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Lapsi Tapsi Ki Kahani: लपसी-तपसी की कथा, हर व्रत-त्योहार पर जरूर पढ़ें ये दिलचस्प कहानी!

On: August 12, 2025 8:06 PM
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Lapsi Tapsi Ki Kahani: लपसी-तपसी की कथा, हर व्रत-त्योहार पर जरूर पढ़ें ये दिलचस्प कहानी!
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Lapsi Tapsi Ki Kahani In Hindi: लपसी और तपसी की कथा हर व्रत और त्योहार की पूजा में खास महत्व रखती है। यह कहानी दो भाइयों, लपसी और तपसी, की है, जो अपने-अपने तरीके से भगवान की भक्ति करते थे। लेकिन एक छोटी सी बात ने उनकी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया। यह कथा न केवल मनोरंजक है, बल्कि हमें लालच और भक्ति के सच्चे अर्थ के बारे में भी सिखाती है। आइए, इस खास कहानी को जानते हैं, जो हर व्रत-त्योहार में पढ़ी जाती है।

Lapsi Tapsi Ki Kahani: लपसी और तपसी का झगड़ा

कहानी के अनुसार, लपसी और तपसी दो भाई थे। तपसी हमेशा भगवान की तपस्या में डूबा रहता था, जबकि लपसी हर दिन सवा सेर लापसी बनाकर भगवान को भोग लगाता और फिर भोजन करता था।

एक दिन दोनों भाइयों में इस बात पर झगड़ा हो गया कि उनमें से बड़ा कौन है। तपसी कहता था, “मैं बड़ा हूं,” और लपसी कहता, “नहीं, मैं बड़ा हूं।” तभी वहां नारद जी आ पहुंचे। दोनों ने नारद जी से अपनी बात बताई और पूछा, “आप ही बताएं, हममें से बड़ा कौन है?” नारद जी ने कहा कि वे जल्दी में हैं, लेकिन अगले दिन जवाब देंगे।

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नारद जी का इम्तिहान

अगले दिन नारद जी ने दोनों भाइयों के सामने एक-एक कीमती अंगूठी रख दी। तपसी ने फौरन अंगूठी को अपने घुटने के नीचे छिपा लिया और सोचा कि इससे उसे धन मिलेगा, जिससे वह यज्ञ कर बड़ा बन जाएगा। दूसरी ओर, लपसी ने अंगूठी देखकर सोचा कि इसे रखने से उसकी जान को खतरा हो सकता है। इसलिए उसने अंगूठी फेंक दी। नारद जी ने तपसी से पूछा, “तेरे घुटने के नीचे क्या है?” जब तपसी ने घुटना हटाया, तो अंगूठी दिखी। नारद जी ने कहा, “इतनी तपस्या के बाद भी तुझमें लालच है। इसलिए लपसी तुझसे बड़ा है, और अब तुझे तपस्या का फल भी नहीं मिलेगा।”

तपसी का पश्चाताप

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तपसी शर्मिंदगी में डूब गया और नारद जी से अपनी गलती की माफी मांगने लगा। उसने पूछा, “मेरा यह लालच कैसे छूटेगा और मेरा पाप कैसे मिटेगा?” नारद जी ने बताया कि कार्तिक महीने में जो स्त्रियां व्रत रखेंगी और तुझे अपना पुण्य देंगी, तभी तेरा पाप मिटेगा। तपसी ने पूछा, “कौन मुझे अपना पुण्य देगा?” नारद जी ने जवाब दिया कि अगर कोई गाय और कुत्ते के लिए रोटी नहीं बनाएगा, ब्राह्मण को बिना दक्षिणा के विदा करेगा, साड़ी के साथ ब्लाउज नहीं देगा, दीपक से दीपक जलाएगा, या लपसी-तपसी की कथा नहीं सुनेगा, तो उसका पुण्य तुझे मिलेगा।

कथा का महत्व

कहते हैं, तभी से हर व्रत और पूजा में लपसी-तपसी की कथा पढ़ना जरूरी हो गया। यह कहानी हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति में लालच की कोई जगह नहीं होती। हर व्रत-त्योहार पर इस कथा को पढ़ने से न केवल पूजा पूरी होती है, बल्कि मन को शांति और प्रेरणा भी मिलती है। तो इस बार अपने व्रत में इस कहानी को जरूर शामिल करें और इसके संदेश को अपने जीवन में उतारें।

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मौलिक गुप्ता

मौलिक गुप्ता एक प्रतिभाशाली और अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 8 वर्षों से एंटरटेनमेंट और ट्रेंडिंग टॉपिक्स पर आकर्षक और ताज़ा खबरें लिख रहे हैं। उनकी स्टोरीज़ बॉलीवुड, टीवी, सेलिब्रिटी अपडेट्स, वायरल ट्रेंड्स और सोशल मीडिया की हलचल को कवर करती हैं, जो पाठकों को मनोरंजन की दुनिया से जोड़े रखती हैं। मौलिक का लेखन शैली जीवंत, रोचक और समयानुकूल है, जो युवा और विविध पाठकों को आकर्षित करता है। वे Haryananewspost.com न्यूज़ प्लेटफॉर्म्स पर सक्रिय हैं, जहाँ उनके लेख ट्रेंडिंग विषयों पर गहरी अंतर्दृष्टि और मनोरंजक जानकारी प्रदान करते हैं।

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