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Bachpan Shayari: बचपन पर सबसे दिल छू लेने वाली 15 शायरी – पढ़कर आंखें भर आएंगी!

On: नवम्बर 15, 2025 6:24 पूर्वाह्न
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Bachpan Shayari: बचपन पर सबसे दिल छू लेने वाली 15 शायरी – पढ़कर आंखें भर आएंगी!
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Bachpan Shayari in hindi: हर साल 14 नवंबर को भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती के रूप में बाल दिवस मनाया जाता है। चाचा नेहरू बच्चों से बेइंतहा प्यार करते थे, इसलिए उनकी जयंती को बच्चों का दिन बना दिया गया। यह दिन बच्चों के विकास, उनकी क्षमताओं को नई ऊंचाइयां देने और उन्हें बेहतर भविष्य देने के लिए मनाया जाता है।

बच्चे तो कच्ची मिट्टी जैसे होते हैं – जैसा सांचा लगाओ, वैसा ही बन जाते हैं। बचपन हर किसी की जिंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा होता है और इसी बचपन पर बड़े-बड़े शायरों ने दिल छू लेने वाली शायरी लिखी है। इस बाल दिवस पर आइए पढ़ते हैं बचपन पर

सबसे प्यारी 2 लाइन की शायरी: Bachpan Shayari

बचपन की यादें ताजा कर देने वाली शायरी
बच्चों के छोटे हाथों को चांद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएंगे
~ निदा फ़ाज़ली

उड़ने दो परिंदों को अभी शोख़ हवा में
फिर लौट के बचपन के ज़माने नहीं आते
~ बशीर बद्र

मेरे रोने का जिस में क़िस्सा है
उम्र का बेहतरीन हिस्सा है
~ जोश मलीहाबादी

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किताबों से निकल कर तितलियां ग़ज़लें सुनाती हैं
टिफ़िन रखती है मेरी मां तो बस्ता मुस्कुराता है
~ सिराज फ़ैसल ख़ान

मेरा बचपन भी साथ ले आया
गांव से जब भी आ गया कोई
~ कैफ़ी आज़मी

Bachpan Shayari

फ़रिश्ते आ कर उन के जिस्म पर ख़ुश्बू लगाते हैं
वो बच्चे रेल के डिब्बों में जो झाड़ू लगाते हैं
~ मुनव्वर राना

दुआएं याद करा दी गई थीं बचपन में
सो ज़ख़्म खाते रहे और दुआ दिए गए हम
~ इफ़्तिख़ार आरिफ़

‘जमाल’ हर शहर से है प्यारा वो शहर मुझ को
जहाँ से देखा था पहली बार आसमान मैं ने
~ जमाल एहसानी

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हम तो बचपन में भी अकेले थे
सिर्फ़ दिल की गली में खेले थे
~ जावेद अख़्तर

असीर-ए-पंजा-ए-अहद-ए-शबाब कर के मुझे
कहाँ गया मिरा बचपन ख़राब कर के मुझे
~ मुज़्तर ख़ैराबादी

भूक चेहरों पे लिए चांद से प्यारे बच्चे
बेचते फिरते हैं गलियों में ग़ुबारे बच्चे
~ बेदिल हैदरी

बड़ी हसरत से इंसां बचपने को याद करता है
ये फल पक कर दोबारा चाहता है ख़ाम हो जाए
~ नुशूर वाहिदी

चुप-चाप बैठे रहते हैं कुछ बोलते नहीं
बच्चे बिगड़ गए हैं बहुत देख-भाल से
~ आदिल मंसूरी

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मैं बचपन में खिलौने तोड़ता था
मिरे अंजाम की वो इब्तिदा थी
~ जावेद अख़्तर

उम्मीद है ये शायरी पढ़कर आपका भी बचपन ताज़ा हो गया होगा। इस बाल दिवस पर इन्हें अपने बच्चों, भतीजे-भतीजी या दोस्तों के साथ जरूर शेयर करें। सोशल मीडिया पर भी पोस्ट करके सबको बचपन की याद दिलाएं!

मोनिका गुप्ता

मोनिका गुप्ता एक अनुभवी लेखिका हैं, जो पिछले 10 वर्षों से लाइफस्टाइल, एंटरटेनमेंट, ट्रेंडिंग टॉपिक्स और राशिफल पर हिंदी में आकर्षक और जानकारीपूर्ण लेख लिख रही हैं। उनकी रचनाएं पाठकों को दैनिक जीवन की सलाह, मनोरंजन की दुनिया की झलक, वर्तमान ट्रेंड्स की गहराई और ज्योतिषीय भविष्यवाणियों से जोड़ती हैं। मोनिका जी का लेखन सरल, रोचक और प्रासंगिक होता है, जो लाखों पाठकों को प्रेरित करता है। वे विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म्स और न्यूज़ पोर्टल्स (Haryananewspost.com) पर सक्रिय हैं, जहाँ उनकी कलम से निकले लेख हमेशा चर्चा का विषय बन जाते हैं।

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