Skanda Sashti 2025 Puja Vrat Vidhi Shubh Muhurat: भारतीय संस्कृति में व्रत और त्योहारों का विशेष महत्व है, और स्कंद षष्ठी ऐसा ही एक पवित्र अवसर है, जो भगवान कार्तिकेय (मुरुगन, स्कंद, सुब्रमण्य) की आराधना को समर्पित है। यह व्रत शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है और खासकर दक्षिण भारत, विशेष रूप से तमिलनाडु में इसे असीम श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। तमिलनाडु में इसे कंद षष्ठी के नाम से जाना जाता है, जहां भक्त छह दिनों तक उपवास और विशेष पूजा करते हैं। उत्तर भारत में भी इस व्रत का महत्व बढ़ रहा है। आइए, जानते हैं कि स्कंद षष्ठी 2025 कब है, इसकी पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व क्या है।
Skanda Sashti 2025 तिथि और समय
हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि 2 मई 2025, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन षष्ठी तिथि सुबह 9:14 बजे शुरू होगी और 3 मई 2025 को सुबह 7:51 बजे समाप्त होगी। इस दिन भक्त भगवान मुरुगन की पूजा-अर्चना कर उनकी कृपा प्राप्त करेंगे। खास बात यह है कि इस बार सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, शिववास योग और अभिजीत मुहूर्त जैसे शुभ योगों का संयोग बन रहा है, जो इस व्रत को और भी फलदायी बनाता है।
शुभ मुहूर्त: पूजा का सही समय
पंचांग के अनुसार, 2 मई को दोपहर 1:04 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू होगा, जो 3 मई को सुबह 5:39 बजे तक रहेगा। यह योग पूजा और मंत्र जाप के लिए विशेष रूप से शुभ माना जाता है। इसके साथ ही रवि योग और अभिजीत मुहूर्त भी इस दिन को और पवित्र बनाते हैं। भक्तों को इस समय का लाभ उठाकर पूजा करने की सलाह दी जाती है, ताकि उनकी मनोकामनाएं पूरी हों।
Skanda Sashti की पूजा विधि
स्कंद षष्ठी का व्रत और पूजा बेहद सरल और श्रद्धापूर्ण तरीके से की जाती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें। घर के मंदिर को साफ करें और भगवान मुरुगन की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। उन्हें फूल, फल, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें। ‘कंद षष्ठी कवचम्’ या स्कंद षष्ठी व्रत कथा का पाठ करें। भगवान मुरुगन के मंत्र, जैसे “ॐ शरवण भवाय नमः”, का जाप करें। कई भक्त इस दिन निर्जला उपवास रखते हैं, जबकि कुछ फलाहार या एक समय भोजन ग्रहण करते हैं। शाम को आरती करें और प्रसाद बांटें। अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत खोलें।
स्कंद षष्ठी का महत्व
स्कंद षष्ठी भगवान मुरुगन की शक्ति और विजय का प्रतीक है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, इसी दिन भगवान मुरुगन ने तारकासुर नामक राक्षस का वध किया था। इसलिए यह व्रत साहस, शक्ति और बुराई पर अच्छाई की जीत का उत्सव है। इस व्रत को करने से भक्तों को न केवल आध्यात्मिक शांति मिलती है, बल्कि संतान सुख, पारिवारिक समृद्धि और मंगल ग्रह के नकारात्मक प्रभावों से मुक्ति भी प्राप्त होती है। यह व्रत उन लोगों के लिए विशेष रूप से फलदायी है, जो जीवन में साहस और सफलता की कामना करते हैं।
क्यों खास है Skanda Sashti यह व्रत?
स्कंद षष्ठी का व्रत न केवल धार्मिक, बल्कि मानसिक और शारीरिक रूप से भी लाभकारी है। यह भक्तों को अनुशासन, धैर्य और भक्ति का पाठ पढ़ाता है। तमिलनाडु में भक्त मुरुगन मंदिरों में जाकर विशेष पूजा करते हैं और कंद षष्ठी कवचम् का पाठ करते हैं, जो नकारात्मक ऊर्जा को दूर करता है। उत्तर भारत में भी लोग इस व्रत को उत्साह के साथ मनाने लगे हैं, जिससे यह पर्व पूरे देश में एकता का प्रतीक बन रहा है।
स्कंद षष्ठी 2025 (Skanda Sashti 2025) भगवान मुरुगन के प्रति श्रद्धा और भक्ति का एक सुनहरा अवसर है। यह व्रत न केवल आपके जीवन में सकारात्मकता लाएगा, बल्कि आपको आंतरिक शक्ति और आत्मविश्वास भी प्रदान करेगा। तो इस 2 मई को स्कंद षष्ठी का व्रत रखें, पूजा करें और भगवान मुरुगन की कृपा से अपने जीवन को समृद्ध बनाएं।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। पूजा और व्रत से पहले अपने पंडित या गुरु से सलाह लें।












