कुरुक्षेत्र, 03 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। भीषण गर्मी के बीच आम प्रेमियों का इंतजार खत्म हो गया है और लंगड़ा, चौसा व अल्फांसो के साथ दशहरी ने भी बाजार में जगह बना ली है। उत्तर प्रदेश के मलीहाबाद की मिट्टी से उपजा असली दशहरी आम अपनी लाजवाब मिठास के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। हालांकि, मुनाफे के चक्कर में कई दुकानदार कलमी आम को दशहरी बताकर बेच देते हैं। असली दशहरी की सबसे पहली पहचान उसका सुडौल और लंबा आकार है, जो नीचे की तरफ से हल्का नुकीला या मुड़ा हुआ होता है।
रंग और सुगंध से करें शुद्धता की परख
बाजार में गहरा पीला या सुर्ख केसरिया दिखने वाला आम अक्सर रसायनों या कार्बाइड से पका हुआ हो सकता है। असली दशहरी पकने के बाद भी हल्का हरापन लिए हुए पीला दिखता है। इसकी खुशबू इतनी प्राकृतिक और तेज होती है कि बिना काटे भी आप इसकी मिठास को महसूस कर सकते हैं। अगर आम से किसी भी तरह की तीखी या रसायनिक गंध आ रही है, तो समझ लीजिए कि वह असली मलीहाबादी स्वाद नहीं है।
गूदे की बनावट और पतली गुठली की खासियत
दशहरी आम को काटते ही उसकी असलियत सामने आ जाती है। असली दशहरी का गूदा पूरी तरह से रेशारहित होता है, यानी इसे खाते समय आपके दांतों में धागे जैसे रेशे नहीं फंसेंगे। इसकी गुठली अन्य प्रजातियों के मुकाबले बहुत ज्यादा पतली और चपटी होती है, जिस कारण इसमें फल का गूदा अधिक मात्रा में निकलता है। यही वजह है कि आम के शौकीनों के बीच दशहरी पहली पसंद बना रहता है।
जून-जुलाई का सीजन है सबसे सटीक
ग्राहकों को इस बात का खास ख्याल रखना चाहिए कि असली दशहरी का सही समय जून के दूसरे हफ्ते से शुरू होकर जुलाई के आखिर तक रहता है। सीजन से पहले मिलने वाले आम अक्सर कोल्ड स्टोरेज के या बनावटी तरीके से पकाए गए होते हैं। खाने में यह आम पूरी तरह मीठा होता है और इसमें खटास बिल्कुल नहीं होती। खरीदारी करते समय इन बारीकियों पर ध्यान देकर आप असली दशहरी के जायके का लुत्फ उठा सकते हैं।
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