Hisar News Women Empowerment (हिसार) : कहते हैं कि मां की ममता और उसकी बात हमेशा संतान के जीवन का आधार बनती हैं। कुछ ऐसा हुआ शहर के रहने वाले एक युवक रजत कुमार के साथ। उनकी मां ने मरते समय उससे सिर्फ एक वादा लिया कि बेटा, जिंदगीभर महिलाओं के लिए कुछ करना।
मां की इच्छा बनी मिशन
बेटे ने मां की अंतिम इच्छा को अपने जीवन का उद्देश्य बना लिया। रजत ने शहर में कंप्यूटर और सिलाई सेंटर बनाया है। यहां 2015 अब 12 हजार से ज्यादा महिलाएं और युवतियां मुफ्त में प्रशिक्षण ले चुकी हैं। इनमें से 6 हजार से ज्यादा महिलाएं अब स्वावलंबी बन चुकी हैं और रोजगार कर रही हैं। ऋषि नगर निवासी रजत कुमार ने बताया कि उनकी मां ने मरने से पहले कहा कि वह समाज की उन महिलाओं के लिए कुछ करे जो आर्थिक कमजोर हैं और आत्मनिर्भर नहीं बन पातीं।
छोटे कमरे से शुरू हुआ सफर
मां के निधन के बाद बेटे ने पढ़ाई पूरी की और नौकरी करने की बजाय समाजसेवा का रास्ता चुना। अब यहां कंप्यूटर, सिलाई-कढ़ाई, ब्यूटी पॉर्लर कोर्स और आर्ट क्राफ्ट की ट्रेनिंग दी जा रही है। महिलाएं यहां न सिर्फ कौशल सीखती हैं बल्कि नौकरी पाने और खुद का काम शुरू करने के लिए मार्गदर्शन पाती हैं।
सेंटर से जुड़ी महिलाओं का कहना है कि यह उनके जीवन का नया मोड़ साबित हुआ। कई महिलाएं जो पहले घर की चारदीवारी तक सीमित थीं अब आत्मनिर्भर होकर परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी निभा रही हैं।
कंप्यूटर और सिलाई सेंटर बने सहारा, स्वावलंबी बनीं
रजत कुमार ने बताया कि उन्होंने 2015 में अपनी मां के नाम इंदिरा देवी चैरिटेबल ट्रस्ट संस्था बनाई। उसके बाद महिलाओं और बेटियों के लिए निःशुल्क कंप्यूटर सेंटर और फैशन डिजाइनिंग का सेंटर खोला। उसी के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बना रहे हैं। शुरुआत में छोटे से कमरे में सेंटर खोला। एक कंप्यूटर सेंटर तो सात जगह सिलाई और कुछ ने सिलाई यूनिट शुरू की है तो कई कंप्यूटर प्रशिक्षण के बाद दफ्तरों में काम कर रही हैं।











