कैथल (Kaithal): भिवानी डिपो से कैथल डिपो को चार पुरानी बीएस-4 बसें आवंटित की गई हैं, जो निरीक्षण के बाद मंगलवार को कैथल पहुंचीं। डिपो के तकनीकी दल ने बसों की स्थिति का निरीक्षण किया था, जिसके बाद इन्हें कैथल बस स्टैंड लाया गया।
अधिकारियों के अनुसार भिवानी से आई बसों की हालत संतोषजनक है और सभी बसें आज से अपने निर्धारित रूटों पर चलना शुरू कर देंगी।
इससे पहले भी पलवल, भिवानी, झज्जर, पानीपत और रोहतक डिपो से 74 पुरानी बसें कैथल को मिल चुकी हैं। इनमें झज्जर डिपो से आई बसों की हालत सबसे खराब पाई गई थी, जबकि अन्य बसें अपेक्षाकृत ठीक थीं। डिपो कर्मचारियों ने पुरानी बसों की मरम्मत कर उन्हें लोकल रूटों पर संचालन हेतु तैयार किया है।
Kaithal: एनसीआर क्षेत्र में 10 वर्ष पुरानी बसों पर प्रतिबंध
एनसीआर में 10 वर्ष पुरानी बसों के संचालन पर प्रतिबंध है, जिसके चलते हटाई गई बसें कैथल भेजी जा रही हैं। हालांकि पुरानी बसें अक्सर बीच रास्ते बंद हो जाती हैं, जिससे यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ता है। वर्तमान में कैथल डिपो के पास कुल 250 बसें हैं, जिनमें 203 चल रही हैं, जबकि 23 बसें लीज पर हैं। डिपो को अभी भी 47 नई बसों की जरूरत है।
अब तक 75 बसें दूसरे जिलों से आ चुकीं
अब तक कैथल डिपो को अलग-अलग जिलों से कुल 75 पुरानी बसें मिल चुकी हैं
पलवल: 9
भिवानी: 11 (अब 15)
झज्जर: 14
रेवाड़ी: 12
पानीपत: 9
रोहतक: 20
अधिकतर बसें बीएस-3 और बीएस-4 मॉडल की हैं, जिन्हें केवल लोकल रूटों पर चलाया जा रहा है। लंबी दूरी के लिए इन्हें उपयुक्त नहीं माना जा रहा।
वर्कशॉप मैनेजर अनिल कुमार ने बताया कि भिवानी डिपो से चार बसें आ चुकी हैं और उनकी स्थिति अच्छी है। निरीक्षण के बाद इन्हें कैथल लाया गया है। बसों को जल्द रूट पर उतारा जाएगा। यात्रियों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। महिलाओं और स्कूली बच्चों के लिए अलग से बस सुविधा उपलब्ध है।
यात्रियों की समस्या कम होगी
यात्री रामनिवास और सुभाष ने बताया कि पुरानी बसों की क्लच प्लेट व इंजन अक्सर खराब हो जाते हैं, जिससे यात्रा में देरी होती है। उन्होंने सरकार से मांग की कि नई बसें खरीदी जाएं ताकि यात्रियों को असुविधा न हो।
पुरानी के बजाय नई बसें भेजी जाएं
डिपो कर्मचारी संदीप और कृष्ण ने कहा कि पुरानी बसें लगातार खराब हो रही हैं और बीच रास्ते बंद पड़ जाती हैं। इससे चालक, परिचालक और यात्रियों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है। कई बसें तो अब सड़क पर चलने लायक भी नहीं रहीं। उन्होंने कहा कि अब डिपो को नई बसें आवंटित की जानी चाहिए।












