असम के कामाख्या मंदिर में दर्शन सुबह 5:30 बजे से शुरू होते हैं। यहां 501 रुपये में वीआईपी दर्शन उपलब्ध हैं। हवाई और रेल मार्ग से यहां आसानी से पहुंचा जा सकता है।
असम की राजधानी गुवाहाटी की नीलांचल पहाड़ियों पर स्थित कामाख्या देवी मंदिर आस्था और रहस्य का एक अद्भुत केंद्र है। यह मंदिर हिंदू धर्म के 51 शक्तिपीठों में सबसे प्रमुख और जागृत माना जाता है। हर साल लाखों भक्त माता के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं।
अगर आप भी परिवार या दोस्तों के साथ कामाख्या देवी के दर्शन का प्लान बना रहे हैं तो यह खबर आपके लिए बहुत काम की साबित होगी। यहां हम आपको यात्रा से जुड़ी हर छोटी बड़ी जानकारी दे रहे हैं ताकि आपका सफर आरामदायक और यादगार बन सके।
कब और कैसे करें माता के दर्शन
कामाख्या मंदिर में दर्शन के लिए समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी है। मंदिर के कपाट सुबह 5:30 बजे खुल जाते हैं और दोपहर 1:00 बजे तक दर्शन होते हैं। इसके बाद भोग और विश्राम के लिए मंदिर बंद कर दिया जाता है। दोबारा कपाट दोपहर 2:30 बजे खुलते हैं और शाम 5:30 बजे तक भक्त माता के दर्शन कर सकते हैं।
वीआईपी दर्शन की सुविधा सामान्य कतार में भीड़ अधिक होने पर दर्शन में 3 से 5 घंटे का समय लग सकता है। अगर आप कम समय में दर्शन करना चाहते हैं तो मंदिर प्रशासन ने वीआईपी दर्शन की व्यवस्था की है। इसके लिए आपको काउंटर से 501 रुपये प्रति व्यक्ति का टिकट लेना होगा। इससे आप लंबी लाइन से बच सकते हैं और सीधे गर्भ गृह तक पहुंच सकते हैं। आम श्रद्धालुओं के लिए प्रवेश पूरी तरह निःशुल्क है।
हवाई और रेल मार्ग से कैसे पहुंचें
कामाख्या मंदिर की कनेक्टिविटी बहुत शानदार है।
हवाई मार्ग: यदि आप फ्लाइट से आ रहे हैं तो आपको गुवाहाटी के लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरना होगा। यहां से मंदिर की दूरी मात्र 20 किलोमीटर है जिसे आप टैक्सी या कैब के जरिए करीब 40 मिनट में पूरा कर सकते हैं।
रेल मार्ग: ट्रेन से आने वाले यात्रियों के लिए कामाख्या जंक्शन रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक है जो मंदिर से केवल 3 से 4 किलोमीटर दूर है। अगर आपकी ट्रेन गुवाहाटी रेलवे स्टेशन पर रुकती है तो वहां से भी मंदिर की दूरी सिर्फ 8 किलोमीटर है। स्टेशन के बाहर से आपको ऑटो और बसें आसानी से मिल जाएंगी।
ठहरने के लिए बेस्ट ऑप्शन
भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर के आसपास कई अच्छे होटल और धर्मशालाएं मौजूद हैं। आप अपने बजट के अनुसार इनका चयन कर सकते हैं। यदि आप मंदिर परिसर के बिल्कुल नजदीक रुकना चाहते हैं तो ‘श्रीनिवास कामाख्या धाम’ एक बेहतरीन विकल्प है।
यात्रा विशेषज्ञों की राय है कि पीक सीजन या त्योहारों के दौरान यहां काफी भीड़ होती है। इसलिए किसी भी परेशानी से बचने के लिए होटल्स या धर्मशाला की बुकिंग ऑनलाइन माध्यम से पहले ही कर लेना समझदारी होगी।
जरूरी ट्रेवल टिप्स और नियम
कामाख्या मंदिर एक पवित्र धार्मिक स्थल है इसलिए यहां जाते समय कपड़ों का विशेष ध्यान रखें। शालीन और पारंपरिक वस्त्र पहनना यहां की संस्कृति के अनुकूल माना जाता है। इसके अलावा मंदिर परिसर में फोटोग्राफी को लेकर कुछ प्रतिबंध हो सकते हैं जिनका पालन करना अनिवार्य है। अधिक और सटीक जानकारी के लिए आप ‘मां कामाख्या देवालय’ की आधिकारिक वेबसाइट की मदद ले सकते हैं।
क्यों खास है यह शक्तिपीठ
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यहां माता सती का योनि भाग गिरा था। यह दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है जहां देवी की मूर्ति की नहीं बल्कि योनि कुंड की पूजा की जाती है। जून के महीने में यहां लगने वाला अंबुबाची मेला पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है जिसमें शामिल होने के लिए देश विदेश से तांत्रिक और साधु संत आते हैं।












