Mangala Gauri vrat aarti lyrics Know the mantra and significance of Jai Mangala Gauri Mata: मंगला गौरी आरती 2025 के साथ सावन का पवित्र महीना और भी रौनकमय हो उठा है! सावन की शुरुआत 11 जुलाई से हो चुकी है, और हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत का उत्सव मनाया जा रहा है।
“जय मंगला गौरी माता, ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल कदा दाता” के स्वरों से मंदिर और घर गूंज रहे हैं। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना का प्रतीक है।
माता पार्वती की भक्ति में डूबकर कथा सुनने और आरती करने से मन को सुकून मिलता है। आइए, मंगला गौरी आरती 2025 के लिरिक्स, महत्व और पूजा विधि को करीब से जानें, और सावन की भक्ति में डूब जाएं!
Mangala Gauri vrat aarti lyrics
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता
ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल दाता। जय मंगला गौरी…।
अरिकुल पद्मा विनासनी जय सेवक त्राता,
जग जीवन जगदम्बा हरिहर गुण गाता। जय मंगला गौरी…।
सिंह को वाहन साजे कुंडल है,
साथा देव वधु जहं गावत नृत्य करता था। जय मंगला गौरी…।
सतयुग शील सुसुन्दर नाम सटी कहलाता,
हेमांचल घर जन्मी सखियन रंगराता। जय मंगला गौरी…।
शुम्भ निशुम्भ विदारे हेमांचल स्याता,
सहस भुजा तनु धरिके चक्र लियो हाता। जय मंगला गौरी…।
सृष्टी रूप तुही जननी शिव संग रंगराताए
नंदी भृंगी बीन लाही सारा मद माता। जय मंगला गौरी…।
देवन अरज करत हम चित को लाता,
गावत दे दे ताली मन में रंगराता। जय मंगला गौरी…।
मंगला गौरी माता की आरती जो कोई गाता
सदा सुख संपति पाता।
जय मंगला गौरी माता, जय मंगला गौरी माता।।
मंगला गौरी व्रत और आरती का महत्व
मंगला गौरी व्रत सावन के हर मंगलवार को माता पार्वती को समर्पित है। यह व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष है, जो अपने पति की दीर्घायु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना करती हैं।
“जय मंगला गौरी माता” की आरती माता के गुणों और शक्ति का बखान करती है। यह आरती भक्ति का ऐसा स्वर है, जो मन को शांति देता है और माता को प्रसन्न करता है।
शास्त्रों के अनुसार, माता गौरी ने भगवान शिव को पाने के लिए कठिन तप किया था, और यह व्रत उनकी भक्ति का प्रतीक है। सावन 2025 में इस आरती को गाकर माता की कृपा पाएं और अपने जीवन को सुख-शांति से भरें!
मंगला गौरी आरती के लिरिक्स
मंगला गौरी आरती के बोल दिल को छू लेते हैं। “जय मंगला गौरी माता, ब्रह्मा सनातन देवी शुभ फल कदा दाता” से शुरू होने वाली यह आरती माता की महिमा का गान करती है। इसमें माता को “अरिकुल पद्मा विनासनी” और “जग जीवन जगदम्बा” कहकर उनकी शक्ति और करुणा का वर्णन किया गया है।
हर पंक्ति में माता के गुणों की प्रशंसा है, जो भक्तों को भक्ति के रास्ते पर ले जाती है। सावन में इस आरती को गाते समय दीप जलाएं, माता को फूल और बेलपत्र चढ़ाएं। पूजा के बाद कथा सुनें और परिवार के साथ इस पवित्र माहौल का आनंद लें। सावन 2025 में इन लिरिक्स को अपने दिल में उतारें!
पूजा और आरती की सही विधि
मंगला गौरी व्रत की पूजा और आरती का खास तरीका है। सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। माता पार्वती की मूर्ति या तस्वीर को लाल कपड़े पर स्थापित करें। दीप जलाएं, फूल, चंदन, और सिंदूर चढ़ाएं।
माता को 16 श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें। “ॐ गौर्यै नमः” मंत्र का जाप करें। मंगला गौरी की कथा सुनें और भोग में हलवा-पूरी या मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद “जय मंगला गौरी माता” की आरती गाएं।
सावन के मंगलवार को यह पूजा विशेष फल देती है। सात्विक भोजन करें और मन को शांत रखें। सावन 2025 में इस विधि से पूजा कर माता को प्रसन्न करें!













