The split tongue of the snake A mythological mystery that will give you goosebumps: सांप की दोमुंही जीभ (Snake’s Forked Tongue) को देखकर हर कोई हैरान हो जाता है। आखिर ऐसा क्या है कि इसकी जीभ दो हिस्सों में बंटी होती है? क्या यह सिर्फ प्रकृति का करिश्मा है, या इसके पीछे कोई गहरी कहानी छिपी है?
विज्ञान तो अपने तर्क देता है, लेकिन हिंदू पौराणिक ग्रंथों में इस रहस्य का जवाब कुछ और ही है। महाभारत से लेकर महर्षि कश्यप की कथा तक, सांप की जीभ का दोमुंहापन एक ऐसी कहानी बयान करता है, जो आस्था और विश्वास से भरी है। तो चलिए, इस रहस्यमयी कथा में गोता लगाते हैं और जानते हैं कि आखिर सांप की जीभ दोमुंही (Snake’s Forked Tongue) क्यों होती है!
पौराणिक कथा: कश्यप ऋषि और उनकी पत्नियों का विवाद
सांप की दोमुंही जीभ (Snake’s Forked Tongue) की कहानी शुरू होती है महर्षि कश्यप और उनकी दो पत्नियों—कद्रू और विनता—से। कद्रू ने नागों को जन्म दिया, जबकि विनता गरुड़ की मां थीं। एक दिन दोनों बहनें जंगल में टहल रही थीं, तभी उनकी नजर एक तेजी से भागते सफेद घोड़े पर पड़ी। घोड़े की पूंछ का रंग क्या था, इस बात पर दोनों में ठन गई।
कद्रू ने कहा, “पूंछ काली है,” जबकि विनता ने दावा किया, “नहीं, ये सफेद है!” बात इतनी बढ़ी कि दोनों ने शर्त लगा ली हारने वाली को जीतने वाली की दासी बनना होगा। कद्रू ने चालाकी से अपने नाग पुत्रों को आदेश दिया कि वे सर्प रूप में घोड़े की पूंछ पर लिपट जाएं, ताकि वह काली दिखे। उनकी चाल कामयाब रही, और विनता शर्त हार गईं।
गरुड़ का संघर्ष और अमृत की खोज
विनता को दासी बनता देख उनके पुत्र गरुड़ का दिल टूट गया। उन्होंने अपने नाग भाइयों से मां को आजाद करने की गुहार लगाई। नागों ने शर्त रखी, “स्वर्ग से अमृत लाओ, तभी तुम्हारी मां को छोड़ेंगे।” गरुड़ ने हिम्मत जुटाई और स्वर्ग से अमृत का कलश ले आए। लेकिन नागों को अमृत पीने से पहले स्नान करने को कहा। तभी इंद्र ने मौका देखकर अमृत का कलश वापस छीन लिया।
नागों को जब यह पता चला, तो वे गुस्से से आगबबूला हो गए। उन्होंने देखा कि कुश की चटाई पर अमृत की कुछ बूंदें गिरी थीं। लालच में वे उन बूंदों को चाटने लगे, जिससे उनकी जीभ जल गई और दो हिस्सों में बंट गई। यह देख कद्रू ने विनता पर छल का आरोप लगाया, लेकिन तभी भगवान विष्णु प्रकट हुए।
विष्णु का श्राप और दोमुंही जीभ का रहस्य
भगवान विष्णु ने कद्रू की चालबाजी का पर्दाफाश किया। उन्होंने कद्रू और उनके नाग पुत्रों को श्राप दिया, “आज से तुम्हारी जीभ दो हिस्सों में बंटी रहेगी, जो तुम्हारे छल की निशानी होगी!” तभी से सांप की जीभ दोमुंही (Snake’s Forked Tongue) हो गई। यह कथा न केवल सांप की जीभ के रहस्य को उजागर करती है, बल्कि यह भी सिखाती है कि छल और धोखे का अंजाम कभी अच्छा नहीं होता। आज भी लोग इस कहानी को सुनकर हैरान होते हैं और सांप की दोमुंही जीभ को एक पौराणिक चमत्कार मानते हैं।













