम्मीद है कि जल्द ही आरोपी कानून के शिकंजे में होंगे। तब तक, सुभाष जैसे व्यापारियों को इंसाफ का इंतजार है।













