नई दिल्ली, 24 जून 2026 (UPI Autopay New Rule)। स्मार्टफोन से ऑटोमैटिक बिल चुकाने वाले देश के करोड़ों यूपीआई ग्राहकों के लिए नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) डिजिटल पेमेंट के पूरे सिस्टम को अपग्रेड करने में जुट गया है। अगर आपने भी अलग-अलग मोबाइल ऐप्स पर ऑटोपे मोड एक्टिव कर रखा है तो अब एक तगड़ा फीचर आपके स्मार्टफोन में आने वाला है। सीधे तौर पर ग्राहकों के पैसे की सुरक्षा और समय बचाने के लिए एनपीसीआई एक ऐसा सेंट्रलाइज्ड ट्रैकिंग नेटवर्क तैयार कर रहा है जिसके लाइव होते ही यूजर के सारे ई-मैंडेट (ऑटोपे) एक ही यूपीआई ऐप की स्क्रीन पर फ्लैश होने लगेंगे। आसान होगी पूरी ट्रैकिंग।
मौजूदा व्यवस्था के तहत अगर कोई शख्स नेटफ्लिक्स, हॉटस्टार जैसे ओटीटी प्लेटफॉर्म्स, पानी-बिजली के बिल या गाड़ी की लोन ईएमआई के लिए फोनपे, गूगलपे या पेटीएम जैसे अलग-अलग ऐप्स पर ऑटोपे सेट करता है तो उसे स्टेटस चेक करने के लिए उन्हीं ऐप्स के चक्कर काटने पड़ते हैं। नई तकनीकी व्यवस्था लागू होते ही आपके सारे बैंकों से लिंक ऑटोपे एक ही जगह लिस्ट के रूप में सामने आ जाएंगे। ऐप की बाउंड्री टूटेगी।
डिजिटल ट्रांजैक्शन की इस तफ्तीश में सामने आया है कि एनपीसीआई ने सभी बड़ी थर्ड पार्टी पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों और बैंकों को अपने नेटवर्क सॉफ्टवेयर में तुरंत जरूरी विधिक बदलाव करने के कड़े निर्देश जारी कर दिए हैं। इस पूरे कदम का मुख्य मकसद ग्राहकों को उनके बैंक अकाउंट से कटने वाले पैसों पर 100% कंट्रोल देना है।
सबसे बड़ी राहत उन लोगों को मिलेगी जो अक्सर भूल जाते हैं कि उनका कौन सा सब्सक्रिप्शन चालू है और किस ऐप के जरिए महीने के अंत में पैसे धड़ाधड़ कट रहे हैं। एक ही प्लेटफॉर्म पर पूरी कुंडली दिखने से यूजर को अपने वित्तीय प्रबंधन को सुधारने का तगड़ा ऑफर मिल रहा है। इससे अनजाने में होने वाले डबल पेमेंट की गलतियों पर तुरंत रोक लग जाएगी। खत्म होगा एक्स्ट्रा नुकसान।
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एनपीसीआई के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, यह नया फीचर सभी यूपीआई ऐप्स के अंदर एक्टिव मैंडेट की पूरी लिस्ट को दिखाने का काम तो बखूबी करेगा लेकिन सुरक्षा कारणों से अगर किसी ग्राहक को अपना चालू सब्सक्रिप्शन बीच में ही बंद यानी कैंसिल करना है या उसमें कोई बड़ा बदलाव करना है तो उसे उसी मूल ऐप पर री-डायरेक्ट किया जाएगा जहां से उसने पहली बार उस पेमेंट की शुरुआत की थी। फर्जीवाड़ा रोकने की तैयारी।
इस बदलाव के बाद ग्राहकों का डिजिटल पेमेंट अनुभव पूरी तरह सुधर जाएगा और बैंकों में जाने वाली फालतू शिकायतों में भी भारी कमी दर्ज होगी।










