गुरुग्राम, 25 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और ऑफिस की सिटिंग जॉब के कारण मोटापा एक आम समस्या बन चुका है। ऐसे में लोग अक्सर वजन कम करने के नेचुरल तरीके खोजते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि आपकी किचन में मौजूद साधारण चाय इस समस्या का समाधान हो सकती है। चाय में मौजूद कैटेचिन और कैफीन जैसे तत्व शरीर की ऊर्जा खपत (Energy Expenditure) को बढ़ा देते हैं, जिससे जमा हुआ फैट धीरे-धीरे कम होने लगता है।
कौन सी चाय है सबसे असरदार?
वजन घटाने की रेस में ग्रीन टी (Green Tea) सबसे आगे है। इसमें मौजूद ‘ईजीसीजी’ (EGCG) नामक तत्व फैट को एनर्जी में बदलने की प्रक्रिया को तेज करता है। हालांकि, यदि आप ग्रीन टी पसंद नहीं करते, तो ब्लैक टी या हर्बल टी (जैसे अदरक और दालचीनी की चाय) भी बेहतरीन विकल्प हैं। दालचीनी रक्त शर्करा (Blood Sugar) को नियंत्रित करती है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और आप अतिरिक्त कैलोरी लेने से बच जाते हैं।
समय का सही चुनाव है जीत की कुंजी
चाय का फायदा तभी मिलता है जब उसे सही समय पर पिया जाए। सुबह खाली पेट या व्यायाम से पहले ग्रीन टी का सेवन शरीर की स्टैमिना बढ़ाता है और फैट ऑक्सीकरण को तेज करता है। वहीं, दोपहर के भोजन के करीब 30-40 मिनट बाद हर्बल टी पीने से पाचन तंत्र दुरुस्त होता है और भारीपन महसूस नहीं होता। ध्यान रहे, रात को सोने से ठीक पहले कैफीन युक्त चाय पीने से बचना चाहिए क्योंकि यह आपकी नींद को प्रभावित कर सकती है।
इन गलतियों से बचें
अक्सर लोग ग्रीन टी में भी स्वाद के लिए चीनी या शहद की अत्यधिक मात्रा मिला देते हैं, जो वजन घटाने के उद्देश्य को ही खत्म कर देता है। दूध वाली चाय में मौजूद फैट और चीनी कैलोरी की मात्रा बढ़ा देते हैं। यदि आप सच में परिणाम चाहते हैं, तो बिना चीनी वाली चाय या स्टीविया जैसे नेचुरल स्वीटनर का प्रयोग करें। साथ ही, दिन भर में 3 कप से ज्यादा चाय न पिएं, अन्यथा इससे डिहाइड्रेशन या एसिडिटी की समस्या हो सकती है।
लाइफस्टाइल में बदलाव के बिना सब अधूरा
यह समझना बेहद जरूरी है कि चाय कोई जादुई दवा नहीं है। यह केवल एक ‘मेटाबॉलिज्म बूस्टर’ के रूप में काम करती है। हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों के लोगों के लिए, जहां खानपान में घी-दूध की प्रधानता है, वहां चाय के साथ-साथ वॉक और संतुलित आहार का तालमेल बिठाना अनिवार्य है। जब आप स्वस्थ खानपान और नियमित एक्सरसाइज के साथ इन हर्बल ड्रिंक्स को जोड़ते हैं, तभी शरीर में सकारात्मक बदलाव नजर आते हैं।
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