महाशिवरात्रि 2026: सनातन धर्म में भगवान शिव की आराधना का सबसे बड़ा पर्व महाशिवरात्रि साल 2026 में 15 फरवरी को मनाया जाएगा। फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को पड़ने वाला यह त्योहार शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भोलेनाथ ने वैराग्य जीवन त्यागकर गृहस्थ आश्रम में प्रवेश किया था और माता पार्वती के साथ उनका विवाह संपन्न हुआ था।
शिव और शक्ति का महामिलन
शिव पुराण के मुताबिक, महाशिवरात्रि की रात केवल विवाह का उत्सव नहीं, बल्कि सृष्टि के संतुलन का पर्व है। इसी रात भगवान शिव पहली बार अग्नि स्तंभ के रूप में यानी ‘ज्योतिर्लिंग’ स्वरूप में प्रकट हुए थे, जिसका न कोई आदि था और न अंत। यही कारण है कि भक्त इस रात जागरण कर ‘ओम नमः शिवाय’ का जाप करते हैं, ताकि उनके भीतर की नकारात्मकता और अज्ञानता का नाश हो सके।
वैज्ञानिक और आध्यात्मिक रहस्य
सद्गुरु और योग विज्ञान के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध (Northern Hemisphere) में ग्रहों की स्थिति ऐसी होती है कि इंसान के शरीर में ऊर्जा का प्रवाह स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर बढ़ता है। इसलिए इस रात रीढ़ की हड्डी को सीधा रखकर जागना और ध्यान करना शारीरिक और मानसिक चेतना के लिए लाभकारी माना जाता है।
हरियाणा के शिवालयों में गूंजेगा ‘बम-बम भोले’
हरियाणा में महाशिवरात्रि का उत्साह अलग ही स्तर पर होता है। कुरुक्षेत्र के ऐतिहासिक स्थानेश्वर महादेव मंदिर, जहां पांडवों ने भगवान शिव की पूजा की थी, वहां 15 फरवरी को लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
इसके अलावा कैथल के ग्यारह रुद्री शिव मंदिर और महेंद्रगढ़ के बागोत धाम में लगने वाले मेले के लिए स्थानीय कमेटियां विशेष प्रबंध करती हैं। शिवरात्रि पर कांवड़ लाने वाले शिवभक्तों के लिए भी हरियाणा के जीटी रोड और स्थानीय मार्गों पर भंडारे और सेवा शिविरों का आयोजन इस पर्व की सामाजिक समरसता को दर्शाता है।
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