Himachal Elections: डेरों, देवी-देवताओं और गुंडई व दारू के सहारे भी राजनेता

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Himachal Elections: डेरों, देवी-देवताओं और गुंडई व दारू के सहारे भी राजनेता

Himachal Elections: डेरों, देवी-देवताओं और गुंडई व दारू के सहारे भी राजनेता

Himachal Pradesh Assembly Elections: अब तक हजारों लीटर शराब और करोड़ों की नकदी व मादक पदार्थ बरामद 


वीर सिंह पटियाल, शिमला:

Himachal Elections: हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों की सरगर्मियों के बीच इन दिनों विभिन्न दलों के नेता खुद को जिताने के लिए हमेशा की तरह शराब व गुंडागर्दी के साथ ही देवी-देवताओं व डेरों का भी सहारा ले रहे हैं।

कई राजनेताओं की रणनीति इसी के इर्द-गिर्द घूम रही है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की भी पांच नवंबर को हिमाचल में दो जनसभाएं हैं और उनका भी ब्यास स्थित राधा स्वामी के डेरे में वहां के मुखिया से मुलाकात का कार्यक्रम है।

दूसरी तरफ अगर नशे की बात करें तो पुलिस व प्रदेश के उत्पाद शुल्क एवं कराधान विभाग ने चुनावों की तारीखों के ऐलान के बाद ही नशे व अवैध शराब पर रोक के लिए कई जगह नाकेबंदी कर रखी है फिर भी ये चीजें धड़ल्ले से कई जगह पहुंच रही हैं।

राज्य निर्वाचन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार 14 अक्टूबर को चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद पुलिस व प्रशासन राज्य में अब तक इस बुधवार तक 20 हजार करोड़ से ज्यादा की अवैध शराब व नशीले पदार्थ बरामद कर चुका है। इसी के साथ राज्य में करोड़ों में कैश भी जब्त हो चुका है।

बता दें कि समाज के सबसे कमजोर व शोषित वर्ग को राजनीतिक पार्टियों द्वारा अपने पक्ष में करने के मकसद से शराब का इस्तेमाल पहले भी किया जाता रहा है और अब भी यह धड़ल्ले से किया जा रहा है।

सूत्रों का कहना है कि 14 अक्टूबर से एक नवंबर तक पुलिस, नाकों पर 20176.965 लीटर शराब बरामद कर चुकी है और इसकी कीमत 17 करोड़ रुपए बताई गई है। चुनावों के दौरान दबंगई के उदाहरण कांगड़ा और बिलासपुर के बॉर्डर एरिया में आते हैं।

हरोली और दून में भी ऐसी घटनाएं होती हैं, इसलिए चुनाव विभाग इन इलाकों के पोलिंग बूथों को संवेदनशील व अति संवेदनशील श्रेणी में रखता है।

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जीत में डेरों व सत्संग स्थलों का अहम रोल 

गौरतलब है कि मतदाताओं को अपने या अपने नेता के पक्ष में करने के लिए प्रदेश में मौजूद डेरों के आश्रम व सत्संग स्थलों का भी अहम रोल रहता है और हर बार की तरह इस बार भी राजनेता डेरों प्रमुखों की सुपोट लेकर वोटरों को अपनी ओर रिझाने मेें जुटे हैं।

प्रदेश में डेरा सच्चा सौदा, सतलोक आश्रम के साथ ही ब्यास स्थित राधा स्वामी सत्संग व निरंकारी मिशन के कई अनुयायी मौजूद हैं। अधिकतर दलित और अनुसूचित जाति के लोग इन डेरों से जुड़े हैं। 

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मंत्री भी ले चुके हैं राम रहीम का आशीर्वाद

हाल ही में हिमाचल के उद्योग एवं परिवहन मंत्री व जसवां-परागपुर से बीजेपी प्रत्याशी  बिक्रम सिंह ठाकुर भी आॅनलाइन सत्संग के दौरान डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे।

बता दें कि डेरे की साध्वियों के यौन शोषण के अलावा दो हत्याकांड में राम रहीम को उम्रकैद की सजा हो चुकी है और वह  हरियाणा की रोहतक जेल में बंद है। इन दिनों राम रहीम 40 दिन की पैरोल पर बाहर  है। वह हमाचल में भी सत्संग कर चुका है। 

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वंशजों को देवता मानते हैं ग्रामीण, ‘लूण-लोटा’ का भी सहारा 

प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग अपने वंशजों को ही देवता स्वरूप मानते हैं और देवताओं के नाम पर वोट मांगने की बातें अक्सर कुल्लू, चंबा, नालागढ़, कुटलैहड़ रामपुर, कोटी, कुल्लू, चंबा, नाहन, कुठार और क्योंथल जैसी रियासत में ज्यादा नजर आती है।

कई लोग देव-दोष के भय से इन रियासतों के वंशजों को ही अपना वोट देते हैं। उधर सिरमौर के गरिपार क्षेत्र समेत कई दुर्गम इलाकों में राजनेता ‘लूण-लोटा’ के सहारे वोट मांगते हैं। इसमें नेता व उनके समर्थक पानी से भरे लोटे में नमक डालते हैं और लोगों को अपने पक्ष में वोट डालने के लिए देवता की कसम खिलाते हैं। 

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