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Gangaur Puja Aarti Lyrics in Hindi: गणगौर 2025 मां पार्वती और ईसर जी की आरती से करें पूजा पूरी, लिरिक्स के साथ जानें खासियत

On: April 8, 2025 8:21 AM
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Gangaur Puja Aarti Lyrics in Hindi: गणगौर 2025 मां पार्वती और ईसर जी की आरती से करें पूजा पूरी, लिरिक्स के साथ जानें खासियत

Gangaur Puja Aarti Lyrics in Hindi: गणगौर 2025 मां पार्वती और ईसर जी की आरती से करें पूजा पूरी, लिरिक्स के साथ जानें खासियत

 

 

Gangaur aarti lyrics, gangaur puja ki aarti, aarti kije gangaur isar ji ki, mata parvati ki aarti lyrics, gangaur ki aarti: गणगौर 2025 पर “आरती कीजिए गणगौर ईसर जी की” गाएं। यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए गुप्त रूप से किया जाता है। पार्वती-ईसर की पूजा के बाद राजस्थानी अंदाज की आरती से गणगौर त्योहार को खास बनाएं।

Gangaur Puja Aarti Lyrics in Hindi: चैत्र शुक्ल तृतीया को मनाया जाने वाला गणगौर का त्योहार महिलाओं के लिए बेहद खास है। यह दिन पति की लंबी उम्र और सुखी जीवन की कामना का प्रतीक है। मान्यता है कि गुप्त रूप से व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से ही इसका पूरा फल मिलता है। इस पावन मौके पर मां गणगौर और ईसर जी की आरती गाना न भूलें। यह भक्ति से भरा अनुष्ठान आपके घर में सौभाग्य और शांति लाता है। आइए, गणगौर की खास आरतियों के बोल और उनके भाव को समझें, जो इस पर्व को और यादगार बनाएंगे।

Gangaur Puja Aarti Lyrics in Hindi: गणगौर की पहली आरती: शिव-पार्वती का गुणगान

“आरती कीजिए गणगौर ईसर जी की, गौरी शंकर शिव पार्वती की…” यह आरती मां पार्वती और भगवान शिव की जोड़ी की महिमा बखानती है। इसमें देसी घी का दीप जलाने, फूलों का हार चढ़ाने और खीर-ढोकला का भोग लगाने की बात है। “ईसर म्हारा छैल छबीला, गोरा म्हारी रूप की रानी” जैसी पंक्तियां इस जोड़े की सुंदरता और भक्तों के प्रति उनकी कृपा को दर्शाती हैं। यह आरती हर उस महिला के लिए है जो अपने सुहाग की लंबी उम्र की दुआ मांगती है। इसे गाते हुए मन में भक्ति का रंग और गहरा हो जाता है।

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Gangaur Aarti Lyrics

आरती कीजिए गणगौर ईसर जी की
गौरी शंकर शिव पार्वती की -2
देसी घी को दीप जलायो
तोड़ तोड़ फूलडा हार बनायो
लाला फूला की थाने हार पहनायो
आरती कीजिए………
महिमा थारी सब कोई गावे
खीर ढोकला को भोग लगावे
भंडार उसके भर देते हो
आरती कीजिए…….
ईसर म्हारा छैल छबीला
गोरा म्हारी रूप की रानी
सुंदर जोड़ी पर वारी वारी जाऊं
आरती कीजिए…………..
जो कोई आपकी शरण में आवे
सर्व सुहाग परम पथ पावे
आरती कीजिए……….

दूसरी आरती: राजस्थानी अंदाज में भक्ति

“म्हारी डूंगर चढती सी बेलन जी, म्हारी मालण फुलडा से लाय…” यह आरती राजस्थानी संस्कृति की झलक दिखाती है। इसमें सूरज, चंद्रमा, ब्रह्मा और ईसर जी को आरती अर्पित करने का जिक्र है। पान, सुपारी, मोहरें और मोती जैसे चढ़ावे की बात इसे और खास बनाती है। “करो न भाया की बहना आरत्यो जी” जैसी पंक्तियां परिवार के प्यार और एकता को दर्शाती हैं। यह आरती गणगौर के पारंपरिक रंग को जीवंत करती है और पूजा को भावनात्मक बनाती है।

 

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म्हारी डूंगर चढती सी बेलन जी
म्हारी मालण फुलडा से लाय |
सूरज जी थाको आरत्यों जी
चन्द्रमा जी थाको आरत्यो जी |
ब्रह्मा जी थाको आरत्यो जी
ईसर जी थाको आरत्यो जी
थाका आरतिया में आदर मेलु पादर मेलू
पान की पचास मेलू
पीली पीली मोहरा मेलू ,
रुपया मेलू डेड सौ सुपारी मेलू ,
मोतीडा रा आखा मेलू
राजा जी रो सुवो मेलू ,
राणी जी री कोयल मेलू
करो न भाया की बहना आरत्यो जी
करो न सायब की गौरी आरत्यो जी

तीसरी आरती: लोक परंपरा की मिठास

“नीव ढलती बेलड़ी जी, मालन फुलड़ा सा ल्याय…” यह आरती लोकगीतों की शैली में है। इसमें ईसरदास और कानीराम की भक्ति के साथ गाय-बछड़े और बहू-पुत्र की समृद्धि की कामना है। “झीलो म्हारी चूनड़ी जी” हर पंक्ति के साथ दोहराया जाता है, जो पूजा की निरंतरता और श्रद्धा को दिखाता है। यह गीत गणगौर के उत्सव में गांव की सादगी और विश्वास को सामने लाता है। इसे गुनगुनाते हुए आप पूजा के माहौल में खो जाएंगे।

Gangaur Puja Aarti 

नीव ढलती बेलड़ी जी |
मालन फुलड़ा सा ल्याय, ईसरदास थारो कोटडया जी |
मालन फुलड़ा सा ल्याय, कानीराम थारो आरती जी ||
आरतडदात धाम सुपारी लागी डोड़ा स जी |
डोड़ा राज कोट चिणाए, झीलो म्हारी चूनड़ी जी ||
गायां जाई छ ठाणम जी, बहुवां जाई छ साल, झीलो म्हारी चूनड़ी जी |
गायां जाया बाछड़ा जी, बहूवां जाया छ पूत, झीलो म्हारी चूनड़ी जी ||
गायां खाया खोपरा जी बहूवां खाई छ सूट, झीलो म्हारी चूनड़ी जी |
गायां क गल घूघरा जी बहूवां कागल हार, झीलो म्हारी चूनड़ी जी ||
गोरल जायो द पूत जी कुण खिलायगी जी, खिलासी रोवां ननद झाबर क पालण जी |
आँख मोड़ नाक मोड़ कड़ मोड़ घूमर घाल,बाड़ी न रुन्दल जी ||
बाड़ी म लाल किवाड़, झीली म्हारी चूनड़ी जी, आवगा ब्रह्मदासजी रा पूत पाजोव थारी मन राली जी ||

पार्वती माता की आरती: शक्ति और सौंदर्य का आह्वान

“जय पार्वती माता, जय पार्वती माता…” यह आरती मां पार्वती की महिमा का बखान करती है। “सिंह को वाहन साजे, कुण्डल हैं साथा” से लेकर “शुम्भ निशुम्भ विदारे” तक, यह मां की शक्ति और सौंदर्य को उजागर करती है। “श्री प्रताप आरती मैया की, जो कोई गाता, सदासुखी नित रहता” जैसी पंक्तियां भक्तों को सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देने का वादा करती हैं। इस आरती को गाकर आप मां की कृपा के भागी बन सकते हैं।

गणगौर का यह पर्व सिर्फ व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भक्ति और भावनाओं का संगम है। इन आरतियों को गाकर आप अपने परिवार के लिए सौभाग्य और शांति की कामना कर सकते हैं। तो इस गणगौर, मां पार्वती और ईसर जी की इन सुंदर आरतियों के साथ अपने व्रत को पूरा करें और त्योहार का असली आनंद लें।

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Mata Parvati Ki Aarti Lyrics

जय पार्वती माताजय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवीशुभ फल की दाता॥
जय पार्वती माता
अरिकुल पद्म विनाशिनिजय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदम्बा,हरिहर गुण गाता॥
जय पार्वती माता
सिंह को वाहन साजे,कुण्डल हैं साथा।
देव वधू जस गावत,नृत्य करत ताथा॥
जय पार्वती माता
सतयुग रूपशील अतिसुन्दर,नाम सती कहलाता।
हेमांचल घर जन्मी,सखियन संग राता॥
जय पार्वती माता
शुम्भ निशुम्भ विदारे,हेमांचल स्थाता।
सहस्र भुजा तनु धरि के,चक्र लियो हाथा॥
जय पार्वती माता
सृष्टि रूप तुही हैजननी शिवसंग रंगराता।
नन्दी भृंगी बीन लहीसारा जग मदमाता॥
जय पार्वती माता
देवन अरज करतहम चित को लाता।
गावत दे दे ताली,मन में रंगराता॥
जय पार्वती माता
श्री प्रताप आरती मैया की,जो कोई गाता।
सदासुखी नित रहतासुख सम्पत्ति पाता॥
जय पार्वती माता

अमित गुप्ता

पत्रकारिता में पिछले 30 वर्षों का अनुभव। दैनिक भास्कर, अमर उजाला में पत्रकारिता की। दैनिक भास्कर में 20 वर्षों तक काम किया। अब अपने न्यूज पोर्टल हरियाणा न्यूज पोस्ट (Haryananewspost.com) पर बतौर संपादक काम कर रहा हूं। खबरों के साथ साथ हरियाणा के हर विषय पर पकड़। हरियाणा के खेत खलियान से राजनीति की चौपाल तक, हरियाणा सरकार की नीतियों के साथ साथ शहर के विकास की बात हो या हर विषयवस्तु पर लिखने की धाकड़ पकड़। म्हारा हरियाणा, जय हरियाणा।

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