फरीदाबाद, 18 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। हरियाणा में गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। फरीदाबाद जिले में स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक हलके में हड़कंप मच गया था। घटना का तुरंत संज्ञान लेते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने चंडीगढ़ मुख्यालय से राज्य के सभी सिविल सर्जनों के लिए एक व्यापक गाइडलाइन जारी की है। डॉ. मिश्रा ने दोटूक शब्दों में कहा कि सरकारी अस्पतालों में आने वाली हर गर्भवती महिला को समय पर सटीक इलाज, सम्मानजनक व्यवहार और बिना किसी रुकावट के चिकित्सा सुविधाएं मिलनी चाहिए।
अस्पतालों के मुख्य द्वार रहेंगे खुले
अक्सर देखा जाता है कि रात के समय आपातकालीन स्थिति में मरीज जब सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं, तो उन्हें बंद दरवाजों का सामना करना पड़ता है। इस समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए सरकार ने आदेश दिया है कि सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) और जिला अस्पतालों के मुख्य प्रवेश द्वार अब चौबीसों घंटे खुले रहेंगे। इसके साथ ही, रात में ड्यूटी पर तैनात महिला स्वास्थ्य कर्मियों और नर्सिंग स्टाफ की सुरक्षा को मजबूत करने के भी निर्देश दिए गए हैं ताकि वे बिना किसी डर के प्रभावी ढंग से काम कर सकें।
फर्स्ट रेफरल यूनिट्स पर तैनात रहेंगी सुसज्जित एंबुलेंस
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में रेफरल सिस्टम को दुरुस्त करने के लिए सभी फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (FRU) में हर समय कम से कम एक पूर्ण रूप से सुसज्जित एंबुलेंस तैनात रहेगी। जिन अस्पतालों में प्रसव के केस ज्यादा आते हैं, वहां डिलीवरी के लिए विशेष दवाइयों और उपकरणों से लैस समर्पित आपातकालीन एंबुलेंस की व्यवस्था की जाएगी। इसके अलावा, जिन स्वास्थ्य केंद्रों में नर्सिंग स्टाफ की कमी है, वहां सिविल सर्जनों को तीन दिन के भीतर दूसरे संस्थानों से अतिरिक्त स्टाफ तैनात करने की समयसीमा दी गई है ताकि कोई भी प्रसव केंद्र बंद या प्रभावित न हो।
रात में होगी औचक छापेमारी
स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि कागजों पर निर्देश जारी करने के साथ-साथ जमीनी स्तर पर इनकी कड़ाई से निगरानी की जाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) की जिला टीमों और अस्पताल प्रभारियों को रात के समय प्रसूति वार्डों का औचक निरीक्षण (सरप्राइज चेकिंग) करने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने कहा कि इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य प्रणाली में जनविश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देना और सेवा की गुणवत्ता में सुधार करना है। इन नियमों का उल्लंघन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
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