नई दिल्ली, 23 जून 2026 (हरियाणा न्यूज पोस्ट)। स्मार्टफोन से कुछ ही सेकंड के भीतर धड़ाधड़ होने वाले यूपीआई पेमेंट ने देश में पैसों के लेन-देन को जितना आसान बनाया है, उतनी ही बड़ी मुसीबत एक छोटी सी मानवीय भूल के कारण खड़ी हो रही है। पेमेंट करते समय किसी गलत नंबर पर क्लिक हो जाना, राशि भरते वक्त गलती से एक अतिरिक्त जीरो दब जाना या किसी अनजान के खाते में बड़ी रकम ट्रांसफर हो जाना अब बेहद आम हो चुका है। कई बार तो लोगों को इस तगड़े झटके का अहसास अगले दिन सुबह अपनी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री खंगालने के बाद होता है। उड़ जाती है रातों की नींद।
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) के ताजा और बेहद चौंकाने वाले आंकड़ों के मुताबिक इसी साल मई महीने में यूपीआई ट्रांजैक्शन ने अब तक के सारे रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। इस अवधि के दौरान पूरे देश में कुल 23.2 अरब ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए, जिनकी कुल वैल्यू ₹29.90 लाख करोड़ के पार पहुंच गई। इस भारी-भरकम इस्तेमाल के बीच गलत खातों में पैसे ट्रांसफर होने के मामलों में भी जबरदस्त रफ्तार देखी गई है।
यदि आपके बैंक अकाउंट से भी किसी को ज्यादा पैसे ट्रांसफर हो गए हैं, तो सबसे पहला और विधिक कदम उस पैसे को पाने वाले व्यक्ति यानी रिसीवर से तुरंत सीधे संपर्क साधने का होना चाहिए। उसे अपनी गलती के बारे में बताएं और अतिरिक्त रकम को आपके खाते में वापस भेजने का विनम्र अनुरोध करें। मामले उलझ जाते हैं यहीं।
ईजीपे (Ezeepay) के को-फाउंडर और सीईओ शम्स तबरेज की मानें तो अगर सामने वाला व्यक्ति सीधे पैसे लौटाने में आनाकानी करता है, तो बिना देर किए अपने संबंधित बैंक और यूपीआई ऐप (जैसे PhonePe, GPay, Paytm) के कस्टमर सपोर्ट पर जाकर तुरंत इस धोखाधड़ी या गलत ट्रांजैक्शन की शिकायत दर्ज करानी चाहिए।
इस पूरी वित्तीय तफ्तीश और कानूनी रिकवरी प्रक्रिया को मजबूत बनाने के लिए आपके पास पुख्ता सबूत होने बेहद जरूरी हैं। इनमें यूपीआई ट्रांजैक्शन आईडी, पैसे कटने का स्पष्ट स्क्रीनशॉट, डिजिटल पेमेंट रसीद के साथ-साथ ट्रांजैक्शन की बिल्कुल सटीक तारीख और समय का रिकॉर्ड शामिल है। ये दस्तावेज ही बैंक में आपकी शिकायत का मुख्य आधार बनते हैं।
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तकनीकी रूप से एक बार यूपीआई ट्रांजैक्शन पूरी तरह सफल हो जाने के बाद उसे सिस्टम से तुरंत रिवर्स या सीधे कैंसिल करने का कोई ऑटोमैटिक बटन नहीं होता है। आपका संबंधित बैंक इस पूरे विवाद को सुलझाने और रिसीवर के बैंक से संपर्क साधकर आपकी एक्स्ट्रा रकम की रिकवरी कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभाता है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इस पैसे को आपके मूल अकाउंट में क्रेडिट होने में कुछ दिनों से लेकर कई हफ्तों तक का लंबा समय लग सकता है। यह पूरा मामला रिसीवर की ईमानदारी पर निर्भर करता है।
अगर पैसा पाने वाला शख्स साफ तौर पर रकम लौटाने से इनकार कर दे, तो घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि देश के बैंकिंग नियमों के तहत किसी भी व्यक्ति को गलती से मिली रकम को जबरन अपने पास रखने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। गलत नीयत रखने वाले ऐसे लोगों के खिलाफ बैंक कड़े कदम उठा सकता है।
रिसीवर ने अगर आपके भेजे पैसों को एटीएम से निकाल लिया हो या अपने निजी इस्तेमाल में खर्च भी कर दिया हो, तब भी बैंक और यूपीआई प्लेटफॉर्म के जरिए विधिक शिकायत प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। उस व्यक्ति को हर हाल में वह अतिरिक्त राशि चुकानी ही होगी। डिजिटल युग की इस रफ्तार में सावधानी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।











