चंडीगढ़, 22 मई (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। Cockroach Life Lessons: कहते हैं कि कलयुग में कब, कौन, कहां और कैसे नेता बन जाए, कोई नहीं जानता। लेकिन इस बार जो हुआ है, उसने देश के सारे पॉलिटिकल पंडितों के सिर चकरा दिए हैं। पिछले कई दिनों से मीडिया की हेडलाइंस से लेकर सोशल मीडिया की टाइमलाइन तक, हर तरफ सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा है ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janata Party)। कुछ लोग इसे देश में किसी बहुत बड़ी डिजिटल क्रांति की सुगबुगाहट मान रहे हैं, तो कुछ इसे महज फेसबुक-ट्विटर की ‘मसखरी’ कहकर हंस रहे हैं। लेकिन भाईसाहब, मामला इतना भी हल्का नहीं है। 16 मई को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर अवतरित हुई इस पार्टी ने महज कुछ ही दिनों में डेढ़ करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स कूट लिए हैं। इतनी जल्दी तो लोग अपनी शादी की रील वायरल नहीं कर पाते, जितनी जल्दी इस ‘कॉकरोच सेना’ ने अपनी फौज खड़ी कर ली है। अब तो बड़े-बड़े दिग्गज राजनेता भी सुबह-सुबह चाय की चुस्की के साथ इसी पार्टी की चर्चा कर रहे हैं।
चीफ जस्टिस की एक ‘टिप’ और बन गई नई पार्टी
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस ‘कॉकरोच पुराण’ की शुरुआत कहां से हुई? तो कहानी के सूत्रधार हैं हमारे माननीय चीफ जस्टिस सूर्यकांत। सुप्रीम कोर्ट में एक केस की लाइव सुनवाई चल रही थी। जज साहब फॉर्म में थे। अचानक उन्होंने बेरोजगार युवाओं की तुलना सीधे किचन में घूमने वाले कॉकरोच से कर दी। चीफ जस्टिस साहब ने फरमाया “कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ आरटीआई व दूसरे एक्टिविस्ट बनकर हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।”
बस फिर क्या था! जज साहब ने तो युवाओं को ‘हिटलर’ समझने की भूल कर दी थी, लेकिन वो भूल गए कि आज का युवा बेरोजगार भले हो, डेटा पैक से पूरा लैस है। इस बयान के आते ही इंटरनेट पर भूचाल आ गया। युवाओं को लगा कि जब करियर की लगी पड़ी हो, तो कोई हमें कॉकरोच (Cockroach) कैसे बोल सकता है? इसी गुस्से को भांपकर 30 साल के अभिजीत दीपके नाम के एक लड़के ने ‘लोहा जब गर्म हो तो हथौड़ा मार देना चाहिए’ वाली नीति अपनाई। उसने तुरंत ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का ऑनलाइन मोर्चा खोल दिया। देखते ही देखते देश के करोड़ों बेरोजगारों ने इस नाम को अपना ‘बैज ऑफ ऑनर’ बना लिया और पार्टी में शामिल हो गए।
कॉकरोच: एक जीव, जो साक्षात ‘रजनीकांत’ है!
लेकिन यारों, जरा ठंडे दिमाग से सोचो। क्या कॉकरोच वाकई इतना बुरा शब्द है कि इसे गाली की तरह इस्तेमाल किया जाए? विज्ञान की मानें तो कॉकरोच इस धरती का वो प्राणी है जिसके सामने इंसान तो ‘नूब’ (Noob) है। इस जीव के पास ऐसे-ऐसे तगड़े गुण हैं, जिन्हें अगर देश का युवा अपने रेज्यूमे में लिख दे, तो गूगल वाले घर आकर नौकरी दे दें। आइए कॉकरोच जी के इन चमत्कारी गुणों पर एक नजर डालते हैं:
1. विपरीत हालातों का दामाद (परम सर्वाइवर)
कॉकरोच के बारे में कहा जाता है कि ये इंसानों की तुलना में 10 गुना ज्यादा परमाणु रेडिएशन झेल सकते हैं। आप इन्हें भयानक सर्दी में छोड़ दो या खौलती गर्मी में, ये ‘ऑल इज वेल’ कहकर मजे से घूमते रहेंगे। इनका यह गुण सिखाता है कि बॉस कितनी भी गालियां बके या वैकेंसी कितनी भी कम आए, जिंदगी में डटे रहना है।
2. बिना सिर पैर की जिंदगी (आखिरी सांस तक जंग)
यह बात आपको डरा सकती है, लेकिन कॉकरोच का अगर सिर भी काट दिया जाए, तो भी वह करीब एक महीने तक बिना सिर के मजे से जिंदा रह सकता है। क्यों? क्योंकि वह सांस लेने के लिए अपने मुंह का मोहताज नहीं होता, उसके शरीर में छोटे-छोटे छेद होते हैं। इंसानों को इससे सीखना चाहिए कि चाहे हालात कितने भी ‘बिना सिर-पैर’ के हो जाएं, जब तक शरीर में सांस है, तब तक हार नहीं माननी है।
3. वॉटरप्रूफ ‘बाहुबली’
कॉकरोच पानी के अंदर पूरे 40 मिनट तक अपनी सांस रोक सकता है। इतनी देर में तो अच्छे-अच्छे गोताखोरों के फेफड़े बाहर आ जाएं। वह इतनी देर सांस रोककर आराम से तैरते हुए किसी सुरक्षित जगह पर निकल जाता है। यानी मुसीबत आए तो घबराओ मत, थोड़ी देर शांत रहो और सेफ जोन में निकल लो।
4. 0.05 सेकंड का ‘स्पाइडर सेंस’
कॉकरोच के पैरों में जो बारीक बाल होते हैं, वो हवा के दबाव को इतनी तेजी से भांपते हैं कि महज 0.05 सेकंड में उसे पता चल जाता है कि ऊपर से चप्पल आने वाली है। वह तुरंत वहां से नौ दो ग्यारह हो जाता है। इतनी तेज सतर्कता अगर आज के युवाओं में आ जाए, तो वो रील्स के स्कैम और फेक न्यूज से हमेशा दूर रहें।
5. कुछ भी खा लेगा, कहीं भी रह लेगा
खाने के मामले में कॉकरोच कोई नखरे नहीं दिखाता। उसे पिज्जा-बर्गर नहीं चाहिए। वो गोंद, ग्रीस, साबुन, चमड़ा और किताबों का कवर तक चबा जाता है। और अगर सूखा पड़ जाए, तो वह बिना खाए-पिए पूरा महीना काट सकता है। मिडिल क्लास और बेरोजगार युवाओं के लिए इससे बेहतरीन रोल मॉडल और कौन हो सकता है?
तो क्या अब ‘कॉकरोच’ कहना गर्व की बात है?
अब कॉकरोच के इन हैरान करने वाले गुणों को जानने के बाद फैसला आपके हाथ में है। चीफ जस्टिस साहब ने तो इसे ताना मारकर कहा था, लेकिन युवाओं ने इसे एक ‘सुपरपावर’ की तरह अपना लिया है। अब यह आपके नजरिए पर निर्भर करता है कि आप कॉकरोच को रसोई की गंदगी समझते हैं या फिर इस दुनिया का सबसे ढीठ, मजबूत और कभी न हार मानने वाला ‘अल्टीमेट सर्वाइवर’। वैसे जो भी हो, इस ‘कॉकरोच क्रांति’ ने यह तो साबित कर दिया है कि अगर देश के युवाओं को उंगली करोगे, तो वो सोशल मीडिया पर आपकी पूरी सल्तनत हिलाने का दम रखते हैं।
Cockroach Janta Party: ‘कॉकरोच मरता नहीं है’, X अकाउंट ब्लॉक होने पर अभिजीत दीपके का बड़ा दावा
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