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Panipat News: पानीपत डाइंग इंडस्ट्री को सिवाह एसटीपी से 80% सस्ता पानी मिलेगा, 43.5 करोड़ जारी

On: सितम्बर 15, 2025 1:29 अपराह्न
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Panipat News: पानीपत डाइंग इंडस्ट्री को सिवाह एसटीपी से 80% सस्ता पानी मिलेगा, 43.5 करोड़ जारी
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Panipat News: पानीपत की टेक्सटाइल और डाइंग इंडस्ट्री को अब सस्ता पानी मिलने की राह खुल गई है। ट्रम्प टैरिफ से परेशान उद्योग के लिए यह बड़ी राहत है। तीन महीने पहले 1000 करोड़ रुपये के जीरो लिक्विड डिस्चार्ज (ZLD) प्रोजेक्ट को रद्द करने के बाद अब मुख्यमंत्री ने सिवाह के सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से साफ पानी डाइंग इंडस्ट्री को देने के लिए 43.5 करोड़ रुपये का फंड जारी किया है।

सिवाह में 25 और 35 एमएलडी (कुल 60 एमएलडी यानी 6 करोड़ लीटर प्रतिदिन) क्षमता वाले दो एसटीपी से साफ किया हुआ पानी इंडस्ट्री की जरूरतों के लिए उपलब्ध होगा। बाकी पानी अन्य कार्यों में इस्तेमाल होगा।

80% सस्ता होगा एसटीपी का पानी

यह प्रोजेक्ट इसलिए खास है क्योंकि गुरुग्राम में डाइंग इंडस्ट्री को एसटीपी का साफ पानी 2-3 रुपये प्रति 1000 लीटर की दर से मिल रहा है, जबकि पानीपत में उद्यमियों को नहरी पानी 16.53 रुपये प्रति 1000 लीटर के हिसाब से मिलता है। अगर पानीपत में भी एसटीपी का पानी 3-4 रुपये प्रति 1000 लीटर की दर से मिलता है, तो यह नहरी पानी से 76-82% सस्ता होगा।

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अभी इंडस्ट्री को रोजाना 18 एमएलडी से ज्यादा नहरी पानी मिल रहा है। सिवाह एसटीपी में विशेष फिल्टर मशीनें लगाने के लिए 55 करोड़ रुपये और सेक्टर-29 तक पानी पहुंचाने के लिए पाइपलाइन बिछाने पर 13 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए मुख्यमंत्री ने बुनियादी ढांचा विकास योजना के तहत 69.73 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है, जिसमें 43.5 करोड़ रुपये का फंड आवंटन हुआ है।

क्यों जरूरी है एसटीपी का पानी?

पानीपत में नहरी पानी और भूजल पर निर्भरता को कम करने के लिए सरकार एसटीपी के पानी पर जोर दे रही है। दिल्ली पैरलल नहर से सेक्टर-29 पार्ट-2 में बने दो 21-21 एमएलडी के रॉ वाटर प्लांट से रोजाना 18 एमएलडी पानी इंडस्ट्री को मिलता है, जबकि 12 एमएलडी भूजल निकाला जाता है।

रिफाइनरी भी रोजाना 20 क्यूसिक (4.89 करोड़ लीटर) नहरी पानी लेती है, जिसके लिए हर महीने 1.5 करोड़ रुपये सिंचाई विभाग को दिए जाते हैं। भविष्य में दक्षिण हरियाणा को पेयजल आपूर्ति के लिए नहरी पानी न तो रिफाइनरी को मिलेगा और न ही डाइंग इंडस्ट्री को।

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पानीपत डार्क जोन में है, और हरियाणा वाटर रिसोर्स अथॉरिटी ने ट्यूबवेल पर रोक लगाने के नोटिस जारी किए हैं। एनजीटी नियमों के तहत नगर निगम को एसटीपी के 75% पानी को कृषि और अन्य कार्यों में और 25% को निगम क्षेत्र में उपयोग करना होगा।

चुनौतियां और उम्मीदें

गुरुग्राम की टेक्सटाइल मैन्युफैक्चरिंग एसोसिएशन के प्रधान अनिल जैन ने बताया कि वहां सीवर से ट्रीटेड पानी की क्वालिटी अच्छी है। लेकिन पानीपत में स्थिति अलग है, क्योंकि यहां सीवर में डाइंग का पानी भी मिलता है। पानीपत एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के चेयरमैन ललित गोयल ने कहा कि अगर पानी की क्वालिटी को नियंत्रित कर लिया जाए, तो यह इंडस्ट्री के लिए वरदान होगा। डायर्स एसोसिएशन के प्रधान नितिन अरोड़ा ने भी उम्मीद जताई कि साफ एसटीपी पानी मिलने से उद्योग को बड़ी राहत मिलेगी।

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राहुल शर्मा

राहुल शर्मा एक कुशल पत्रकार और लेखक हैं, जो पिछले 8 वर्षों से ब्रेकिंग न्यूज़, हरियाणा न्यूज़ और क्राइम से जुड़ी खबरों पर प्रभावशाली लेख लिख रहे हैं। उनकी खबरें तथ्यपूर्ण, गहन और तेज़ी से पाठकों तक पहुँचती हैं, जो हरियाणा और अन्य क्षेत्रों की महत्वपूर्ण घटनाओं को उजागर करती हैं। राहुल का लेखन शैली आकर्षक और विश्वसनीय है, जो पाठकों को जागरूक और सूचित रखता है। वे Haryananewspost.com और डिजिटल मंचों पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी स्टोरीज़ सामाजिक और आपराधिक मुद्दों पर गहरी छाप छोड़ती हैं।

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