आज 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व मनाया जा रहा है। शाम 05:43 से 07:15 तक पूजा का शुभ मुहूर्त है। सुकर्मा योग में तिल और गुड़ की आहुति देना शुभ रहेगा।
उत्तर भारत विशेषकर पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में आज लोक पर्व लोहड़ी की धूम मची हुई है। 13 जनवरी 2026 का दिन किसानों और सिख समुदाय के लिए बेहद खास है। ढोल की थाप और गिद्दा के शोर के बीच लोग शाम को अलाव जलाने की तैयारियों में जुटे हैं। लोहड़ी केवल एक त्योहार नहीं है बल्कि यह प्रकृति और फसल के उत्सव का प्रतीक है। इस बार ग्रहों की स्थिति भी लोहड़ी को खास बना रही है क्योंकि आज सुकर्मा और चित्रा नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है।
किसानों के लिए क्यों खास है आज का दिन
लोहड़ी का सीधा संबंध कृषि और प्रकृति से है। इस समय खेतों में रबी की फसलें यानी गेहूं और सरसों लहलहा रही होती हैं। किसान इस उम्मीद में यह त्योहार मनाते हैं कि उनकी आने वाली फसल बंपर होगी और घर में धन धान्य की कोई कमी नहीं रहेगी। यह पर्व सर्दियों के जाने और बसंत ऋतु के आगमन का भी संकेत देता है। इसके अलावा जिन घरों में हाल ही में शादी हुई है या बच्चे का जन्म हुआ है वहां पहली लोहड़ी का जश्न देखते ही बनता है।
अग्नि जलाने का शुभ मुहूर्त
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लोहड़ी की पूजा और अलाव जलाने का एक निश्चित समय होता है। इस वर्ष 13 जनवरी यानी आज शाम को पूजा के लिए लगभग डेढ़ घंटे का शुभ समय मिल रहा है।
मुहूर्त शुरू: शाम 05 बजकर 43 मिनट से
मुहूर्त समाप्त: शाम 07 बजकर 15 मिनट तक
पंडितों का कहना है कि इस दौरान अग्नि प्रज्वलित करना और उसमें आहुति देना अत्यंत शुभ फलदायी रहेगा। सुकर्मा योग होने के कारण इस समय की गई प्रार्थना सीधे स्वीकार होती है।
पूजा के लिए जरूरी सामग्री
लोहड़ी की पूजा में प्राकृतिक चीजों का ही इस्तेमाल होता है। शाम की पूजा से पहले आप इन चीजों की व्यवस्था जरूर कर लें।
लकड़ी और उपले (गोबर के कंडे)
रेवड़ी और गजक
मूंगफली
मक्का (पॉपकॉर्न)
काला तिल और गुड़
गेहूं की नई बालियां (यदि उपलब्ध हों)
देसी घी और दूध
पूजा की सरल और सही विधि
लोहड़ी की शाम को घर के आंगन या किसी खुली जगह पर पश्चिम दिशा की ओर मुंह करके पूजा करनी चाहिए।
सबसे पहले स्थान को साफ करके लकड़ी और उपले का एक ढेर बना लें।
शुभ मुहूर्त में पवित्र अग्नि प्रज्वलित करें।
घर के सभी सदस्य अग्नि के चारों ओर घेरा बनाकर खड़े हो जाएं।
इसके बाद ‘आदर आए दलिदर जाए’ कहते हुए अग्नि में तिल, गुड़, रेवड़ी और मूंगफली अर्पित करें।
अग्नि देव को जल और थोड़ा दूध चढ़ाएं।
अग्नि की कम से कम 7 या 11 बार परिक्रमा करें और अपने परिवार की खुशहाली की कामना करें।
अंत में बड़ों का आशीर्वाद लें और प्रसाद बांटकर मुंह मीठा करें।
दुल्ला भट्टी की कहानी का महत्व
लोहड़ी के गीतों में दुल्ला भट्टी का जिक्र जरूर आता है। लोक कथाओं के अनुसार मुगल काल में दुल्ला भट्टी ने अमीर व्यापारियों को लूटकर गरीब लड़कियों की शादी करवाई थी। इसलिए लोहड़ी की रात अलाव के पास बैठकर उनकी वीरता की कहानियां सुनाना इस त्योहार की परंपरा का अहम हिस्सा है।
धार्मिक मामलों के जानकारों का मानना है कि लोहड़ी पर अग्नि में तिल डालने का वैज्ञानिक महत्व भी है। तिल और गुड़ जलने से वातावरण शुद्ध होता है और सर्दियों में होने वाले संक्रामक रोगों के कीटाणु नष्ट होते हैं। यह सामुदायिक एकता का प्रतीक है जहां लोग एक साथ मिलकर खुशियां बांटते हैं।
FAQ’s
प्रश्न: आज लोहड़ी पर अग्नि जलाने का शुभ समय क्या है?
उत्तर: आज 13 जनवरी को लोहड़ी की अग्नि जलाने का शुभ मुहूर्त शाम 05 बजकर 43 मिनट से लेकर 07 बजकर 15 मिनट तक रहेगा।
प्रश्न: लोहड़ी की अग्नि में क्या अर्पित करना चाहिए?
उत्तर: लोहड़ी की पवित्र अग्नि में तिल, गुड़, रेवड़ी, मूंगफली, मक्का (पॉपकॉर्न) और गेहूं की बालियां अर्पित करना शुभ माना जाता है।
प्रश्न: लोहड़ी का त्योहार क्यों मनाया जाता है?
उत्तर: यह त्योहार नई फसल (रबी) के आने की खुशी और सर्दियों की विदाई के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। यह मुख्य रूप से किसानों का पर्व है।
प्रश्न: इस बार लोहड़ी पर कौन सा योग बन रहा है?
उत्तर: वर्ष 2026 की लोहड़ी पर सुकर्मा और चित्रा योग का निर्माण हो रहा है जिसे पूजा पाठ के लिए बहुत श्रेष्ठ माना गया है।













