स्वीडन, 27 अप्रैल (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर पूरी दुनिया में छिड़ी बहस के बीच स्वीडन के स्टॉकहोम से एक ऐसी खबर आई है, जो एआई की असली क्षमता और उसकी सीमाओं का कच्चा चिट्ठा खोलती है। स्टॉकहोम के वसास्तान इलाके में एंडन लैब्स (Andon Labs) एक ऐसा कैफे चला रहा है, जहां प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी गूगल के शक्तिशाली एआई ‘जेमिनी’ (Google Gemini) पर आधारित एक वर्चुअल मैनेजर ‘मोना’ को सौंपी गई है। जहां एक ओर एआई से नौकरियां जाने का डर सता रहा है, वहीं यह प्रयोग दिखाता है कि एआई अभी पूरी तरह आत्मनिर्भर होने से कोसों दूर है।
जब एआई ने खोया नियंत्रण
कैफे के एडमिनिस्ट्रेटिव काम संभाल रही एआई मैनेजर ‘मोना’ के फैसले कई बार हैरान करने वाले होते हैं। एक दिलचस्प वाकये में, मोना ने कैफे के लिए एक साथ 3,000 स्टरल ग्लव्स का ऑर्डर दे दिया, जबकि वहां एक समय में केवल एक ही कर्मचारी तैनात रहता है। इतना ही नहीं, एआई ने जरूरत से कहीं ज्यादा टॉयलेट पेपर भी स्टॉक कर लिया। यह स्थिति तब है जब कैफे का इंटीरियर बेहद साधारण है और प्रबंधन पूरी तरह तकनीकी दक्षता का दावा कर रहा था। वहां मौजूद इंसानी कर्मचारी ने बताया कि एआई के साथ काम करना कभी-कभी भूलने की बीमारी (डिमेंशिया) से पीड़ित व्यक्ति के साथ तालमेल बिठाने जैसा चुनौतीपूर्ण होता है।
इंसानी निगरानी के बिना अधूरा है ‘ऑटोनॉमस’ कैफे
भले ही इस कैफे को ‘दुनिया का पहला ऑटोनॉमस कैफे’ बताया जा रहा हो, लेकिन हकीकत यह है कि यहां ग्राहकों को सर्व करने और एआई की गलतियों को सुधारने के लिए एक इंसान की मौजूदगी हमेशा बनी रहती है।
There’s a cafe in Stockholm run entirely by Claude!
I visited it. Field notes… pic.twitter.com/xCnl1Limnr
— worldcob (@jlagerros) April 22, 2026
सबसे मजेदार बात यह है कि एआई मैनेजर ‘मोना’ हर आधे घंटे के काम के बाद 10 मिनट का अनिवार्य ब्रेक लेती है। कर्मचारी के अनुसार, एआई अक्सर पुरानी चीजें भूल जाता है और लॉजिस्टिक्स के मामले में तर्कहीन फैसले लेने लगता है।
नौकरियों पर क्या होगा असर?
यह प्रयोग उस समय आया है जब अनुमान लगाया जा रहा है कि 2030 तक अकेले अमेरिका में 6 प्रतिशत नौकरियां एआई और ऑटोमेशन की वजह से खत्म हो जाएंगी। मेटा जैसी बड़ी टेक कंपनियों में हो रही छंटनी को भी इसी बदलाव से जोड़ा जा रहा है। हालांकि, स्टॉकहोम का यह कैफे एक ठोस प्रमाण है कि जटिल मानवीय तर्क और सामान्य ज्ञान (Common Sense) की जगह लेना मशीनों के लिए अभी बहुत बड़ी चुनौती है। तकनीक प्रशासनिक कार्यों में मदद तो कर सकती है, लेकिन पूर्ण निर्णय क्षमता के लिए उसे अभी भी इंसानी दिमाग की बैसाखी की जरूरत है।
Samsung की टेंशन बढ़ी! एप्पल के iPhone Fold में मिलेगा लिक्विडमेटल हिंज और 12GB RAM
ब्रेकिंग न्यूज़ और Trending News अपडेट के लिए Haryana News Post से जुड़े रहें।













