माघ पूर्णिमा धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण तिथि है। इस वर्ष 1 फरवरी को स्नान और दान का विशेष संयोग बन रहा है जो पितृ दोष से मुक्ति दिला सकता है।
सनातन धर्म में माघ मास की पूर्णिमा को मोक्षदायिनी तिथि कहा जाता है। पंचांग के अनुसार इस वर्ष माघ पूर्णिमा 1 फरवरी को है। यह दिन केवल पवित्र नदियों में डुबकी लगाने तक सीमित नहीं है बल्कि यह पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भी सर्वश्रेष्ठ अवसर है। ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि इस दिन किए गए छोटे उपाय जीवन के बड़े संकटों को टाल सकते हैं।
माघ पूर्णिमा की सही तारीख और शुभ मुहूर्त
हिंदू पंचांग की गणना बताती है कि पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी को सुबह 5 बजकर 52 मिनट पर शुरू हो रही है। इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 2 फरवरी को रात 3 बजकर 38 मिनट पर होगा। उदया तिथि के मान के अनुसार 1 फरवरी को ही पूर्णिमा का व्रत और स्नान दान किया जाना शास्त्र सम्मत है। धर्म विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरान किया गया जप और तप कई गुणा अधिक फल देता है।
पितरों की कृपा प्राप्ति का सुनहरा अवसर
माघ पूर्णिमा को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु स्वयं गंगा जल में निवास करते हैं। इसके अलावा सभी देवी देवता पृथ्वी पर भ्रमण करते हैं। ज्योतिष के नजरिए से देखें तो यह दिन सूर्य और चंद्रमा के विशेष प्रभाव वाला होता है।
इस दिन पितरों के निमित्त किया गया तर्पण सीधे उन तक पहुंचता है। जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष है उन्हें इस दिन विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। पुराणों में कहा गया है कि माघ पूर्णिमा पर किया गया श्राद्ध प्रयागराज में किए गए श्राद्ध के बराबर पुण्य प्रदान करता है। इससे वंश वृद्धि में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और परिवार में सुख समृद्धि आती है।
स्नान और दान की विधि
इस पावन पर्व पर ब्रह्म मुहूर्त में उठना श्रेयस्कर है। यदि आप किसी पवित्र नदी में नहीं जा सकते तो घर पर ही नहाने के पानी में थोड़ा गंगाजल मिला लें। पानी में काले तिल मिलाकर स्नान करने से शनि और राहु के दोष भी शांत होते हैं।
स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों का आह्वान करें और उन्हें जल अर्पित करें। इस प्रक्रिया को तर्पण कहा जाता है। यह कार्य मन को असीम शांति देता है।
क्यों खास है यह संयोग
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल होता है कि क्या पूर्णिमा पर श्राद्ध करना सही है। धर्म सिंधु जैसे ग्रंथों के अनुसार पूर्णिमा पूर्णता का प्रतीक है। इस दिन किया गया कोई भी शुभ कार्य अधूरा नहीं रहता।
इस दिन गाय कुत्ते और कौए को भोजन का कुछ अंश जरूर दें। ऐसा करने से पितृ गण तृप्त होते हैं। यह भी माना जाता है कि जो व्यक्ति निस्वार्थ भाव से इस दिन दान करता है उसे पैतृक संपत्ति से जुड़े विवादों में राहत मिलती है। पूर्वजों का आशीर्वाद एक सुरक्षा कवच की तरह पूरे परिवार की रक्षा करता है।
ज्योतिषी क्या सलाह देते हैं
विषय विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्णिमा पर चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं में होता है। चंद्रमा को मन और जल का कारक माना गया है। जब आप इस दिन दान करते हैं तो मानसिक तनाव कम होता है।
माघ पूर्णिमा पर सफेद वस्तुओं का दान सबसे उत्तम माना गया है। आप दूध चीनी चावल या सफेद वस्त्र किसी जरूरतमंद को दान कर सकते हैं। इसके अलावा श्रीमद्भागवत गीता या गजेंद्र मोक्ष का पाठ करना पितरों को मोक्ष की ओर ले जाता है।













