Lado Panchayat: Revolutionary decree of Lado Panchayat: Strong demand to declare female foeticide as murder in the Constitution: हरियाणा में कन्या भ्रूण हत्या (female foeticide) के खिलाफ एक क्रांतिकारी कदम उठा है। भारत की पहली ऑनलाइन लाड़ो पंचायत (Lado Panchayat initiative) ने सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के नेतृत्व में, हरियाणा के महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से, कन्या भ्रूण हत्या को संविधान में हत्या के रूप में मान्यता देने की मांग की है।
इस वर्चुअल पंचायत में हजारों लोग शामिल हुए, जिनमें आशा कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सरपंच, महिलाएं, और लड़कियां थीं। ऑपरेशन लाड़ो (Operation Lado) के तहत शुरू की गई इस पहल ने समाज में जागरूकता और बदलाव की नई लहर पैदा की है। आइए, इस ऐतिहासिक पहल और इसकी प्रेरक कहानियों को विस्तार से जानते हैं।
लाड़ो पंचायत की क्रांतिकारी मांग Lado Panchayat
लाड़ो पंचायत (Lado Panchayat initiative) ने कन्या भ्रूण हत्या को न केवल सामाजिक अपराध, बल्कि एक सोची-समझी हत्या के रूप में परिभाषित करने की मांग की है। पंचायत की अध्यक्ष ट्विंकल पवार ने बताया कि यह मंच पहले भी कई सामाजिक बदलावों का गवाह रहा है।
इसने लड़कियों की शादी की उम्र 18 से बढ़ाकर 21 वर्ष करने की मांग की थी, जिसके लिए 2021 में ट्विंकल को राज्यसभा में आमंत्रित किया गया था। इसके अलावा, पीरियड लीव, महिला विरोधी गालियों पर रोक, और नूंह व सोहना में लड़कियों के लिए विश्वविद्यालय स्थापित करने जैसी पहलें इस पंचायत की उपलब्धियां हैं। इस बार, पंचायत ने कन्या भ्रूण हत्या (female foeticide) को संवैधानिक रूप से हत्या घोषित करने का प्रस्ताव रखा, जिसे सभी प्रतिभागियों ने एकमत से समर्थन दिया।
ऑपरेशन लाड़ो: बदलाव की नई रणनीति
सेल्फी विद डॉटर फाउंडेशन के संस्थापक सुनील जागलान ने ऑपरेशन लाड़ो (Operation Lado) की शुरुआत की, जो कन्या भ्रूण हत्या को जड़ से खत्म करने की एक बहु-स्तरीय रणनीति है। यह अभियान ‘एहसास का सॉफ्टवेयर’ मॉडल पर आधारित है, जो बिबीपुर मॉडल से प्रेरित है और समाज में भावनात्मक जुड़ाव (social awareness) को बढ़ावा देता है।
ऑपरेशन लाड़ो के मुख्य उद्देश्यों में एमटीपी किट के दुरुपयोग को रोकना, गर्भवती महिलाओं में जागरूकता फैलाने के लिए वीडियो का उपयोग, लाउडस्पीकर के जरिए कानूनी जानकारी का प्रसार, और हरियाणा पुलिस के कंट्रोल रूम नंबर 112 का प्रचार शामिल है। यह अभियान न केवल जागरूकता बढ़ाएगा, बल्कि समाज में व्यवहारिक बदलाव (behavioral change) भी लाएगा।
प्रेरक कहानियां: साहस और बदलाव
लाड़ो पंचायत ने कई प्रेरणादायक कहानियां सामने लाईं। पलवल जिले की महिला एवं बाल विकास विभाग की सुपरवाइजर राजनी मलिक ने अपनी कहानी साझा की। पति की मृत्यु और परिवार द्वारा त्यागे जाने के बाद उन पर गर्भ में पल रही बेटी को खत्म करने का दबाव था।
लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपनी बेटी को जन्म दिया। आज वह विधवा पेंशन जैसे मामलों में महिलाओं की मदद कर रही हैं। इसके अलावा, टीम लाड़ो की सोनिया, निशा, सुरभि, और सुप्रिया जैसी युवतियों ने हरियाणा के गांवों में ‘एहसास का सॉफ्टवेयर’ मॉडल को लागू किया। उनके अभियानों में पीरियड चार्ट्स, गाली बंद घर, और बेटी के नाम की नेम प्लेट जैसी पहलें शामिल हैं, जो सामाजिक बदलाव (social awareness) का प्रतीक हैं।
हरियाणा में सुनील जागलान की पहल
सुनील जागलान ने 2012 में कन्या भ्रूण हत्या (female foeticide) के खिलाफ देश की पहली महाखाप महापंचायत का आयोजन किया था, जिसमें पहली बार महिलाओं ने खाप पंचायत में हिस्सा लिया।
इस पंचायत ने बेटी बचाओ अभियान (Beti Bachao campaign) की नींव रखी, जिसके लिए जागलान को राष्ट्रीय पुरस्कार और हरियाणा सरकार से एक करोड़ रुपये का पुरस्कार मिला। इस पुरस्कार से उन्होंने महिलाओं के लिए लाइब्रेरी, महिला स्थल, कंप्यूटर सेंटर, और महिला चौपाल का निर्माण करवाया। उनकी ये पहलें हरियाणा में लैंगिक समानता (gender equality) और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा दे रही हैं।
एकजुट समर्थन और भविष्य की योजनाएं
पंचायत के अंत में सभी प्रतिभागियों ने ऑनलाइन वीडियो के जरिए हाथ उठाकर सुनील जागलान के प्रस्ताव का समर्थन किया, जिसमें कन्या भ्रूण हत्या को संवैधानिक हत्या घोषित करने की मांग की गई। सभी ने ऑपरेशन लाड़ो (Operation Lado) को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया।
अगली लाड़ो पंचायत 1 जून 2025 को होगी, जिसमें इस प्रस्ताव को भारत सरकार के समक्ष औपचारिक रूप से पेश किया जाएगा। पंचायत ने अपील की है कि कन्या भ्रूण हत्या को गंभीर अपराध मानकर इसके लिए सख्त कानूनी प्रावधान किए जाएं। यह पहल सामाजिक और कानूनी बदलाव (legal reforms) की दिशा में एक बड़ा कदम है।
सामाजिक जागरूकता और चुनौतियां
कन्या भ्रूण हत्या (female foeticide) एक गहरी सामाजिक समस्या है, जो लैंगिक भेदभाव और पुरुष-प्रधान मानसिकता से जुड़ी है। लाड़ो पंचायत और ऑपरेशन लाड़ो इस मानसिकता को बदलने की दिशा में काम कर रहे हैं। हालांकि, एमटीपी किट का दुरुपयोग और जागरूकता की कमी जैसी चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि समाज में भावनात्मक जुड़ाव (social awareness) और कानूनी जागरूकता बढ़ाकर इन समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। हरियाणा पुलिस के कंट्रोल रूम नंबर 112 का प्रचार इस दिशा में एक प्रभावी कदम है।
निष्कर्ष: लाड़ो पंचायत की प्रेरणा
लाड़ो पंचायत (Lado Panchayat initiative) ने कन्या भ्रूण हत्या को संवैधानिक हत्या घोषित करने की मांग के साथ एक नया इतिहास रच दिया है। ऑपरेशन लाड़ो (Operation Lado) और सुनील जागलान की पहल हरियाणा में लैंगिक समानता (gender equality) और सामाजिक बदलाव की राह पर एक मील का पत्थर है।
राजनी मलिक और टीम लाड़ो की कहानियां हमें साहस और दृढ़ता की प्रेरणा देती हैं। यह समय है कि हम इस मुहिम का हिस्सा बनें और बेटी बचाओ अभियान (Beti Bachao campaign) को और मजबूत करें। आइए, कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ इस लड़ाई में एकजुट हों और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएं।











