Chaturmas wishes in Hindi Chaturmas vidai shayari Welcome Jain Chaturmas Poem: चातुर्मास की तैयारी का समय आ गया है, और ये वो पल है जब हर जैन और आध्यात्मिक साधक अपने मन, शरीर और आत्मा को संवारने की ठान लेता है! ये चार महीने का पवित्र समय सिर्फ व्रत और उपवास का नहीं, बल्कि आत्म-चिंतन और साधना का सुनहरा मौका है। लेकिन सवाल ये है कि आखिर इस खास मौके के लिए हम तैयार कैसे हों? क्या सिर्फ नियमों का पालन करना काफी है, या कुछ और भी करना चाहिए? आइए, इस लेख में चातुर्मास की तैयारी के उन आसान और गहरे तरीकों को जानें, जो आपके जीवन को नई दिशा देंगे। ये लेख आपके लिए एक दोस्त की तरह है, जो आपको इस आध्यात्मिक यात्रा में गाइड करेगा!
Chaturmas wishes in Hindi
हर जैनी करता है इन अनमोल घड़ियों का इंतजार
गुरु भगवंतों के सानिध्य में बीते चातुर्मास बार बार
ज्ञान दर्शन चरित्र तप का लगता रहे मेला
दौड़ दौड़ कर के आए स्थानक छोड संसार का झमेला
गुरु भगवंतों के मुखारविंद से सुनने मिले जिनवाणी
मनुष्य भव पाकर बढ़े हमारी पुण्य वाणी
सम्यक ज्ञान रूपी ज्योत को करे हम प्रकाशित
जैन धर्म के तत्व ज्ञान से होते रहे संस्कारित
सम्यक दर्शन तो मोक्ष पाने देगा हमें साथ
जिन उपदेशों को अब हमें करना है आत्मसात
सम्यक चारित्र दृढ़ करेगा हमारा संकल्प
दान, शील, तप, भाव है बहुत सारे विकल्प
सम्यक तप से करेंगे हम कर्मों को चकनाचूर
मोक्ष रूपी राह ना होगी अब हमसे दूर
गुरू भगवंतों की कृपा से लूटेंगे सद्गुणों का खजाना
महका देंगे हम हमारा जिन रूपी घराना
हर क्षेत्र में गूंजेंगे अब भगवान महावीर के नारे
चातुर्मास सफल बनाने में तन मन लगा देंगे सारे।
चातुर्मास का महत्व क्यों है ये इतना खास?
चातुर्मास, यानी चार महीनों का वो पवित्र समय, जब जैन धर्म के साधु-संत एक जगह ठहरकर तप, ध्यान और धर्मोपदेश देते हैं। ये समय श्रावण से शुरू होकर कार्तिक तक चलता है। इस दौरान प्रकृति भी शांत होती है, और ये समय आत्मिक विकास के लिए सबसे उत्तम माना जाता है। चातुर्मास की तैयारी सिर्फ बाहरी नियमों तक सीमित नहीं है; ये मन को शुद्ध करने और आत्मा को ऊंचा उठाने का अवसर है। ये वो समय है जब आप अपने भीतर की कमियों को देख सकते हैं और उन्हें सुधार सकते हैं।
Chaturmas Shayari
सुरज की एक किरण फूल खिला देती है
संतों की नेक नजर भाग खिला देती है ।
हर गीत के पीछे एक साँज होता है
हर बात के पीछे एक राज होता है
चांद पर देखो उस पर भी दाग होता है
बिगड़ी हुई तस्वीर संवर जाती है उसकी जिनके सिर पे संतो हाथ होता है।
गुरु ही जीवन का आधार है
गुरु बिना जिंदगी में मंझधार में है
गुरु जी लगावे,जीवन की नैया पार
गुरु के संग से हो जाएगा बेड़ा पार ।
मंझदार में भी किनारा मिल गया
अंधेरे में भी उजाला मिल गया
गजब है गुरूमैय्या का करिश्मा
तूफाँ में भी सहारा मिल गया।
धरती अंबर गूंजे जयघोष के नारों से
वंदन उन्हें करती हुँ, श्रद्धा के उपहारों से।
वानी में है ओज निराला, जीवन जैसे शीतल चंदन
अनंत उपकारी गुरूराज को श्रध्दा सहित हो वंदन।
मन की शुद्धि
चातुर्मास की तैयारी की शुरुआत होती है मन से। सबसे पहले अपने मन को साफ करें। पुरानी नकारात्मक सोच, गुस्सा, या किसी के प्रति द्वेष को छोड़ दें। ध्यान और प्रार्थना के लिए रोज 10-15 मिनट निकालें। जैन धर्म में ‘नमोकार मंत्र’ का जाप मन को शांति देता है। इसके अलावा, अपने आसपास सकारात्मक माहौल बनाएं। अच्छी किताबें पढ़ें, जैसे जैन आगम या आध्यात्मिक ग्रंथ। ये आपके मन को चातुर्मास के लिए तैयार करेंगे। अगर मन शांत होगा, तो आप इस समय का पूरा लाभ उठा पाएंगे।
व्रत और संयम
चातुर्मास में व्रत और उपवास का विशेष महत्व है। लेकिन इसके लिए शरीर को पहले से तैयार करना जरूरी है। अचानक कठिन व्रत शुरू करने से पहले अपनी सेहत का ध्यान रखें। हल्का और सात्विक भोजन करें, जैसे दाल, सब्जियां और फल। पानी और जूस ज्यादा पिएं, ताकि शरीर में ऊर्जा बनी रहे। अगर आप पहली बार व्रत करने जा रहे हैं, तो छोटे-छोटे उपवास से शुरुआत करें। उदाहरण के तौर पर, एक समय का भोजन छोड़कर देखें। ये न सिर्फ शरीर को स्वस्थ रखेगा, बल्कि आपको संयम की शक्ति भी देगा।
चातुर्मास का सामाजिक पहलू
चातुर्मास की तैयारी सिर्फ व्यक्तिगत साधना तक सीमित नहीं है; ये समाज से जुड़ने का भी समय है। इस दौरान जैन धर्म में दान और सेवा को बहुत महत्व दिया जाता है। जरूरतमंदों की मदद करें, चाहे वो भोजन, कपड़े, या समय देकर हो। किसी जैन मंदिर या साधु-संत के प्रवचन में हिस्सा लें। दूसरों की मदद करने से न सिर्फ आपका मन शुद्ध होगा, बल्कि समाज में भी सकारात्मक बदलाव आएगा। चातुर्मास का असली मकसद है अपने अंदर की अच्छाई को बाहर लाना और दूसरों के साथ बांटना।
Shayari on Jain Guru
गरिमा गुरु की अनंत है, गुणों का भंडार
जन जन के है देवता, मम जीवन आधार
वर्धमान के वीर हो, जिनशासन की शान
नमन करु मैं भक्ति से, पाऊं पद निर्वाण
जिनके मुख पर तेज और तेज में सोम्यता
जिनकी वाणी में ओज और ओज में मधुरता
जिनके कार्य में शौर्य और शौर्य में दक्षता
जिनके ह्रदय में वात्सल्य और वात्सल्य में प्रवीणता
जिनके जीवन में अध्यात्म और अध्यात्म में सरलता।
आपका सानिध्य पाकर भाग्य जगा हमारा
शीतल होता रहे तन मन बहे कृपा की धारा
संयम के पूर्ण प्रतिमान दिव्य नयन सितारे
आस्था के अप्रतिम केंद्र शत् शत् वंदन हमारे।
दर्शन बहुत किए गुरु मुख के
अब पदचिन्हों की ओर निहारे
गुरु ने जिस पथ पर कदम बढ़ाए
हम भी उस पथ पर कदम बढ़ाए।
Shayari on Jain Sant
बिन पुकारे दे रहे वात्सल्य का जो दान है
उपमित करूँ किससे आपको मिलता नहीं उपमान हैं
शांत तेरी धवल छवि मन पटल पर छा रही
हर अमावस देख तुझको पुर्णिमा बन आ रही।
गुरुवर आपके गुणों को हमसे गाया नहीं जाता
आप की साधना का अंदाजा कभी लगाया नहीं जाता
आपके गुणों का गुणगान करें तो कैसे करें
कि दुनिया में ऐसा पैमाना कहीं पाया नहीं जाता
तकदीर हजारों की जगाई आपने
जिंदगी लाखों की बनाई आपने
डूब रहे थे जो भव सागर में
कश्ती करोड़ों की पार लगाई आपने।













