Vat Amavasya Vrat Katha bar amavasya ki katha in Hindi: बड़ अमावस्या 2025 (Vat Amavasya 2025) ज्येष्ठ मास की अमावस्या को मनाई जाएगी, जिसे वट अमावस्या या बड़मावस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी आयु (Long Life of Husband) के लिए व्रत रखती हैं और बरगद के पेड़ की पूजा (Banyan Tree Puja) करती हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से बरगद के पेड़ के नीचे वापस पाए थे। यह कथा भक्ति और समर्पण की अनूठी मिसाल है। आइए जानते हैं बड़ अमावस्या की कहानी और इसके महत्व के बारे में।
Vat Amavasya Vrat Katha: सावित्री-सत्यवान की पौराणिक कथा
मद्र देश के राजा अश्वपति ने संतान प्राप्ति के लिए सावित्री देवी का व्रत (Savitri Vrat) और पूजन किया। इसके फलस्वरूप उन्हें पुत्री सावित्री मिली। जब सावित्री विवाह योग्य हुईं, तो उन्होंने सत्यवान को अपने पति के रूप में चुना। लेकिन देवर्षि नारद ने बताया कि सत्यवान की आयु कम है और वह शादी के 12 साल बाद मर जाएंगे। सावित्री ने फिर भी सत्यवान से विवाह (Savitri-Satyavan Marriage) किया और जंगल में उनके साथ रहने लगीं।
सावित्री की भक्ति और यमराज का वरदान
सत्यवान की मृत्यु का समय नजदीक आने पर सावित्री ने कठोर व्रत शुरू किया। जब यमराज सत्यवान के प्राण लेने आए, सावित्री उनके पीछे चल पड़ीं। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर यमराज ने वर मांगने को कहा। सावित्री ने पहले अपने सास-ससुर की नेत्र ज्योति (Eyesight Restoration) मांगी। दूसरा वर मांगते हुए उन्होंने ससुर का खोया राजपाट (Lost Kingdom) वापस मांगा। तीसरे वर में सावित्री ने सौ पुत्रों की मांग की, जिससे यमराज को सत्यवान के प्राण लौटाने पड़े।
बरगद के पेड़ का महत्व (Bad Amavasya Katha In Hindi)
मान्यता है कि सावित्री को सत्यवान के प्राण बरगद के पेड़ के नीचे मिले। इसलिए बड़ अमावस्या (Vat Amavasya) पर बरगद की पूजा का विशेष महत्व है। महिलाएं इस दिन बरगद के पेड़ के चारों ओर धागा बांधती हैं और पति की दीर्घायु की प्रार्थना करती हैं। यह पूजा भक्ति, विश्वास और वैवाहिक जीवन की मर्यादा को दर्शाती है। बरगद का पेड़ (Banyan Tree) दीर्घायु और स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
व्रत और पूजा के नियम
बड़ अमावस्या पर महिलाएं सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनती हैं। बरगद के पेड़ के नीचे दीप जलाकर पूजा (Religious Rituals) की जाती है। पेड़ की जड़ में जल चढ़ाया जाता है और धागा बांधा जाता है। सावित्री-सत्यवान की कथा (Savitri-Satyavan Story) सुनी जाती है। प्रसाद के रूप में फल और मिठाई चढ़ाई जाती हैं। इस व्रत को पूरी श्रद्धा से करने से दांपत्य जीवन में सुख और समृद्धि आती है।












