ब्रेकिंग न्यूज़मौसमक्रिकेटऑटोमनोरंजनअपराधट्रेंडिंगकृषिलाइफस्टाइलराशिफलहरियाणा

Tulsidas Ke Dohe in Hindi: तुलसीदास जी के अमर दोहे: ‘रघुपति कीरति कामिनी…’ का अर्थ जान हर कोई रह गया हैरान!

On: जुलाई 29, 2025 8:55 अपराह्न
Follow Us:
Tulsidas Ke Dohe in Hindi: तुलसीदास जी के अमर दोहे: 'रघुपति कीरति कामिनी...' का अर्थ जान हर कोई रह गया हैरान!
Join WhatsApp Group

Tulsidas Ke Dohe in Hindi with Meaning:हर साल सावन मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गोस्वामी तुलसीदास जी की जयंती मनाई जाती है। 2025 में यह पावन दिन 31 जुलाई, गुरुवार को पड़ेगा।

इस खास मौके पर हम आपको तुलसीदास जी के कुछ लोकप्रिय और गूढ़ अर्थ वाले दोहे के साथ उनके जीवन के कुछ अनछुए पहलुओं से रूबरू करा रहे हैं।

Tulsidas Ke Dohe in Hindi

1. ‘तुलसी’ काया खेत है, मनसा भयौ किसान।
पाप-पुन्य दोउ बीज हैं, बुवै सो लुनै निदान॥

अर्थ: शरीर एक खेत है और मन किसान। मनुष्य जैसे कर्म (बीज) बोएगा, वैसा ही फल पाएगा। अच्छे कर्मों से पुण्य और बुरे कर्मों से पाप फलस्वरूप प्राप्त होगा।

2. राम नाम अवलंब बिनु, परमारथ की आस।
बरषत वारिद-बूँद गहि, चाहत चढ़न अकास॥

अर्थ: जो राम नाम के बिना मोक्ष की उम्मीद रखते हैं, वे ऐसे हैं जैसे कोई बारिश की बूंद को पकड़कर आसमान में चढ़ना चाहे। बिना रामनाम के परमार्थ नहीं मिल सकता।

3. राम-नाम-मनि-दीप धरु, जीह देहरी द्वार।
‘तुलसी’ भीतर बाहिरौ, जौ चाहसि उजियार॥

अर्थ: अगर जीवन में अंदर-बाहर दोनों ओर उजाला चाहिए, तो जीभ पर राम-नाम रूपी दीप जलाना होगा। राम-नाम ही असली प्रकाश है।

4. ‘तुलसी’ सब छल छाँड़िकै, कीजै राम-सनेह।
अंतर पति सों है कहा, जिन देखी सब देह॥

कम उम्र में सफेद हो रहे हैं बाल? पंचकूला आयुर्वेद संस्थान के डॉक्टरों ने बताए बचाव के असरदार उपाय | premature-white-hair-causes-ayurvedic-treatment-palitya-panchkula
कम उम्र में सफेद हो रहे हैं बाल? पंचकूला आयुर्वेद संस्थान के डॉक्टरों ने बताए बचाव के असरदार उपाय

अर्थ: भगवान राम की भक्ति छल-कपट छोड़कर करनी चाहिए क्योंकि भगवान हमारे हर कर्म को जानते हैं।

5. ‘तुलसी’ साथी विपति के, विद्या, विनय, विवेक।
साहस, सुकृत, सुसत्य-व्रत, राम-भरोसो एक॥

अर्थ: विपत्ति के समय जो साथ देते हैं, वे हैं: विद्या, विनम्रता, विवेक, साहस, पुण्य, सत्य और भगवान राम पर विश्वास।

6. रघुपति कीरति कामिनी, क्यों कहै तुलसीदासु।
सरद अकास प्रकास ससि, चार चिबुक तिल जासु॥

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि श्रीराम की कीर्ति इतनी विशाल है कि उसे शब्दों में नहीं कहा जा सकता। शरद ऋतु के पूर्णिमा के चंद्रमा जैसी उनकी छवि है।

7. अमिय गारि गारेउ गरल, नारी करि करतार।
प्रेम बैर की जननि युग, जानहिं बुध न गंवार॥

अर्थ: स्त्री अमृत और विष दोनों है। वह प्रेम और बैर दोनों की जननी है। इसे समझना बुद्धिमान का काम है, मूर्ख इसे नहीं समझते।

8. दुर्जन दर्पण सम सदा, करि देखौ हिय गौर।
संमुख की गति और है, विमुख भए पर और॥

अर्थ: दुष्ट व्यक्ति शीशे जैसा होता है सामने अच्छा दिखता है, पीछे मुंह फेरते ही असली रूप दिखाता है।

उल्लू वाली अंगूठी पहनने से क्या होता है? जानें फायदे, सही उंगली, धातु और शुभ दिन | owl-ring-benefits-which-finger-metal-and-best-day-to-wear
उल्लू वाली अंगूठी पहनने से क्या होता है? जानें फायदे, सही उंगली, धातु और शुभ दिन

9. आवत हिय हरषै नहीं, नैनन नहीं सनेह।
‘तुलसी’ तहाँ न जाइए, कंचन बरसे मेह॥

bजहां आपका स्वागत न हो, आंखों में स्नेह न दिखे, वहां चाहे सोना क्यों न बरसे — नहीं जाना चाहिए।

10. बिनु विश्वास भगति नहीं, तेही बिनु द्रवहिं न राम।
राम-कृपा बिनु सपनेहुँ, जीव न लहि विश्राम॥

अर्थ: भगवान में विश्वास के बिना भक्ति नहीं, और भक्ति के बिना भगवान प्रसन्न नहीं होते। जब तक कृपा नहीं होती, तब तक आत्मा को शांति नहीं मिलती।

कौन थे गोस्वामी तुलसीदास?

तुलसीदास जी हिंदी साहित्य के एक ऐसे स्तंभ थे जिन्होंने रामभक्ति आंदोलन को एक नई दिशा दी। उन्हें महर्षि वाल्मीकि का अवतार भी माना जाता है। इनका जन्म 1532 ई. में उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में हुआ था। इनके पिता का नाम आत्माराम शुक्ल दुबे और माता का नाम हुलसी देवी था।

उन्होंने रामचरितमानस की रचना की जो संस्कृत रामायण का अवधी में अनुवाद है। इसके अलावा गीतावली, दोहावली, विनय पत्रिका, कवितावली और हनुमान चालीसा जैसी कालजयी रचनाएं भी उनके नाम हैं।

तुलसीदास जी के प्रसिद्ध दोहे और उनके अर्थ

11. “रघुपति कीरति कामिनी, कहि तुलसीदासु।
सुनि साधु अनुज सिय समेत कृपासिंधु गृह आयउ॥”

अर्थ: तुलसीदास जी कहते हैं कि मुझे भगवान राम की कीर्ति रूपी स्त्री ही प्रिय है। जब राम के अनुज लक्ष्मण और सीता के साथ भगवान राम मेरे घर आए तो वह मेरे लिए परम सौभाग्य की बात थी।

किचन सिंक के नीचे कौन-सी चीजें नहीं रखनी चाहिए? जानिए वास्तु विशेषज्ञों की सलाह | #VastuTips #KitchenVastu #Lifestyle
किचन सिंक के नीचे कौन-सी चीजें नहीं रखनी चाहिए? जानिए वास्तु विशेषज्ञों की सलाह

12. “बड़ा भया तो क्या भया, जैसे पेड़ खजूर।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर॥”

अर्थ: केवल ऊंचा कद होना किसी काम का नहीं, जैसे खजूर का पेड़ न तो छाया देता है और न ही फल आसानी से मिलता है। यानी बिना विनम्रता के ऊंचा पद व्यर्थ है।

13. “पर उपकार से बढ़कर कोई धर्म नहीं,
और दूसरों को दुख देने से बढ़कर कोई पाप नहीं।”

अर्थ: यह दोहा सीधा जीवन की मूल बातें सिखाता है दूसरों की मदद करना सबसे बड़ा धर्म है, और किसी को हानि पहुंचाना सबसे बड़ा पाप।

तुलसीदास के दोहों की आज भी है प्रासंगिकता

Tulsidas Ke Dohe in Hindi: तुलसीदास जी के दोहे न सिर्फ धार्मिक भावनाओं को जगाते हैं, बल्कि जीवन के व्यवहारिक और नैतिक मूल्यों को भी उजागर करते हैं। आज के समय में जब लोग आध्यात्मिक शांति की तलाश में हैं, उनके दोहे राह दिखाने का काम करते हैं।

मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment