असम. नितिन गडकरी ने कामाख्या मंदिर के लिए 213 करोड़ के रोपवे प्रोजेक्ट की घोषणा की है। 1.43 किमी लंबा यह रोपवे रेलवे स्टेशन से मंदिर तक का सफर 6 मिनट में पूरा करेगा।
असम के गुवाहाटी में स्थित प्रसिद्ध शक्तिपीठ मां कामाख्या मंदिर जाने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी है। केंद्र सरकार ने भक्तों की यात्रा को सुगम और आरामदायक बनाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कामाख्या देवी मंदिर तक एक अत्याधुनिक रोपवे बनाने की घोषणा की है। इस परियोजना के पूरा होने के बाद खड़ी चढ़ाई और ट्रैफिक जाम की समस्या हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी।
रेलवे स्टेशन से सीधे मंदिर तक बनेगा रोपवे
सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार इस महत्वकांक्षी परियोजना पर कुल 213.24 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह रोपवे कामाख्या रेलवे स्टेशन को सीधे मां कामाख्या मंदिर के मुख्य द्वार से जोड़ेगा। अभी तक श्रद्धालुओं को रेलवे स्टेशन से उतरकर सड़क मार्ग से घुमावदार रास्तों के जरिए मंदिर तक जाना पड़ता था जिसमें काफी समय और ऊर्जा खर्च होती थी।
हवा में सफर और समय की भारी बचत
इस रोपवे की कुल लंबाई 1.43 किलोमीटर होगी। सबसे खास बात यह है कि जिस सफर को तय करने में अभी श्रद्धालुओं को 20 से 30 मिनट का समय लगता है वह सफर इस रोपवे के जरिए मात्र 6 मिनट में पूरा हो जाएगा।
इस प्रोजेक्ट की प्रमुख विशेषताएं
अत्याधुनिक तकनीक: यह रोपवे मोनो केबल डिटैचेबल गोंडोला तकनीक पर आधारित होगा जो सुरक्षा की दृष्टि से बेहतरीन मानी जाती है।
विशाल क्षमता: इस रोपवे के जरिए हर दिन 16,500 से अधिक श्रद्धालु आसानी से दर्शन के लिए जा सकेंगे।
भीड़ से राहत: त्यौहारों और अंबुबाची मेले के दौरान सड़क पर लगने वाले भीषण जाम से मुक्ति मिलेगी।
‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र पर काम
नितिन गडकरी ने इस परियोजना को प्रधानमंत्री के ‘विकास भी विरासत भी’ विजन का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया है। बुनियादी ढांचे के विकास के साथ साथ यह प्रोजेक्ट धार्मिक आस्था का भी सम्मान करता है। परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि यह रोपवे पर्यावरण के लिए भी अनुकूल होगा क्योंकि इससे पहाड़ी क्षेत्र में गाड़ियों से होने वाले प्रदूषण में कमी आएगी।
पर्यटन और रोजगार को मिलेंगे नए पंख
इस रोपवे के निर्माण से केवल श्रद्धालुओं को ही नहीं बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बड़ा बूस्ट मिलेगा।
पर्यटन में वृद्धि: आसान आवागमन के कारण देश विदेश से आने वाले पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी।
रोजगार के अवसर: रोपवे के संचालन और रखरखाव के साथ साथ पर्यटन बढ़ने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे।
क्यों खास है कामाख्या शक्तिपीठ
नीलांचल पर्वत पर स्थित मां कामाख्या का मंदिर 51 शक्तिपीठों में सबसे प्रमुख माना जाता है। यह तंत्र साधना का सर्वोच्च स्थल है। यहां हर साल जून महीने में प्रसिद्ध अंबुबाची मेला लगता है। मान्यता है कि इस दौरान माता रजस्वला होती हैं और मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। इस मेले में दुनिया भर से लाखों तांत्रिक और श्रद्धालु आते हैं। रोपवे बनने से इन लाखों भक्तों को दर्शन करने में बड़ी सुविधा होगी।












