Third degree torture in Narnaul , ASI suspended, two arrested, viral video exposed the truth:
हरियाणा के नारनौल में एक होटल रसोइये के साथ पुलिसकर्मियों द्वारा थर्ड डिग्री टॉर्चर का सनसनीखेज मामला सामने आया है।
वायरल वीडियो ने इस क्रूरता को उजागर किया, जिसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। आइए, जानते हैं इस घटना की पूरी कहानी और प्रशासन की प्रतिक्रिया।
होटल रसोइये पर पुलिस की बर्बरता Third degree torture in Narnaul
नारनौल के नीरपुर में एक होटल में काम करने वाले रसोइये विक्रम बहादुर के साथ 27 अप्रैल 2025 की रात पुलिसकर्मियों ने अमानवीय व्यवहार किया। जालंधर के रामेश्वर कॉलोनी के रहने वाले विक्रम ने बताया कि वह रात करीब 12:30 बजे होटल के कमरे में सो रहे थे।
अचानक दरवाजा खटखटाने की आवाज सुनकर वे बाहर आए, जहां तीन पुलिसकर्मी खड़े थे। उन्होंने अगले कमरे के बारे में पूछा, जिसके बारे में विक्रम ने बताया कि वह मालिक का कमरा है और बंद है। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने विक्रम को जबरन गाड़ी में बैठाया और मारपीट शुरू कर दी।
महाबीर पुलिस चौकी में भी टॉर्चर
पुलिसकर्मी विक्रम को महाबीर पुलिस चौकी ले गए, जहां उनकी पिटाई जारी रही। विक्रम के अनुसार, एक सिविल ड्रेस में मौजूद व्यक्ति ने भी उन पर हमला किया।
करीब एक घंटे की पूछताछ और मारपीट के बाद पुलिसकर्मी उन्हें वापस होटल छोड़ गए। विक्रम के शरीर पर चोट के गहरे निशान थे, जो बाद में एक वायरल वीडियो में साफ दिखाई दिए। इस वीडियो ने सोशल मीडिया पर तूफान मचा दिया और प्रशासन पर कार्रवाई का दबाव बढ़ा।
पुलिस की त्वरित कार्रवाई
विक्रम की शिकायत पर 28 अप्रैल को नारनौल शहर थाने में मामला दर्ज किया गया। जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) पूजा वशिष्ठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत जांच शुरू की।
प्राथमिक जांच में महाबीर पुलिस चौकी के एएसआई देवेंद्र सिंह, होमगार्ड राजकुमार और एक विशेष पुलिस अधिकारी (एसपीओ) दोषी पाए गए। एसपी ने एएसआई देवेंद्र सिंह को निलंबित कर दिया, जबकि होमगार्ड और एसपीओ को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई। देवेंद्र सिंह और राजकुमार को गिरफ्तार किया गया, हालांकि उन्हें बाद में जमानत मिल गई। तीसरा आरोपी एसपीओ अभी फरार है।
वायरल वीडियो बना सबूत
इस मामले में वायरल हुआ वीडियो सबसे बड़ा सबूत बना। वीडियो में विक्रम के शरीर पर टॉर्चर के निशान स्पष्ट दिखाई दे रहे थे, जिसने पुलिसकर्मियों की क्रूरता को बेनकाब कर दिया।
सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना की कड़ी निंदा की और त्वरित कार्रवाई की मांग की। एसपी पूजा वशिष्ठ ने वीडियो की प्रामाणिकता की पुष्टि की और कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। यह कार्रवाई पुलिस प्रशासन की जवाबदेही और पारदर्शिता को दर्शाती है।
नागरिकों के लिए सबक
यह घटना पुलिस और नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूत करने की जरूरत को रेखांकित करती है। ऐसी घटनाएं न केवल पीड़ित के लिए दुखद हैं, बल्कि पुलिस की छवि को भी धूमिल करती हैं।
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। नागरिकों से अपील है कि वे किसी भी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाएं और सोशल मीडिया जैसे प्लेटफॉर्म का जिम्मेदारी से उपयोग करें।
निष्कर्ष
नारनौल का यह मामला पुलिस सुधार और जवाबदेही की मांग को और मजबूत करता है। विक्रम बहादुर के साथ हुई बर्बरता निंदनीय है, लेकिन प्रशासन की त्वरित कार्रवाई ने न्याय की उम्मीद जगाई है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि कानून का सम्मान और नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि है।












