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हरियाणा में अब अफसरों पर सीधे FIR नहीं, सरकार ने बदला भ्रष्टाचार जांच का नियम

On: जनवरी 11, 2026 9:19 पूर्वाह्न
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हरियाणा में अब अफसरों पर सीधे FIR नहीं, सरकार ने बदला भ्रष्टाचार जांच का नियम
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हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार जांच नियमों में बदलाव किया है। अब अधिकारियों पर FIR से पहले सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी अनिवार्य होगी, लेकिन रंगे हाथों पकड़े जाने पर सीधी कार्रवाई जारी रहेगी।

चंडीगढ़। हरियाणा सरकार ने राज्य में कार्यरत अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच को लेकर एक बड़ा नीतिगत बदलाव किया है। अब पुलिस या विजिलेंस किसी भी सरकारी कर्मचारी पर सीधे एफआईआर या जांच शुरू नहीं कर सकेगी। राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत एक नई और विस्तृत स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी कर दी है। इस फैसले का सीधा असर प्रदेश की नौकरशाही और प्रशासनिक कामकाज पर देखने को मिलेगा।

ईमानदार अधिकारियों को कवच देने की तैयारी

अक्सर यह देखा गया है कि कड़े फैसले लेने वाले ईमानदार अधिकारियों को झूठी शिकायतों के जरिए परेशान किया जाता है। इस कारण कई बार अधिकारी फाइलों पर साइन करने या बड़े फैसले लेने से डरते हैं, जिससे ‘पॉलिसी पैरालिसिस’ की स्थिति बन जाती है। सरकार का यह नया कदम इसी डर को खत्म करने के लिए है। नए नियमों के मुताबिक अब किसी भी लोक सेवक द्वारा अपनी ड्यूटी के दौरान लिए गए फैसलों पर सवाल उठाने से पहले सक्षम प्राधिकारी की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

Haryana Government SOP Corruption Investigation Rules
हरियाणा में सरकारी अफसरों पर सीधी कार्रवाई नहीं, जांच से पहले लेनी होगी मंजूरी, सरकार ने जारी की नई एसओपी

रंगे हाथों पकड़े जाने पर कोई राहत नहीं

यह समझना बहुत जरूरी है कि यह नियम भ्रष्टाचार करने वालों को बचाने के लिए नहीं है। नई गाइडलाइंस में स्पष्ट तौर पर कहा गया है कि अगर कोई अधिकारी या कर्मचारी रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों (Trap Case) पकड़ा जाता है, तो उसे धारा 17A का कोई लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों को किसी भी तरह की पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी और वे तत्काल कानूनी कार्रवाई कर सकेंगी। यह प्रावधान सुनिश्चित करता है कि सिस्टम में पारदर्शिता बनी रहे।

केंद्र की तर्ज पर बदली व्यवस्था

हरियाणा सरकार ने यह फैसला केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) के निर्देशों के आधार पर लिया है। वर्ष 2018 में केंद्र ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून में संशोधन किया था। हरियाणा में अब 2022 के पुराने आदेशों को रद्द कर दिया गया है और नई प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। यह नियम ग्रुप ए और बी के अधिकारियों के साथ ही ग्रुप सी और डी (तृतीय व चतुर्थ श्रेणी) के कर्मचारियों पर भी समान रूप से लागू होगा।

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तीन महीने में तय होगा अधिकारी का भविष्य

जांच प्रक्रिया को समयबद्ध बनाने के लिए सरकार ने सख्त टाइमलाइन तय की है।

  • जांच एजेंसी को पहले सक्षम प्राधिकारी से अनुमति मांगनी होगी।

  • सक्षम प्राधिकारी को 3 महीने के भीतर यह तय करना होगा कि जांच की अनुमति दी जाए या नहीं।

  • अगर मामला बहुत पेचीदा है, तो लिखित कारण बताकर इस समय को एक महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है।

इस समय सीमा के निर्धारण से जांच एजेंसियों की फाइले अब सालों तक धूल नहीं फांकेंगी और आरोपी अधिकारी के सिर पर भी अनिश्चितता की तलवार नहीं लटकी रहेगी।

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किसके लिए कहां से मिलेगी मंजूरी

नई एसओपी में मंजूरी देने वाले अधिकारियों (Competent Authority) की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है।

  • अगर जांच हरियाणा एंटी करप्शन ब्यूरो कर रहा है, तो प्रशासनिक अधिकारियों के लिए मुख्य सचिव की मंजूरी जरूरी होगी।

  • अन्य विभागों या एजेंसियों द्वारा जांच किए जाने पर संबंधित विभाग के प्रशासनिक सचिव ही सक्षम प्राधिकारी माने जाएंगे।

  • सभी विभागों में इसके लिए एक ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ बनाने पर जोर दिया गया है ताकि आवेदन इधर उधर न भटकें।

विशेषज्ञों की राय

प्रशासनिक मामलों के जानकारों का मानना है कि इस कदम से निर्णय लेने की प्रक्रिया में तेजी आएगी। जब अधिकारियों को यह भरोसा होगा कि उनके द्वारा नेकनीयती में लिए गए फैसलों पर उन्हें भविष्य में कानूनी पचड़ों में नहीं फंसाया जाएगा, तो वे जनहित के कार्यों में ज्यादा सक्रियता दिखा सकेंगे। हालांकि यह देखना दिलचस्प होगा कि सरकार पेंडिंग मामलों में इसका निपटारा कितनी जल्दी करती है क्योंकि यह नियम लंबित मामलों पर भी लागू होगा।

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अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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