अंबाला. कैंटोनमेंट बोर्ड अपने स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए लगातार नए कदम उठा रहा है। लक्ष्य है कि बच्चों को पढ़ाई के साथ एक सुरक्षित और आधुनिक वातावरण भी मिले। यही वजह है कि अब बोर्ड ने स्कूलों में फेस रिकॉग्निशन कैमरों के जरिए बायोमैट्रिक हाजिरी शुरू कर दी है।
कक्षाओं के बाहर लगाए गए इन कैमरों की मदद से छात्र और शिक्षक दोनों ही क्लास में प्रवेश करते ही अपनी उपस्थिति दर्ज करा सकेंगे। इससे समय की बचत होगी और हर बच्चे पर नजर भी रखी जा सकेगी। यह नई तकनीक सबसे पहले तोपखाना परेड स्कूल में लागू की गई है, जहां पांच मशीनें लगा दी गई हैं और कुछ ही दिनों में पांच और मशीनें लगने वाली हैं।
2598 बच्चे ले रहे आधुनिक तकनीक का फायदा
पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर अभी यह सुविधा एक स्कूल में शुरू हुई है, लेकिन जल्द ही इसे सभी छह कैंटोनमेंट बोर्ड स्कूलों में लागू किया जाएगा।
फिलहाल इन स्कूलों में कुल 2598 छात्र पढ़ाई कर रहे हैं।
इनमें शामिल हैं
आरएचए बाजार स्थित सीनियर सेकेंडरी स्कूल में 1012 छात्र
आरएचए बाजार प्राइमरी स्कूल में 267 छात्र
बीसी बाजार मिडिल स्कूल में 281 छात्र
बीआई बाजार हाई स्कूल में 396 छात्र
रूट्स पब्लिक स्कूल में 514 छात्र
वात्सल्य स्कूल में 128 छात्र
नई फेस रिकॉग्निशन तकनीक आने से इतने बड़े छात्र समूह की उपस्थिति पर एकदम सटीक निगरानी रखी जा सकेगी।
फर्जी हाजिरी पर लगेगी पूरी तरह रोक
नई व्यवस्था की सबसे बड़ी खासियत यह है कि स्कूल परिसर से बाहर मौजूद किसी भी छात्र या शिक्षक की हाजिरी एप पर दर्ज नहीं होगी। इससे फर्जी हाजिरी की पुरानी शिकायतें खत्म होंगी और पढ़ाई का माहौल और पारदर्शी बनेगा।
अतीत में ऐसी शिकायतें सामने आती थीं कि कई शिक्षक बिना स्कूल आए रजिस्टर में अपनी उपस्थिति दर्ज कर देते थे। इससे शिक्षा का स्तर प्रभावित होता था और आपसी विवाद भी पैदा होते थे। अब स्मार्ट कैमरों के चलते यह गड़बड़ी बिल्कुल खत्म हो जाएगी।
बोर्ड अधिकारियों का क्या कहना है
कैंट बोर्ड के मनोनीत सदस्य अजय बवेजा ने बताया कि यह पहल शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने में बेहद प्रभावी साबित होगी। इससे छात्रों की वास्तविक उपस्थिति सामने आएगी और शिक्षक भी बेफिक्र होकर पढ़ाई पर ध्यान दे सकेंगे।
कैंट बोर्ड अंबाला के सीईओ राहुल आनंद शर्मा ने कहा कि तोपखाना परेड स्कूल में शुरू हुई यह नई तकनीक काफी सफल रह रही है और जल्द ही सभी स्कूलों में लागू कर दी जाएगी ताकि शिक्षा का स्तर और बेहतर हो सके।













