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Anant Chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर को बप्पा की विदाई का शुभ मुहूर्त और विधि, नोट करें!

On: September 2, 2025 7:42 PM
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Anant Chaturdashi 2025: अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर को बप्पा की विदाई का शुभ मुहूर्त और विधि, नोट करें!
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Anant Chaturdashi 2025, सिटी रिपोर्टर | नई दिल्ली : गणेश उत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन होता है, जब भक्त बप्पा को भावपूर्ण विदाई देते हैं। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। साल 2025 में अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर, शनिवार को पड़ेगी। इस दिन 10 दिन के गणेश उत्सव का अंत होता है और बप्पा का विसर्जन किया जाता है। अगर आप भी गणपति को विदाई देना चाहते हैं, तो शुभ मुहूर्त और सही विधि जरूर जान लें। साथ ही, अनंत चतुर्दशी पर 14 गांठों वाला धागा बांधने की परंपरा भी खास है। आइए, जानते हैं इस दिन की पूरी जानकारी।

अनंत चतुर्दशी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त

इस साल अनंत चतुर्दशी 6 सितंबर 2025 को मनाई जाएगी। चतुर्दशी तिथि 6 सितंबर को रात 3:12 बजे शुरू होगी और 7 सितंबर को रात 1:41 बजे खत्म होगी। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6:02 बजे से रात 1:41 बजे तक रहेगा, यानी कुल 19 घंटे 39 मिनट तक। गणेश विसर्जन के लिए शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:

सुबह का मुहूर्त: सुबह 7:36 से 9:10 तक

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दोपहर का मुहूर्त: दोपहर 12:17 से शाम 4:59 तक

सायाह्न मुहूर्त (लाभ): शाम 6:37 से रात 8:02 तक

रात्रि मुहूर्त (शुभ, अमृत, चर): रात 9:28 से 1:45 बजे तक (7 सितंबर)

उषाकाल मुहूर्त (लाभ): सुबह 4:36 से 6:02 तक (7 सितंबर)

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इन मुहूर्तों में गणेश विसर्जन करने से बप्पा की कृपा बनी रहती है।

गणेश विसर्जन की सही विधि

गणेश विसर्जन को विधिवत करना बेहद जरूरी है। सुबह स्नान करने के बाद पूजा स्थल को साफ करें। चौकी पर पीला या लाल वस्त्र बिछाकर स्वास्तिक बनाएं और अक्षत (चावल) रखें। गणेश जी की अंतिम पूजा करें, जिसमें उन्हें स्नान कराएं, नए वस्त्र पहनाएं और कुमकुम का तिलक लगाएं। दूर्वा, फूल, मोदक और लड्डू का भोग लगाएं। ‘ॐ गं गणपतये नमः’ जैसे मंत्रों का जाप करें और गणेश स्तोत्र का पाठ करें। पूरे परिवार के साथ गणेश जी की आरती करें। मूर्ति को जल में विसर्जित करने से पहले ‘गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ’ का जयकारा लगाएं।

14 गांठों वाला धागा क्यों खास?

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अनंत चतुर्दशी पर 14 गांठों वाला धागा (अनंत सूत्र) बांधने की परंपरा भी है। यह धागा भगवान विष्णु की पूजा के साथ कलाई पर बांधा जाता है और इसे सुख, समृद्धि और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि यह 14 गांठें भगवान विष्णु के 14 नामों या 14 लोकों का प्रतीक हैं। इस धागे को गंगाजल से शुद्ध करके, हल्दी और कुमकुम लगाकर पूजा में रखा जाता है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारी पर आधारित है। हरियाणा न्यूज पोस्ट इसकी पुष्टि नहीं करता।

अमनदीप सिंह

अमनदीप सिंह एक समर्पित और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 10 वर्षों से मौसम और कृषि से संबंधित खबरों पर गहन और जानकारीपूर्ण लेख लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ मौसम के पूर्वानुमान, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और कृषि क्षेत्र की नवीनतम तकनीकों, योजनाओं और चुनौतियों को उजागर करती हैं, जो किसानों और ग्रामीण समुदायों के लिए अत्यंत उपयोगी हैं। अमनदीप का लेखन सरल, विश्वसनीय और पाठक-केंद्रित है, जो कृषि समुदाय को बेहतर निर्णय लेने में मदद करता है।

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