चंडीगढ़, 23 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। Haryana News: चंडीगढ़ में मुख्यमंत्री आवास ‘संत कबीर कुटीर’ रविवार को एक अलग ही सियासी और सामाजिक विमर्श का गवाह बना। मौका था महर्षि कश्यप जयंती के राज्य-स्तरीय समारोह का, जहां मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कश्यप समाज के सामाजिक और शैक्षणिक उत्थान को लेकर कई बड़े एलान किए। चुनावी सरगर्मियों और बदलते समीकरणों के बीच मुख्यमंत्री ने समाज को आश्वस्त किया कि सरकार उनके सांस्कृतिक गौरव को सहेजने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। इस सिलसिले में मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि कैथल में महर्षि कश्यप के नाम से धर्मशाला बनाने के लिए समाज जैसे ही अपना प्रस्ताव सौंपेगा, सरकार तुरंत उचित भूमि आवंटित कर देगी। इसके अलावा, करनाल के इंद्री में एक प्रमुख चौक का नामकरण महर्षि कश्यप के नाम पर करने और वहां उनकी एक भव्य प्रतिमा स्थापित करने को भी मंजूरी दी गई है।
मुख्यमंत्री ने गिनाया समाज का गौरवशाली इतिहास
शैक्षणिक मोर्चे पर कश्यप समाज की हिस्सेदारी बढ़ाने और शोध कार्यों को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय में स्थापित महर्षि कश्यप चेयर को विशेष फंड देने का एलान किया। यह कदम इसलिए भी अहम है क्योंकि लंबे समय से इस चेयर को सुचारू रूप से चलाने के लिए पर्याप्त बजट की मांग उठ रही थी।
समारोह के मंच से बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कश्यप समाज के अतीत और उसके पौराणिक महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि महर्षि कश्यप केवल एक समाज के नहीं बल्कि पूरे मानव कल्याण के प्रणेता थे, जिन्होंने ‘कश्यप संहिता’ जैसे महान ग्रंथों की रचना की। इतिहास के पन्नों को पलटते हुए उन्होंने याद दिलाया कि रामायण काल के पराक्रमी राजा निषाद, जिन्होंने वनवास के दौरान मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम को आश्रय दिया था, इसी समाज से आते थे। यही नहीं, दशमेश पिता श्री गुरु गोबिन्द सिंह जी के पंच प्यारों में शामिल भाई हिम्मत सिंह कश्यप के योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता। लगे हाथ सीएम ने कश्यप समाज के युवाओं को एक नसीहत भी दी; उन्होंने समाज के प्रबुद्ध लोगों से अपील की कि वे अपनी भावी पीढ़ी को नशाखोरी जैसी सामाजिक बुराइयों से दूर रखने के लिए जमीनी स्तर पर प्रयास करें।
पीएम मोदी को बताया पिछड़ों का असली रक्षक
सांस्कृतिक मंच से मुख्यमंत्री ने विपक्ष को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने दोटूक लहजे में कहा कि हरियाणा और केंद्र में विपक्ष के पास अब कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए वे लगातार बेबुनियाद दुष्प्रचार का सहारा ले रहे हैं। मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की नीतियों का बचाव करते हुए साफ किया कि अंत्योदय, यानी समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना ही उनकी पहली प्राथमिकता है।
इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार की पीठ थपथपाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) का सबसे बड़ा पैरोकार बताया।
ऐतिहासिक फैसला: मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम मोदी ने केंद्रीय ओबीसी कमीशन को संवैधानिक दर्जा देकर पिछड़े वर्गों के अधिकारों को कानूनी रूप से सुरक्षित किया है।
भविष्य का खाका: उन्होंने समाज के लोगों से आह्वान किया कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने के सपने को पूरा करने के लिए जाति, भाषा और क्षेत्रीय सीमाओं से ऊपर उठकर एकजुट होना होगा।
कैथल के बजाय चंडीगढ़ में क्यों हुआ कार्यक्रम?
इस पूरे आयोजन के दौरान एक बेहद दिलचस्प और अनुकरणीय वाकया भी सामने आया, जिसका जिक्र इंद्री विधानसभा क्षेत्र के विधायक रामकुमार कश्यप ने अपने संबोधन में किया। उन्होंने बताया कि समाज की योजना इस जयंती को कैथल की धरती पर एक विशाल रैली और भारी जनसैलाब के साथ मनाने की थी। लेकिन मौजूदा वक्त में दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर पेट्रोलियम पदार्थों की भारी किल्लत है, जिसका सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
ईंधन बचाने के लिए बदला गया रैली का फैसला
विधायक ने बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की तरफ से की गई ईंधन संरक्षण की अपील को कश्यप समाज ने बेहद संजीदगी से लिया। समाज ने यह तय किया कि हजारों गाड़ियों के काफिले निकालकर डीजल-पेट्रोल की बर्बादी करने के बजाय, बेहद सादगी के साथ चंडीगढ़ में एक सीमित लेकिन प्रभावी राज्य-स्तरीय कार्यक्रम किया जाए। कश्यप समाज के इस फैसले की प्रशासनिक गलियारों और बुद्धिजीवियों के बीच जमकर तारीफ हो रही है, क्योंकि एक सामाजिक संगठन द्वारा राष्ट्रीय हित में उठाया गया यह कदम वाकई दूसरों के लिए एक मिसाल है।
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