Kya somvati amavasya par surya grahan 2025 lag raha hai: सूर्य ग्रहण 2025 (Surya Grahan 2025) एक ऐसी खगोलीय घटना है, जो हर साल लोगों के बीच उत्सुकता पैदा करती है। यह तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, जिससे सूर्य का प्रकाश (Sunlight Blocked) पृथ्वी तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाता। इस वजह से दिन में कुछ देर के लिए अंधेरा छा जाता है। सूर्य ग्रहण हमेशा अमावस्या के दिन होता है। साल 2025 में दूसरा सूर्य ग्रहण कब और कहां दिखेगा, आइए जानते हैं इसकी पूरी जानकारी।
सूर्य ग्रहण क्या है?
सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse) एक खगोलीय घटना (Astronomical Event) है। इसमें चंद्रमा सूर्य को ढक लेता है, जिससे पृथ्वी पर आंशिक या पूर्ण अंधेरा हो जाता है। यह घटना अमावस्या के दिन होती है, क्योंकि तब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच सटीक स्थिति में होता है। हर साल 2 से 5 सूर्य ग्रहण हो सकते हैं, लेकिन सभी हर जगह दिखाई नहीं देते। सूर्य ग्रहण का दृश्य आसमान में अनोखा नजारा पेश करता है।
सोमवती अमावस्या पर ग्रहण का सच (Surya Grahan Or Somvati Amavasya 2025)
क्या सोमवती अमावस्या (Somvati Amavasya) पर सूर्य ग्रहण 2025 (Surya Grahan 2025) होगा? नहीं, इस बार सोमवती अमावस्या पर ग्रहण की स्थिति नहीं बन रही। सोमवती अमावस्या एक धार्मिक दिन है, लेकिन इस बार यह ग्रहण से मुक्त रहेगा। इसलिए इस दिन कोई सूतक काल (Sutak Period) लागू नहीं होगा। लोग बिना किसी चिंता के पूजा-पाठ कर सकते हैं।
दूसरा सूर्य ग्रहण तारीख और समय (Surya Grahan 2025 Date)
साल 2025 का दूसरा सूर्य ग्रहण (Second Solar Eclipse) 21 सितंबर को रात 11 बजे शुरू होगा। यह देर रात 3:23 बजे तक चलेगा। यह खंडग्रास सूर्य ग्रहण (Partial Solar Eclipse) होगा, जो आश्विन अमावस्या तिथि को लगेगा। यह ग्रहण न्यूजीलैंड, फिजी, अंटार्कटिका और ऑस्ट्रेलिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा। भारत में यह ग्रहण दृश्यमान नहीं होगा, इसलिए सूतक काल का प्रभाव भी नहीं रहेगा।
भारत में सूर्य ग्रहण का प्रभाव
चूंकि सूर्य ग्रहण 2025 (Surya Grahan 2025) भारत में दिखाई नहीं देगा, इसका धार्मिक प्रभाव (Religious Impact) भी नहीं होगा। हिंदू मान्यताओं में सूतक काल तब लागू होता है, जब ग्रहण स्थानीय रूप से दृश्यमान हो। इस बार भारतीयों को सूतक नियमों का पालन करने की जरूरत नहीं है। हालांकि, खगोलीय रुचि रखने वाले लोग इस घटना को ऑनलाइन देख सकते हैं। यह ग्रहण विज्ञान और ज्योतिष दोनों के लिए रोमांचक है।













